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Siddharthnagar News: मोहन सेतु के रिवाइज एस्टीमेट को मंजूरी का इंतजार
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बरहज। सरयू नदी तट पर बन रहे मोहन सेतु के अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए बजट का इंतजार खत्म नहीं हुआ। धारा बदलने के बाद भेजे गए रिवाइज स्टीमेट को अभी मंजूरी नहीं मिली है। दो महीने में अगर अधूरे कार्यों को पूरा नहीं किया गया तो लोगों को साल भर और इंतजार करना पड़ेगा।
वर्ष 2013 में सपा के पूर्व सांसद स्व. मोहन सिंह के स्मृति में उनकी पुत्री व पूर्व राज्यसभा सांसद कनकलता सिंह ने सरयू नदी पर पुल स्वीकृत कराया था। करीब 95 करोड़ की लागत से 39 खंभों वाला पुल बनना शुरू हुआ, जिसे 2017 में पूर्ण होना था। लेकिन नदी के रास्ता बदलने की वजह से पुल के दूसरी तरफ का एप्रोच मार्ग नहीं बन सका।
इसके बाद बजट संशोधित कर 157 करोड़ की लागत से दोबारा पुल का निर्माण कार्य शुरू कराया गया। लेकिन, सरयू की धारा में परिवर्तन होने से नदी और दक्षिण होकर बहने लगी। बजट कम और कार्य अधिक होने के कारण दूसरी बार काम रुक गया। इसके बाद सिंचाई विभाग ने आईआईटी रुड़की की टेक्निकल टीम से इसका निरीक्षण कराने का निर्णय लिया। इसके बाद इंजीनियर जुल्फिकार के नेतृत्व में एक टीम ने मौके पर आकर आकलन किया।
टीम ने सुझाव दिया कि जिस जगह वर्तमान में नदी बह रहा है, उधर कुछ पिलर और बढ़ा दिए जाएं। इससे पुल का निर्माण पूरा हो जाएगा। इसके बाद फिर से रिवाइज स्टीमेट भेजा गया। उम्मीद थी कि मार्च के आखिरी सप्ताह तक रिवाइज स्टीमेट को मंजूरी मिल जाएगी तो कार्य शुरू हो जाएगा, लेकिन 31 मार्च तक भी अलग से धन स्वीकृत नहीं हो पाया। पुल के अवशेष निर्माण को अगर मई तक पूरा नहीं कराया गया तो बचे कार्य को अगले साल ही कराना पड़ेगा।
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वर्ष 2013 में सपा के पूर्व सांसद स्व. मोहन सिंह के स्मृति में उनकी पुत्री व पूर्व राज्यसभा सांसद कनकलता सिंह ने सरयू नदी पर पुल स्वीकृत कराया था। करीब 95 करोड़ की लागत से 39 खंभों वाला पुल बनना शुरू हुआ, जिसे 2017 में पूर्ण होना था। लेकिन नदी के रास्ता बदलने की वजह से पुल के दूसरी तरफ का एप्रोच मार्ग नहीं बन सका।
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इसके बाद बजट संशोधित कर 157 करोड़ की लागत से दोबारा पुल का निर्माण कार्य शुरू कराया गया। लेकिन, सरयू की धारा में परिवर्तन होने से नदी और दक्षिण होकर बहने लगी। बजट कम और कार्य अधिक होने के कारण दूसरी बार काम रुक गया। इसके बाद सिंचाई विभाग ने आईआईटी रुड़की की टेक्निकल टीम से इसका निरीक्षण कराने का निर्णय लिया। इसके बाद इंजीनियर जुल्फिकार के नेतृत्व में एक टीम ने मौके पर आकर आकलन किया।
टीम ने सुझाव दिया कि जिस जगह वर्तमान में नदी बह रहा है, उधर कुछ पिलर और बढ़ा दिए जाएं। इससे पुल का निर्माण पूरा हो जाएगा। इसके बाद फिर से रिवाइज स्टीमेट भेजा गया। उम्मीद थी कि मार्च के आखिरी सप्ताह तक रिवाइज स्टीमेट को मंजूरी मिल जाएगी तो कार्य शुरू हो जाएगा, लेकिन 31 मार्च तक भी अलग से धन स्वीकृत नहीं हो पाया। पुल के अवशेष निर्माण को अगर मई तक पूरा नहीं कराया गया तो बचे कार्य को अगले साल ही कराना पड़ेगा।