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Siddharthnagar News: नियम दरकिनार, व्यवस्था भी अधूरी स्कूल बसों में खतरे में मासूम
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 23 Apr 2026 02:39 AM IST
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तुलसियापुर। क्षेत्र के औरहवा गांव में मंगलवार को हुए दर्दनाक हादसे में मासूम की जान चली गई। इस हादसे ने स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद जब व्यवस्था की हकीकत जानने की कोशिश की गई तो स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में अधिकांश स्कूल बसें और वैन केवल चालक के भरोसे चल रही हैं।
नियमों की धज्जियां तो उड़ाई ही जा रही हैं, वहीं व्यवस्था भी अधूरी है। स्कूल बसों में न तो कोई सहायक है और न ही चढ़ने-उतरने के दौरान निगरानी की व्यवस्था। ऐसे में मासूम खतरे के बीच स्कूल तक का सफर तय कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे खुद ही बस में चढ़ते-उतरते हैं और इसी दौरान छोटी-सी चूक बड़ा हादसे की वजह बन जाती है। औरहवा की घटना भी इसी का उदाहरण है, जहां ड्राइवर की लापरवाही ने एक छात्र की जान ले ली। इस दौरान बस में अगर सहायक मौजूद होता तो शायद यह घटना नहीं होती। लोगों ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट और परिवहन विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद स्कूल वाहन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। नियमों के अनुसार हर स्कूल वाहन में एक शिक्षक या अधिकृत सहायक का होना अनिवार्य है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी अनदेखी की जा रही है। जानकार बताते हैं कि स्कूली वाहनों की सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित है। जब तक जमीनी स्तर पर सख्ती और जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे दोहराने का खतरा बना रहेगा। इस घटना के बाद अभिभावकों में गुस्सा और चिंता दोनों बढ़ गई है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि स्कूल वाहनों की नियमित जांच हो और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
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नियमों की धज्जियां तो उड़ाई ही जा रही हैं, वहीं व्यवस्था भी अधूरी है। स्कूल बसों में न तो कोई सहायक है और न ही चढ़ने-उतरने के दौरान निगरानी की व्यवस्था। ऐसे में मासूम खतरे के बीच स्कूल तक का सफर तय कर रहे हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे खुद ही बस में चढ़ते-उतरते हैं और इसी दौरान छोटी-सी चूक बड़ा हादसे की वजह बन जाती है। औरहवा की घटना भी इसी का उदाहरण है, जहां ड्राइवर की लापरवाही ने एक छात्र की जान ले ली। इस दौरान बस में अगर सहायक मौजूद होता तो शायद यह घटना नहीं होती। लोगों ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट और परिवहन विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद स्कूल वाहन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। नियमों के अनुसार हर स्कूल वाहन में एक शिक्षक या अधिकृत सहायक का होना अनिवार्य है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी अनदेखी की जा रही है। जानकार बताते हैं कि स्कूली वाहनों की सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित है। जब तक जमीनी स्तर पर सख्ती और जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे दोहराने का खतरा बना रहेगा। इस घटना के बाद अभिभावकों में गुस्सा और चिंता दोनों बढ़ गई है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि स्कूल वाहनों की नियमित जांच हो और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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