{"_id":"6a6e2fbc4d8c0bad9e041cec","slug":"siddharthnagar-news-48-pregnant-women-examined-at-a-camp-held-at-the-chc-siddharthnagar-news-c-227-1-sgkp1033-162169-2026-08-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: सीएचसी पर लगे शिविर में 48 गर्भवतियों की हुई जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: सीएचसी पर लगे शिविर में 48 गर्भवतियों की हुई जांच
Sat, 01 Aug 2026 11:11 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 01 Aug 2026 11:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतभारी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेंवा में सोमवार को गर्भवतियों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। महिला चिकित्सक डॉ. रेखा सिन्हा की अगुवाई में चिकित्सा टीम ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 48 गर्भवतियों की जांच करते हुए इलाज और चिकित्सीय परामर्श दिया।
शिविर में जांच के दौरान सात उच्च जोखिम वाली महिलाओं को चिह्नित किया गया। इनमें खून की कमी पाई गई। डॉ. रेखा सिन्हा ने बताया कि उच्च जोखिम होने का कारण उच्च रक्तचाप, फीटस का बेड़ा होना, गंभीर एनीमिया प्लेसेंटा का विकृत होना आदि शामिल है। शिविर के माध्यम से शुरुआती दिनों में ही उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों के खतरे के लक्षण को चिह्नित करते हुए गर्भावस्था के प्रारंभिक दिनों में इलाज व परामर्श देते हुए उच्च चिकित्सा पर संदर्भित करते हुए जच्चा और बच्चा को सुरक्षित किया जा सकता है। समय-समय पर चिकित्सीय जांच अवश्य करवाते रहें। खून, यूरिन, आयरन, फोलिक एसिड, कैलशियम की सभी गर्भवतियाें की जांच करा कर अल्बेंडाजोल आदि दवाएं दी गईं। इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग की रीता गौतम, स्टाफ नर्स राधा, रजनी सिंह, शारदा, वंदना, सुनीता आदि मौजूद रहीं।
विज्ञापन
शिविर में जांच के दौरान सात उच्च जोखिम वाली महिलाओं को चिह्नित किया गया। इनमें खून की कमी पाई गई। डॉ. रेखा सिन्हा ने बताया कि उच्च जोखिम होने का कारण उच्च रक्तचाप, फीटस का बेड़ा होना, गंभीर एनीमिया प्लेसेंटा का विकृत होना आदि शामिल है। शिविर के माध्यम से शुरुआती दिनों में ही उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों के खतरे के लक्षण को चिह्नित करते हुए गर्भावस्था के प्रारंभिक दिनों में इलाज व परामर्श देते हुए उच्च चिकित्सा पर संदर्भित करते हुए जच्चा और बच्चा को सुरक्षित किया जा सकता है। समय-समय पर चिकित्सीय जांच अवश्य करवाते रहें। खून, यूरिन, आयरन, फोलिक एसिड, कैलशियम की सभी गर्भवतियाें की जांच करा कर अल्बेंडाजोल आदि दवाएं दी गईं। इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग की रीता गौतम, स्टाफ नर्स राधा, रजनी सिंह, शारदा, वंदना, सुनीता आदि मौजूद रहीं।
विज्ञापन