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Siddharthnagar News: बदल रहा मौसम का कैलेंडर... तराई में डरा रही जलवायु

संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Mon, 19 Jan 2026 12:31 AM IST
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Siddharthnagar News : Changing weather calendar... Climate threatening in Terai
शहर में कोहरे के दौरान आवागमन करते वाहन चालक। संवाद
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सिद्धार्थनगर। मई-जून की गर्मी हो या फिर जुलाई-अगस्त में होने वाली बारिश, जनवरी की ठंड हो या फिर कोहरा, सभी अब बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। तराई इलाके में इसका असर दिख रहा है।
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खासतौर पर सुबह के समय कई घंटों तक छाया रहने वाला घना कोहरा, दोपहर में कुछ देर की कमजोर धूप और रात में अचानक बढ़ती कड़ाके की सर्दी एक नए मौसम के बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं। मौसम विशेषज्ञ इसे सामान्य सर्दी नहीं बल्कि बदलते जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत मान रहे हैं। तराई में यह जलवायु परिवर्तन लोगों को डराने लगा है। वहीं, मौसम के इस बदलाव से किसान भी परेशान हैं।
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मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सहरानपुर से लेकर सिद्धार्थनगर तक के तराई इलाके में पिछले कई सालों के मुकाबले औसत तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है जबकि सर्दियों के मौसम में धूप के कुल घंटे और बारिश की मात्रा में गिरावट आई है। इसका नतीजा यह है कि मौसम गर्म होने के बावजूद अधिक अस्थिर और अनिश्चित होता जा रहा है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार पिछले 10-15 सालों में तराई क्षेत्र का औसत न्यूनतम तापमान 0.6 से एक डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है।
सर्दियों में धूप के कुल घंटे 15-20 प्रतिशत तक घटे हैं जबकि दिसंबर-जनवरी में कोहरे वाले दिनों की संख्या पहले के मुकाबले लगभग दोगुनी हो गई है। हल्की सर्दी में बारिश (विंटर रेन) में लगातार गिरावट हो रही है, जिससे मिट्टी की नमी प्रभावित हो रही है।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्र के अनुसार, वैश्विक ताप वृद्धि के कारण वातावरण में नमी बढ़ रही है। यही नमी सर्दियों में लंबे समय तक कोहरे को टिकाए रखती हैं। पहले जहां ठंड स्थिर रहती थी, अब वहां उतार-चढ़ाव ज्यादा है। दिन में हल्की गर्मी और रात में तेज ठंड इसी असंतुलन का परिणाम है। स्थिति यह है कि खेती का पूरा पैटर्न बदल रहा है, जिससे किसान ही नहीं कृषि विज्ञानी भी कई बार चूक जा रहे हैं। घने कोहरे के चलते सड़क, रेल और हवाई यातायात लगातार प्रभावित हो रहा है। दिहाड़ी मजदूरों और गरीब तबके के लिए ठंड और नमी का यह मेल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बनता जा रहा है।
मौसम विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यही रुझान जारी रहा तो सर्दी और गर्मी दोनों मौसमों की प्रकृति बदलती जाएगी, जिसका सीधा असर लोगों के जीवन पर पड़ेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक असली सवाल ठंड की तीव्रता का नहीं बल्कि तेजी से हो रहे बदलाव को जल्दी पहचानकर अनुकूलन और रोकथाम की नीतियां अपनाने को लेकर है।इस बदले मौसम का सबसे सीधा असर खेती पर पड़ रहा है। कम धूप के कारण गेहूं, सरसों और दलहनी फसलों की पैदावार प्रभावित हो रही है।
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