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Siddharthnagar News: बोर्ड लगे पर अधिग्रहण नहीं, किसानों की फसल और भविष्य दोनों संकट में
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 11 Jun 2026 01:54 AM IST
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पथरा क्षेत्र में खलीलाबाद, बलरामपुर, बहराइच नई रेलवे लाइन के लिए रेलवे द्वारा सुमहा गांव में भू
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खलीलाबाद-बहराइच रेलवे लाइन के लिए जमीन पर बोर्ड लगाकर काम शुरू होने के संकेत, अधिग्रहण प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं
रोपाई के बाद अधिग्रहण हुआ तो भारी नुकसान की आशंका, 4900 करोड़ की परियोजना पर पारदर्शिता को लेकर सवाल
पथरा। खलीलाबाद-बलरामपुर-बहराइच रेल लाइन निर्माण के लिए बांसी तहसील के अधिकांश गांवों के किसानों की जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ। मुआवजे की आस में किसान खरीफ की फसल को लेकर किसान असमंजस में हैं कि फसल लगाएं या नहीं। उन्हें अबतक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। उनका कहना है कि छह माह पहले बोर्ड तो लगा दिया गया लेकिन अधिग्रहण होगा या नहीं, इसके बारे में जानकारी नहीं दी गई है। अब अगर फसल लगाते हैं तो बीच में अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी तो बड़ा नुकसान हो जाएगा।
खलीलाबाद- बहराइच रेल परियोजना पर काम चल रहा है। इसमें बांसी से खेसरहा के बीच में रेलवे पटरी और रेलवे स्टेशन बनाने का काम शुरू कराया गया है। दूसरे फेज में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई है। बांसी तहसील क्षेत्र के ही पथरा क्षेत्र में छह माह पहले भूमि अधिग्रहण का रेलवे द्वारा लगाया गया है। बांसी तहसील के ग्राम सिसवा के किसान अखिलेश सिंह ने बताया कि मेरा काफी जमीन रेल लाइन निर्माण की जद में आ रही है। कुछ दिन बाद धान की रोपाई शुरू होने वाली है। ऐसे में यह डर लग रहा है कि कहीं फसल लगाने के बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया न शुरू हो जाए, जिससे मेहनत के साथ लागत का भी नुकसान हो जाए। बांसी तहसील के सुमहा गांव निवासी संजय चौधरी ने बताया सर्वे का कार्य बहुत पहले पूरा हो चुका है। बांसी में स्टेशन का निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। छह माह पहले भूमि अधिग्रहण का बोर्ड भी लगाया जा चुका है पर अभी हम लोगों के जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ, जिससे धान की फसल लगाने में असमंजस हो रहा है।
मार्च 2019 में हुआ था शिलान्यास
खलीलाबाद, बलरामपुर-बहराइच रेल लाइन का शिलान्यास दो मार्च 2019 को हुआ था। तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ ही रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने शिलान्यास किया था। 240 किमी लंबी इस रेल लाइन के लिए 4939.78 करोड़ रुपए आवंटित हुआ था। नई रेलवे लाइन निर्माण में के लिए 28 गांवों के किसानों की भूमि अधिग्रहण होना है। भूमि अधिग्रहण के लिए जनपद के किसानों को भुगतान के लिए सरकार ने जिला प्रशासन को धन उपलब्ध करा दिया था। धन मिलने के बाद से ही अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन, जिम्मेदारों की लापरवाही और सुस्ती के कारण काफी समय लग गया। इसमें 17 गांव के किसानों को मुआवजा देकर भूमि अधिग्रहण कर निर्माण कार्य किया जा रहा है। शेष बचे गांव मुआवजे की आस में हैं। अब इस कार्य में तेजी आई है। किसानों को खरीफ की फसल के लिए डर सता रहा है कि कहीं लागत लगाने के बाद रेलवे लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण न कर लिया जाए, जिससे लागत बेकार न चला जाए।
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इस संबंध में एसडीएम बांसी निखिल चक्रवर्ती ने बताया कि इसका सारा डाटा जिले पर है। वहीं से पता चल पाएगा कि शेष बचे गांवों का अधिग्रहण कब होगा।
रोपाई के बाद अधिग्रहण हुआ तो भारी नुकसान की आशंका, 4900 करोड़ की परियोजना पर पारदर्शिता को लेकर सवाल
पथरा। खलीलाबाद-बलरामपुर-बहराइच रेल लाइन निर्माण के लिए बांसी तहसील के अधिकांश गांवों के किसानों की जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ। मुआवजे की आस में किसान खरीफ की फसल को लेकर किसान असमंजस में हैं कि फसल लगाएं या नहीं। उन्हें अबतक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। उनका कहना है कि छह माह पहले बोर्ड तो लगा दिया गया लेकिन अधिग्रहण होगा या नहीं, इसके बारे में जानकारी नहीं दी गई है। अब अगर फसल लगाते हैं तो बीच में अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी तो बड़ा नुकसान हो जाएगा।
खलीलाबाद- बहराइच रेल परियोजना पर काम चल रहा है। इसमें बांसी से खेसरहा के बीच में रेलवे पटरी और रेलवे स्टेशन बनाने का काम शुरू कराया गया है। दूसरे फेज में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई है। बांसी तहसील क्षेत्र के ही पथरा क्षेत्र में छह माह पहले भूमि अधिग्रहण का रेलवे द्वारा लगाया गया है। बांसी तहसील के ग्राम सिसवा के किसान अखिलेश सिंह ने बताया कि मेरा काफी जमीन रेल लाइन निर्माण की जद में आ रही है। कुछ दिन बाद धान की रोपाई शुरू होने वाली है। ऐसे में यह डर लग रहा है कि कहीं फसल लगाने के बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया न शुरू हो जाए, जिससे मेहनत के साथ लागत का भी नुकसान हो जाए। बांसी तहसील के सुमहा गांव निवासी संजय चौधरी ने बताया सर्वे का कार्य बहुत पहले पूरा हो चुका है। बांसी में स्टेशन का निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। छह माह पहले भूमि अधिग्रहण का बोर्ड भी लगाया जा चुका है पर अभी हम लोगों के जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ, जिससे धान की फसल लगाने में असमंजस हो रहा है।
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मार्च 2019 में हुआ था शिलान्यास
खलीलाबाद, बलरामपुर-बहराइच रेल लाइन का शिलान्यास दो मार्च 2019 को हुआ था। तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ ही रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने शिलान्यास किया था। 240 किमी लंबी इस रेल लाइन के लिए 4939.78 करोड़ रुपए आवंटित हुआ था। नई रेलवे लाइन निर्माण में के लिए 28 गांवों के किसानों की भूमि अधिग्रहण होना है। भूमि अधिग्रहण के लिए जनपद के किसानों को भुगतान के लिए सरकार ने जिला प्रशासन को धन उपलब्ध करा दिया था। धन मिलने के बाद से ही अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन, जिम्मेदारों की लापरवाही और सुस्ती के कारण काफी समय लग गया। इसमें 17 गांव के किसानों को मुआवजा देकर भूमि अधिग्रहण कर निर्माण कार्य किया जा रहा है। शेष बचे गांव मुआवजे की आस में हैं। अब इस कार्य में तेजी आई है। किसानों को खरीफ की फसल के लिए डर सता रहा है कि कहीं लागत लगाने के बाद रेलवे लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण न कर लिया जाए, जिससे लागत बेकार न चला जाए।
इस संबंध में एसडीएम बांसी निखिल चक्रवर्ती ने बताया कि इसका सारा डाटा जिले पर है। वहीं से पता चल पाएगा कि शेष बचे गांवों का अधिग्रहण कब होगा।