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Siddharthnagar News: ढाई साल से रुका है ओवरहेड टैंक का निर्माण कार्य
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देसही देवरिया। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भी पीने के लिए बेहतर पानी मिले, इसके लिए रामपुर श्रीपाल गांव में 2022 में पानी की टंकी के निर्माण कार्य की स्वीकृति मिली। ठेकेदार निर्माण कार्य बीच में ही आधा-अधूरा छोड़कर चला गया। दो साल से अधिक समय बीत गया, निर्माण कार्य बंद पड़ा हुआ है। लोग हैंडपंप का पानी पीने को मजबूर हैं।
सरकारी एजेंसियों के माध्यम से कराए गए सर्वेक्षण और जांच में पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश हैंडपंपों से निकलने वाले जल दूषित हैं। इसके सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर लगातार बुरा प्रभाव पड़ रहा है। गंभीर रोग के शिकार हो रहे हैं। केंद्र सरकार ने इसे गंभीरता से लिया। हर घर जल, जीवन मिशन नाम से महत्वाकांक्षी योजना लाई गई।
क्षेत्र के रामपुर श्रीपाल गांव में 2021 - 2022 में पानी की टंकी बनाए जाने की स्वीकृति मिली। 206.34 लाख रुपये की लागत से 150 किलो लीटर क्षमता की इस टंकी से दो गांवों के 395 घरों के 2,566 आबादी के लिए 11 किलोमीटर लंबी पाइप बिछाकर सबके घरों तक स्वच्छ पेयजल की सप्लाई सुनिश्चित करना है। लेकिन, ठेकेदार निर्माण कार्य को बीच में ही अधूरा छोड़कर अपना सामान लेकर चला गया। करीब दो साल से अधिक का समय बीत गया, निर्माण कार्य दोबारा शुरू नहीं हुआ।
न ठेकेदार दोबारा झांकने आया न ही विभाग ने बंद पड़े इस परियोजना को दोबारा शुरू कराना अपनी जिम्मेदारी समझी। सरकार इस योजना को धरातल पर लाने के लिए हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है। ताकि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराकर लोगों के जीवन को रोगमुक्त किया जा सके। लेकिन जमीनी सच्चाई बिल्कुल अलग है।
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क्षेत्र के रामपुर श्रीपाल गांव में 2021 - 2022 में पानी की टंकी बनाए जाने की स्वीकृति मिली। 206.34 लाख रुपये की लागत से 150 किलो लीटर क्षमता की इस टंकी से दो गांवों के 395 घरों के 2,566 आबादी के लिए 11 किलोमीटर लंबी पाइप बिछाकर सबके घरों तक स्वच्छ पेयजल की सप्लाई सुनिश्चित करना है। लेकिन, ठेकेदार निर्माण कार्य को बीच में ही अधूरा छोड़कर अपना सामान लेकर चला गया। करीब दो साल से अधिक का समय बीत गया, निर्माण कार्य दोबारा शुरू नहीं हुआ।
न ठेकेदार दोबारा झांकने आया न ही विभाग ने बंद पड़े इस परियोजना को दोबारा शुरू कराना अपनी जिम्मेदारी समझी। सरकार इस योजना को धरातल पर लाने के लिए हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है। ताकि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराकर लोगों के जीवन को रोगमुक्त किया जा सके। लेकिन जमीनी सच्चाई बिल्कुल अलग है।