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Siddharthnagar News: वाहन चालक पर मनमानी का आरोप, सीएचसी अधीक्षक ने डीएम से की शिकायत
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 11 Mar 2026 01:17 AM IST
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उसका बाजार। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. एसके पटेल ने जिलाधिकारी से मिलकर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में ठेके के माध्यम से तैनात एक वाहन चालक और स्वामी की मनमानी की शिकायत करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
डीएम शिवशरणप्पा जीएन को दिए शिकायती पत्र में डॉ. एसके पटेल ने लिखा है कि सीएचसी आरबीएसके में कार्यरत वाहन चालक, स्वामी की कार्यशैली संदिग्ध है। पिछले तीन माह से सरकारी कार्यों को न करना उनकी दिनचर्या बन गई है। फर्जी लॉगबुक भरना, रोज़-रोज़ डीजल नहीं होने का बहाना बनाना एवं अपनी मर्जी से गाड़ी लाना और ले जाना इनकी कार्यशैली में शामिल है। इसके लिए पूर्व में इनके मनमाने रवैए पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से नोटिस दिया गया था। फिर भी वाहन चालक की कार्य संस्कृति में कोई तब्दीली नहीं आई, बल्कि माह अक्टूबर में मात्र आठ दिन, नवम्बर-दिसम्बर में मात्र चार दिन ही गाड़ी चलाई गई है।
इससे स्वास्थ्य सेवाओं में कई बार बाधा उत्पन्न होती रही, जनवरी में दूसरी गाड़ी उपलब्ध करा दी गई। इससे नाराज होकर राजू यादव ने अपने सहयोगियों के साथ लामबंद होकर फर्जी जन्म प्रमा पत्र बनवाने के लिए लोगों से धनादोहन कर अस्पताल की छवि बिगाड़ने पर आमादा हो गए। फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए अनुचित दबाव भी बनाते रहते हैं। अधीक्षक ने अपने पत्र में कहा है कि इससे विभाग की छवि धूमिल कर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित के विरुद्ध अविलंब उचित कार्रवाई की मांग की है।
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डीएम शिवशरणप्पा जीएन को दिए शिकायती पत्र में डॉ. एसके पटेल ने लिखा है कि सीएचसी आरबीएसके में कार्यरत वाहन चालक, स्वामी की कार्यशैली संदिग्ध है। पिछले तीन माह से सरकारी कार्यों को न करना उनकी दिनचर्या बन गई है। फर्जी लॉगबुक भरना, रोज़-रोज़ डीजल नहीं होने का बहाना बनाना एवं अपनी मर्जी से गाड़ी लाना और ले जाना इनकी कार्यशैली में शामिल है। इसके लिए पूर्व में इनके मनमाने रवैए पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से नोटिस दिया गया था। फिर भी वाहन चालक की कार्य संस्कृति में कोई तब्दीली नहीं आई, बल्कि माह अक्टूबर में मात्र आठ दिन, नवम्बर-दिसम्बर में मात्र चार दिन ही गाड़ी चलाई गई है।
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इससे स्वास्थ्य सेवाओं में कई बार बाधा उत्पन्न होती रही, जनवरी में दूसरी गाड़ी उपलब्ध करा दी गई। इससे नाराज होकर राजू यादव ने अपने सहयोगियों के साथ लामबंद होकर फर्जी जन्म प्रमा पत्र बनवाने के लिए लोगों से धनादोहन कर अस्पताल की छवि बिगाड़ने पर आमादा हो गए। फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए अनुचित दबाव भी बनाते रहते हैं। अधीक्षक ने अपने पत्र में कहा है कि इससे विभाग की छवि धूमिल कर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित के विरुद्ध अविलंब उचित कार्रवाई की मांग की है।