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Siddharthnagar News: मिलावटी पूजा वाले तेल से निकल रहा जहरीला धुआं

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 20 Mar 2026 12:20 AM IST
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Toxic smoke emanating from adulterated puja oil
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सिद्धार्थनगर। नवरात्र में घर-घर जलते दीप सिर्फ रोशनी नहीं दे रहे, बल्कि कई जगह मिलावटी तिल के तेल जहरीला धुआं भी फैला रहे हैं। बाजार की पड़ताल में सामने आया कि सस्ते सोयाबीन और पाम ऑयल को मिलाकर ‘तिल तेल’ के नाम पर बेचे जा रहे उत्पाद जलने पर ज्यादा धुआं छोड़ रहे हैं। बंद कमरों में यह धुआं आंख, नाक और फेफड़ों पर असर डाल रहा है। यानी आस्था के इस पर्व में पूजा के साथ-साथ अनजाने में स्वास्थ्य जोखिम भी घरों में घुस रहा है।
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जिले के कई इलाकों में लोगों ने शिकायत की कि दीप जलाने के दौरान आंखों में जलन, सिरदर्द और भारीपन महसूस होता है। डॉक्टरों के अनुसार, यह लक्षण धुएं में मौजूद सूक्ष्म कण (पार्टिकुलेट मैटर) और मिलावटी तेल के जलने से निकलने वाले तत्वों के कारण हो सकते हैं। खासकर छोटे और बंद कमरों में पूजा करने पर यह असर और बढ़ जाता है।
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विशेषज्ञों के मुताबिक, शुद्ध तिल तेल अपेक्षाकृत साफ जलता है, जबकि मिलावटी तेल में अधूरा दहन होता है। इससे काला और भारी धुआं निकलता है, जो कमरे में देर तक बना रहता है। लगातार एक्सपोजर से सिरदर्द, आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
फूड सेफ्टी सिस्टम में ‘पूजा के तेल’ की स्पष्ट श्रेणी न होने से ऐसे उत्पादों की नियमित जांच सीमित रह जाती है। यही वजह है कि त्योहार के समय बाजार में मिलावटी तेल आसानी से खप जाता है और इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
सबसे ज्यादा असर बुजुर्ग और बच्चों पर : फिजिशियन डॉ. एसके राव बताते हैं कि अस्थमा, एलर्जी या सांस की बीमारी वाले मरीजों के लिए ऐसा धुआं ज्यादा खतरनाक हो सकता है। अगर तेल शुद्ध नहीं है, तो उसका दहन साफ नहीं होता। इससे निकलने वाला धुआं श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। बच्चों और बुजुर्गों में यह समस्या जल्दी दिखती है।
आस्था पर भी सीधा असर: पंडित पवन तिवारी कहते हैं कि धार्मिक मान्यताओं में तिल का तेल शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में जब उसी के नाम पर मिलावटी तेल जलाया जाए, तो यह पूजा की मूल भावना पर भी सवाल खड़ा करता है। पुजारियों का कहना है कि दीप में शुद्धता जरूरी है, लेकिन बाजार में मिल रहे तेल को पहचानना आम आदमी के लिए आसान नहीं।
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