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Sitapur News: आग से घिरे घर में बस्ते को बचाने वाली बिटिया पर उमड़ा लाड
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 06 Apr 2026 11:43 PM IST
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फोटो 33 सावित्री ।
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इरफान खान
सदरपुर (सीतापुर)।
गांव के प्राइमरी स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ती हूं। रोज पढ़ने जाती हूं। खूब पढ़ना चाहती हूं। शनिवार को घर में आग लगी तो मेरी कॉपी-किताबें जल गईंं। बाद में गुरुजी व गांव के लोगों ने किताबें, बस्ता, पेंसिल और सारा सामान दिया। मैं पढ़-लिखकर डॉक्टर बनूंगी।
ये बेबाक बोल हैं सरैया चलाकापुर गांव निवासी आठ वर्षीय सावित्री के। पढ़ाई के प्रति लगाव ऐसा कि जब पूरा घर धू-धूकर जल रहा था, उस समय भी मासूम खुद की चिंता छोड़ बस्ते को बचाने में जुटी रही। यह अलग बात है कि आग की तेज लपटों से उसकी कॉपी-किताबें नहीं बच सकीं। इस घटनाक्रम की तस्वीर को सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर पढ़ाई के खर्च की घोषणा की। इसके बाद सावित्री सोशल मीडिया से होते हुए पूरे देश में चर्चा में आई। अब प्रशासन के साथ ही शासन ने भी बिटिया के मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।
सोमवार को सावित्री के स्कूल के शिक्षकों ने उसे कॉपी-किताबें उपलब्ध कराईं। संवाद न्यूज एजेंसी ने जब सावित्री से बात की, तो वह बेबाकी से हर सवाल का जवाब देती रही। बस्ता और किताबें बेशक जल गईं, लेकिन कुछ कर गुजरने का हौसला अब भी बुलंद है।
सावित्री के पिता हरिश्चंद्र व मां संगीता ने बताया कि शनिवार को आग में पूरी गृहस्थी जल गई। उनके पास मात्र 15 बिस्वा जमीन है। इसी जमीन पर खेती करने के साथ मजदूरी करके परिवार का भरणपोषण करते हैं। परिवार में सावित्री के अलावा चार वर्षीय पुत्री सीमा और तीन वर्षीय पुत्र दिपांशु है। बताया कि बेटा-बेटी में फर्क नहीं करते हैं। गरीब होने के बावजूद बेटी सावित्री को पढ़ाकर अफसर बनाना चाहते हैं।
स्कूल में शिक्षकों ने दी किताबें, हिंदू सुरक्षा सेवा संघ ने दी शिक्षण सामग्री
सावित्री सोमवार को स्कूल पहुंची तो शिक्षक कुलदीप कुमार व अरुण कुमार के साथ प्राथमिक विद्यालय सरैंया के शिक्षक रघुवीर सिंह, कुलदीप वर्मा और सुरेश कुमार ने नई किताबें और स्टेशनरी दी। वहीं, हिंदू सुरक्षा सेवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनूप खेतान भी सावित्री के घर पहुंचे। उन्होंने स्कूल बैग, किताबें और स्टेशनरी का सामान भेंट किया।
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सदरपुर (सीतापुर)।
गांव के प्राइमरी स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ती हूं। रोज पढ़ने जाती हूं। खूब पढ़ना चाहती हूं। शनिवार को घर में आग लगी तो मेरी कॉपी-किताबें जल गईंं। बाद में गुरुजी व गांव के लोगों ने किताबें, बस्ता, पेंसिल और सारा सामान दिया। मैं पढ़-लिखकर डॉक्टर बनूंगी।
ये बेबाक बोल हैं सरैया चलाकापुर गांव निवासी आठ वर्षीय सावित्री के। पढ़ाई के प्रति लगाव ऐसा कि जब पूरा घर धू-धूकर जल रहा था, उस समय भी मासूम खुद की चिंता छोड़ बस्ते को बचाने में जुटी रही। यह अलग बात है कि आग की तेज लपटों से उसकी कॉपी-किताबें नहीं बच सकीं। इस घटनाक्रम की तस्वीर को सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर पढ़ाई के खर्च की घोषणा की। इसके बाद सावित्री सोशल मीडिया से होते हुए पूरे देश में चर्चा में आई। अब प्रशासन के साथ ही शासन ने भी बिटिया के मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।
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सोमवार को सावित्री के स्कूल के शिक्षकों ने उसे कॉपी-किताबें उपलब्ध कराईं। संवाद न्यूज एजेंसी ने जब सावित्री से बात की, तो वह बेबाकी से हर सवाल का जवाब देती रही। बस्ता और किताबें बेशक जल गईं, लेकिन कुछ कर गुजरने का हौसला अब भी बुलंद है।
सावित्री के पिता हरिश्चंद्र व मां संगीता ने बताया कि शनिवार को आग में पूरी गृहस्थी जल गई। उनके पास मात्र 15 बिस्वा जमीन है। इसी जमीन पर खेती करने के साथ मजदूरी करके परिवार का भरणपोषण करते हैं। परिवार में सावित्री के अलावा चार वर्षीय पुत्री सीमा और तीन वर्षीय पुत्र दिपांशु है। बताया कि बेटा-बेटी में फर्क नहीं करते हैं। गरीब होने के बावजूद बेटी सावित्री को पढ़ाकर अफसर बनाना चाहते हैं।
स्कूल में शिक्षकों ने दी किताबें, हिंदू सुरक्षा सेवा संघ ने दी शिक्षण सामग्री
सावित्री सोमवार को स्कूल पहुंची तो शिक्षक कुलदीप कुमार व अरुण कुमार के साथ प्राथमिक विद्यालय सरैंया के शिक्षक रघुवीर सिंह, कुलदीप वर्मा और सुरेश कुमार ने नई किताबें और स्टेशनरी दी। वहीं, हिंदू सुरक्षा सेवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनूप खेतान भी सावित्री के घर पहुंचे। उन्होंने स्कूल बैग, किताबें और स्टेशनरी का सामान भेंट किया।