फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Devotees are arriving in Naimish to celebrate Guru Purnima.

Sitapur News: गुरु पूर्णिमा मनाने के लिए नैमिष पहुंच रहे श्रद्धालु

Tue, 28 Jul 2026 01:30 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Tue, 28 Jul 2026 01:30 AM IST
विज्ञापन
Devotees are arriving in Naimish to celebrate Guru Purnima.
नैमिषारण्य ​स्थित व्यास गद्दी। संवाद
नैमिषारण्य। गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व 29 जुलाई को परंपरागत ढंग से मनाया जाएगा। इसके लिए भगवान व्यास व 88 हजार ऋषियों की पावन तपोभूमि नैमिषारण्य धाम में संतों व महंतों के आश्रम में श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं। बुधवार को सुबह से ही तीर्थ के विभिन्न आश्रमों में अनुष्ठानों के साथ गुरुजनों के श्री चरणों में शीश नवाकर गुरुदीक्षा का क्रम प्रारंभ होगा।
विज्ञापन


इस दिन नैमिष तीर्थ के व्यास आश्रम में व्यास पीठाधीश्वर अनिल कुमार शास्त्री विशेष यज्ञ अनुष्ठान करेंगे। तीर्थ के पहला आश्रम में महंत नारायण दास, बाबा रामभजन दास उर्फ दरोगा बाबा के सान्निध्य में गुरुदीक्षा, बड़ी छावनी आश्रम में मन मोहन दास, बड़े महंत बजरंग दास व महंत पवन दास हनुमान गढ़ी, कालीपीठाधीश गोपाल शास्त्री, विद्यानंद आश्रम, हरिहरानंद आश्रम में स्वामी हरिहरानन्द सरस्वती, बालाजी मंदिर में भैयाजी गुरु पूर्णिमा का पर्व धूमधाम से मनाएंगे। पर्व की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
विज्ञापन



--------------
गुरुपूर्णिमा का महत्व
गुरु पूर्णिमा से चार महीने तक परिव्राजक साधु-संत एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ होते हैं। इस अवधि में न अधिक गर्मी होती है और न अधिक सर्दी। इसलिए यह समय अध्ययन के लिए उपयुक्त माना गया है। जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता और फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, ऐसे ही गुरु चरण में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शांति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।
विज्ञापन
विज्ञापन



--------------
व्यास जी के जन्मदिन का भी है संयोग
गुरु पूर्णिमा का यह दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी है। वह संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे। उन्होंने चारों वेदों की भी रचना की थी। इस कारण उनका एक नाम वेद व्यास भी है। उन्हें आदिगुरु कहा जाता है। उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है। भक्तिकाल के संत घीसादास का भी जन्म इसी दिन हुआ था, वे कबीरदास के शिष्य थे ।


--------------
आषाढ़ की पूर्णिमा का विशेष महत्व
आषाढ़ की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा पर्व होता है। इसका अर्थ है कि गुरु तो पूर्णिमा के चंद्रमा की तरह हैं, जो पूर्ण प्रकाशमान हैं और शिष्य आषाढ़ के बादलों की तरह। आषाढ़ में चंद्रमा बादलों से घिरा रहता है। जैसे बादल रूपी शिष्यों से गुरु घिरे हों। शिष्य सब तरह के हो सकते हैं। इसलिए आषाढ़ की पूर्णिमा का विशेष महत्व है।
-महंत संतोष दास खाकी

--------------
दीक्षा लेकर आध्यात्म पथ पर चलने की प्रेरणा लेते शिष्य
गुरु पूजन की यह युगों से चली आ रही परंपरा भारतीय संस्कृति की परिचायक है। नैमिषारण्य चूंकि 88 हजार ऋषियों की तपस्या से अभिसिंचित तपोभूमि है, इसलिए यहां हजारों शिष्य संतों से दीक्षा लेकर ज्ञान तथा आध्यात्म पथ पर चलने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।
-अनिल शास्त्री, व्यासपीठाधीश्वर

..........
गुरु पूजन अवश्य करना चाहिए
जब जीवन में सद्गुरु रूपी मार्गदर्शक मिल जाता है तो जीव सांसारिक मोह माया में लिप्त हुए बिना भव सागर से सहज ही पार हो जाता है। इसलिए शिष्य धर्म का पालन करते हुए सभी सनातन धर्मियों को सनातन परंपरा के अनुसार इस दिन गुरु पूजन अवश्य करना चाहिए।
-बजरंगदास, बड़े महंत हनुमान गढ़ी

..........
अनंत है गुरु की महिमा
गुरु की महिमा अनंत है। गुरु वो ऊर्जापुंज है, जो जीवन की हर कठिनाई रूपी अंधेरे को अपने वात्सल्यपूर्ण ज्ञान से हर लेता है। यह पावन पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा भाव प्रकट करने का पावन अवसर होता है। मुझ पर भी गुरु की अनंत कृपा रही है। उनके ही आशीर्वाद से सद्ज्ञान प्राप्त हुआ है।

-गोपाल शास्त्री, कालीपीठाधीश

---------
गुरु शिष्य परंपरा देश की समृद्ध परंपरा
गुरु शिष्य परंपरा हमारे देश की समृद्ध परंपरा और कल्याणकारी संस्कृति का आधार रही है। हमारी परंपरा में जहां गुरुओं ने शिष्य के जीवन को अलौकिक ज्ञान से प्रकाशित किया है, वहीं उन्हें भगवत प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त किया है। ऐसे गुरु प्रधान पर्व पर गुरु स्वरूप में ईश्वर को बारंबार नमन है।
-महंत राजनारायण दास पांडेय, प्रधान पुजारी, चक्रतीर्थ

...........
जीवन में गुरु का होना अति आवश्यक
जीवन में गुरु का होना अति आवश्यक है, क्योंकि गुरु वह प्रकाश पुंज है, जो शिष्य के जीवन से अंधकार रूपी अज्ञान दूर करता है और उन्नति का मार्ग दिखाता है।
-महंत नारायण दास, पहला आश्रम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed