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Sitapur News: लालबाग के बलिदानियों को समर्पित पहला काव्य शहीद अष्टक प्रकाशित

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 26 Jan 2026 12:03 AM IST
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Shaheed Ashtak, the first poem dedicated to the martyrs of Lalbagh, was published.
शहीद अष्टक पुस्तक। - फोटो : शहीद अष्टक पुस्तक।
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सीतापुर। शहर का ऐतिहासिक मोतीबाग (अब लालबाग) पार्क इतिहास के पन्नों में मिनी जलियांवाला बाग के रूप में दर्ज है। देश की खातिर हाथों में तिरंगा, सिर पर कफन, दिल में देशभक्ति का जुनून और जुबां पर वंदेमातरम का उद्घघोष करने वाले छह वीर बलिदानियों की गौरव गाथा का यह पार्क गवाह है। देश की आन, बान और शान पर मर मिटने वाले इन छह शहीदों की याद में पार्क में शहीद स्मृति स्तंभ स्थापित किया गया। हालांकि इस ऐतिहासिक घटना पर अब तक कोई गद्य या पद्य सामने नहीं आया था।
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देश के 77 वें गणतंत्र दिवस इस ऐतिहासिक गौरव गाथा की पहली साहित्यिक रचना प्रकाशित हुई है। वरिष्ठ साहित्यकार रामकृष्ण पांडेय ''संजय'' ने मिनी जलियांवाला बाग के इस कांड को कविताओं के रूप में पिरोकर अपनी रचना अमर सेनानियों को समर्पित कर दी है। इस शहीद अष्टक में लालबाग में शहीद छह बलिदानियों को आठ छंद समर्पित किए गए हैं। जल्द यह पुस्तक ग्राम पंचायतों की डिजिटल लाइब्रेरी की भी शोभा बढ़ाएगी।
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वरिष्ठ साहित्यकार रामकृष्ण पांडेय ने बताया कि देश में अनेकों शहीदों की गौरवगाथाएं लिखी गई हैं। इसमें सीतापुर के बलिदानियों का योगदान सिर्फ शिलापटों तक सिमट कर रह गया था। शहीद अष्टक काव्य संकलन के माध्यम से लालबाग में 18 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन की अगुवाई करने वाले छह बलिदानियों की गौरव गाथा को काव्य रचना के रूप में पिरोया है। इस पुस्तक में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदाेलन के दौरान लालबाग में निशस्त्र राष्ट्रभक्तों पर ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा क्रूरतापूर्वक गोलियां चलाए जाने का जिक्र है। इस घटना में सीतापुर के लाल कुल्लूराम, मैकूलाल, चंद्रभाल मिश्र, मुन्नेलाल, बाबूशाह और मोहर्रम अली शहीद हो गये थे। इन सभी छह शहीदों की गौरव गाथा लालबाग पार्क स्थित शहीद स्तंभ पर जीवंत स्थिति में उत्कीर्ण है। बताया कि इन्हीं वीरों को शहीद अष्टक समर्पित है। (संवाद)

शहीद कैप्टन मनोज पांडेय को भी दी काव्यांजलि
इस काव्य संकलन में लालबाग के छह बलिदानियों के साथ सीतापुर के गौरव परमवीर चक्र विजेता अमर शहीद कैप्टन मनोज पांडेय को भी भावुक काव्यांजलि दी गई है। रामकृष्ण पांडेय ने बताया कि हाल ही में राष्ट्रपति भवन की परमवीर दीर्घा में शहीद कैप्टन मनोज पांडेय को भी शामिल किया गया है। इस पुस्तक में उन्हें भी काव्यांजलि देकर उनके शौर्य से युवाओं को परिचित कराने का प्रयास किया गया है।

युवाओं को मिलेगी प्रेरणा
इस काव्य संकलन को प्रत्येक ग्राम पंचायत की डिजिटल लाइब्रेरी तक पहुंचाने की कवायद की जाएगी। इससे लालबाग के वीर बलिदानियों की गौरवगाथा ग्रामीण अंचलों के युवाओं को प्रेरित करेगी। उन्हें गणतंत्र के इन रक्षकाें के यशस्वी इतिहास से परिचित कराया जा सकेगा। शहीद अष्टक सीतापुर की मिट्टी में जन्मे वीर बलिदानियों को समर्पित एक भावुक काव्य रचना है। - रामकृष्ण पांडेय 'संजय', वरिष्ठ साहित्यकार
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