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Sonebhadra News: कक्षा एक में एनसीईआरटी का पूरा सेट 288 में, निजी स्कूलों में किताबों केे लिए देने पड़े 4636 रुपये
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कुछ इस तरह निजी संस्थाओं की कक्षा एक और दो की पुस्तकों के लिए वसूली जा रही कीमत। -
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सोनभद्र। जिस कक्षा एक के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीआईआरटी) की किताबों के पूरे सेट की कीमत 288 है। उसी कक्षा के लिए निजी स्कूलों की किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को 3800 से 5600 रुपये तक अदा करने पड़ रहे हैं। जिले के दूसरे हिस्सों को छोड़ दें तो महज मुख्यालय पर ही अभिभावकों को निजी स्कूलों में दाखिले पर बच्चे के लिए महंगी फीस के साथ महंगी किताबें खरीदनी पड़ रही हैं। इस पर अंकुश के लिए पिछले साल चेकिंग का अभियान चलाया गया था। फीस वृद्धि पर अंकुश के दावे भी किए गए थे। बावजूद इस साल भी जहां कई विद्यालयों में फीस बढ़ोतरी की बात सामने आई हैं। वहीं चिह्नित दुकानों से ही महंगी किताबों, ड्रेस आदि की खरीदारी मजबूरी बनी हुई है।
शासन की तरफ से कम से कम तीन विद्यालयों पर पुस्तकों की उपलब्धता के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन एनसीआईआरटी को दरकिनार कर निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की प्रवृत्ति, कथित कमीशनबाजी के खेल के चलते किताबें सिर्फ चिह्नित दुकानों पर ही उपलब्ध हो पाती हैं। उसमें भी कई बुक सेलर किताबों के साथ कॉपियां और पाठ्य सामग्री खरीदने का दबाव बनाते हैं। बुक सेलर कहते हैं कि अगर उनके यहां से सिर्फ किताबें ली जाएंगी फिर उन्हें कोई लाभ नहीं हो पाएगा। क्योंकि किताब बिक्री पर जो मुनाफा उन्हें मिलना चाहिए उसका बड़ा हिस्सा पहले ही निजी विद्यालय प्रबंधन के जिम्मेदारों और प्रकाशकों के बीच बंट चुका होता है। किताब न खरीदने पर बच्चों को क्लास में डांट सहनी पड़ती है। मजबूरन अभिभावकों को महंगी फीस के साथ महंगी किताब की खरीदारी करनी पड़ती है।
केस एक:
रॉबर्ट्सगंज की आशा यादव बताती हैं कि मेरी बेटी कक्षा दो में पढ़ती है। निजी विद्यालयों की किताबें महज उनसे जुड़े विद्यालयों पर ही मिलती हैं। इसलिए चिह्नित दुकान से खरीदना मजदूरी है। महज किताब के लिए उन्हें 3774 रुपये अदा करने पड़े हैं।
केस दो:
चुर्क की सुमन बताती हैं कि उन्होंने अपने बेटे का चुर्क में संचालित एक निजी विद्यालय में दाखिला कराया है। पहले दिन से ही बच्चे को किताब के साथ विद्यालय भेजने का मेसेज भेजा जा रहा है। उन्हें महज किताब के लिए 3851 रुपये देने पड़े हैं।
केस तीन:
रॉबर्ट्सगंज के संजय बताते हैं कि उनके परिवार के दो बच्चे रॉबर्ट्सगंज के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में पढ़ते हैं। कक्षा एक के सेट के लिए 5695 और कक्षा दो के सेट के लिए 6628 रुपये अदा करने पड़े हैं। प्रत्येक निजी विद्यालय की पुस्तकें अलग-अलग हैं। हर साल किताबें बदल जा रही हैं। एक विद्यालय की पुस्तक एक ही दुकान पर उपलब्ध है।
दुद्धी की तरह मुख्यालय परिक्षेत्र में भी चलेगा अभियान? हो रही चर्चाएं
तीन-चार दिन पूर्व दुद्धी में छापेमारी और महंगी किताब की खरीदारी के लिए अभिभावकों को विवश किए जाने के मामले में नोटिस जारी किया गया है। क्या उसी तरह का अभियान मुख्यालय परिक्षेत्र व जिले के अन्य हिस्सों में भी चलाया जाएगा? इसकी चर्चाएं बनी हुई हैं। सोमवार से ज्यादातर विद्यालय खुल रहे हैं। मंगलवार से सभी विद्यालयों की कक्षाएं शुरू हो रही हैं। अभिभावकों को पहले दिन से ही बच्चों को सभी किताबों के साथ भेजने का मेसेज भेजा जा रहा है। मुख्यालय पर एनसीईआरटी की कीमत के मुकाबले 10 से 20 गुना तक अधिक कीमत वसूलने की शिकायत मिल रही है। अब तक इस पर अंकुश के लिए कोई पहल भी सामने नहीं आई है। ऐसे में निजी विद्यालय प्रबंधन और प्रकाशकों की कथित सांठगांठ के चलते महंगी कीमत वसूलने की परंपरा पर अंकुश लग पाएगा? कह पाना मुश्किल है।
जिन निजी विद्यालयों में महंगे दाम पर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें दिए जाने शिकायतें मिल रही हैं, वहां कार्रवाई की जा रही है। निजी विद्यालय संचालकों को मनमाने तरीके से फीस वसूली बंद करनी पड़ेगी। उन्हें प्रति वर्ष प्रवेश शुल्क लेने के लिए मनाही किया गया है। यदि नियम विरुद्ध कक्षाओं का संचालन किया जाता है तो ऐसे विद्यालयों की मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई के लिए संस्तुति की जाएगी। - जयराम सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक।
मुख्यालय के अभी किसी निजी विद्यालयों में इस तरह की शिकायत अभिभावकों के माध्यम से उनके पास नहीं आई है। शिकायत मिलती है तो संबंधित विद्यालय के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - मुकुल आनंद पांडेय, बेसिक शिक्षा अधिकारी।
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शासन की तरफ से कम से कम तीन विद्यालयों पर पुस्तकों की उपलब्धता के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन एनसीआईआरटी को दरकिनार कर निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की प्रवृत्ति, कथित कमीशनबाजी के खेल के चलते किताबें सिर्फ चिह्नित दुकानों पर ही उपलब्ध हो पाती हैं। उसमें भी कई बुक सेलर किताबों के साथ कॉपियां और पाठ्य सामग्री खरीदने का दबाव बनाते हैं। बुक सेलर कहते हैं कि अगर उनके यहां से सिर्फ किताबें ली जाएंगी फिर उन्हें कोई लाभ नहीं हो पाएगा। क्योंकि किताब बिक्री पर जो मुनाफा उन्हें मिलना चाहिए उसका बड़ा हिस्सा पहले ही निजी विद्यालय प्रबंधन के जिम्मेदारों और प्रकाशकों के बीच बंट चुका होता है। किताब न खरीदने पर बच्चों को क्लास में डांट सहनी पड़ती है। मजबूरन अभिभावकों को महंगी फीस के साथ महंगी किताब की खरीदारी करनी पड़ती है।
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केस एक:
रॉबर्ट्सगंज की आशा यादव बताती हैं कि मेरी बेटी कक्षा दो में पढ़ती है। निजी विद्यालयों की किताबें महज उनसे जुड़े विद्यालयों पर ही मिलती हैं। इसलिए चिह्नित दुकान से खरीदना मजदूरी है। महज किताब के लिए उन्हें 3774 रुपये अदा करने पड़े हैं।
केस दो:
चुर्क की सुमन बताती हैं कि उन्होंने अपने बेटे का चुर्क में संचालित एक निजी विद्यालय में दाखिला कराया है। पहले दिन से ही बच्चे को किताब के साथ विद्यालय भेजने का मेसेज भेजा जा रहा है। उन्हें महज किताब के लिए 3851 रुपये देने पड़े हैं।
केस तीन:
रॉबर्ट्सगंज के संजय बताते हैं कि उनके परिवार के दो बच्चे रॉबर्ट्सगंज के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में पढ़ते हैं। कक्षा एक के सेट के लिए 5695 और कक्षा दो के सेट के लिए 6628 रुपये अदा करने पड़े हैं। प्रत्येक निजी विद्यालय की पुस्तकें अलग-अलग हैं। हर साल किताबें बदल जा रही हैं। एक विद्यालय की पुस्तक एक ही दुकान पर उपलब्ध है।
दुद्धी की तरह मुख्यालय परिक्षेत्र में भी चलेगा अभियान? हो रही चर्चाएं
तीन-चार दिन पूर्व दुद्धी में छापेमारी और महंगी किताब की खरीदारी के लिए अभिभावकों को विवश किए जाने के मामले में नोटिस जारी किया गया है। क्या उसी तरह का अभियान मुख्यालय परिक्षेत्र व जिले के अन्य हिस्सों में भी चलाया जाएगा? इसकी चर्चाएं बनी हुई हैं। सोमवार से ज्यादातर विद्यालय खुल रहे हैं। मंगलवार से सभी विद्यालयों की कक्षाएं शुरू हो रही हैं। अभिभावकों को पहले दिन से ही बच्चों को सभी किताबों के साथ भेजने का मेसेज भेजा जा रहा है। मुख्यालय पर एनसीईआरटी की कीमत के मुकाबले 10 से 20 गुना तक अधिक कीमत वसूलने की शिकायत मिल रही है। अब तक इस पर अंकुश के लिए कोई पहल भी सामने नहीं आई है। ऐसे में निजी विद्यालय प्रबंधन और प्रकाशकों की कथित सांठगांठ के चलते महंगी कीमत वसूलने की परंपरा पर अंकुश लग पाएगा? कह पाना मुश्किल है।
जिन निजी विद्यालयों में महंगे दाम पर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें दिए जाने शिकायतें मिल रही हैं, वहां कार्रवाई की जा रही है। निजी विद्यालय संचालकों को मनमाने तरीके से फीस वसूली बंद करनी पड़ेगी। उन्हें प्रति वर्ष प्रवेश शुल्क लेने के लिए मनाही किया गया है। यदि नियम विरुद्ध कक्षाओं का संचालन किया जाता है तो ऐसे विद्यालयों की मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई के लिए संस्तुति की जाएगी। - जयराम सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक।
मुख्यालय के अभी किसी निजी विद्यालयों में इस तरह की शिकायत अभिभावकों के माध्यम से उनके पास नहीं आई है। शिकायत मिलती है तो संबंधित विद्यालय के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - मुकुल आनंद पांडेय, बेसिक शिक्षा अधिकारी।

कुछ इस तरह निजी संस्थाओं की कक्षा एक और दो की पुस्तकों के लिए वसूली जा रही कीमत। -

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