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Sonebhadra News: बाहर लगा था सोलर फ्रेंचाइजी का बोर्ड अंदर चल रहा था साइबर ठगी का रैकेट
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गोरखपुर से गिरफ्तार सायबर ठगी का आरोपी
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सोनभद्र। एनसीएल कर्मी से 2.65 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी की जांच में कई खुलासे हुए हैं। इसकी जांच के लिए जब सोनभद्र की साइबर पुलिस टीम गोरखपुर पहुंची तो वहां विंध्यवासिनी काॅलोनी में बाहर सोलर फ्रेंचाइजी का बोर्ड लगा मिला। वहीं अंदर से शेयर ट्रेडिंग और मार्केटिंग कंपनी के जरिये धोखाधड़ी का रैकेट चलाने की जानकारी मिली। पुलिस को गोरखपुर के भी कई लोगों से धोखाधड़ी किए जाने की जानकारी मिली है। इस गिरोह के सरगना प्रदीप सिंह को जहां शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास जारी है।
एनसीएल के बीना कोल प्रोजेक्ट में फोरमैन युगल किशोर तिवारी ने एक अप्रैल 2025 को साइबर थाने में तहरीर दी थी। इसके मुताबिक शेयर ट्रेडिंग एप शेयरखान एज के जरिए मोटे मुनाफे का लालच देकर 24 बार में 2,27,02,616 रुपये जमा कराए गए। सर्विस टैक्स के नाम पर 15,30,626 और सेंट्रल जीएसटी के नाम पर 22,95,934 रुपये जमा कराया गया। पैसा निकालने की प्रक्रिया अपनाने पर जब पासवर्ड और खाता संख्या गलत बताने लगा तब इसे सही करने के नाम पर 68 लाख रुपये और मांगे जाने लगे। मामला दर्ज कर पुलिस ने विवेचना शुरू की तो पता चला कि ठगी की धनराशि गोरखपुर में कोतवाली क्षेत्र के कुशवाहा स्टोर नखास चौक निवासी प्रदीप सिंह के खाते में स्थानांतरित हुई है। प्रभारी निरीक्षक डीके चौधरी ने बताया कि जांच के लिए टीम गोरखपुर के बैंक रोड स्थित विंध्यवासिनी कॉलोनी में पहुंची तो पता चला कि यहां शेयर ट्रेडिंग ग्रुप के लिए कार्यालय संचालित किया जा रहा है। किसी को उनकी धोखाधड़ी के बारे में मालूम न होने पाए इसके लिए कार्यालय के बाहर सोलर फ्रेंचाइजी का बोर्ड लगाया गया था और कार्यालय में 10 युवक तैनात किए गए थे।
मार्केटिंग कंपनी के जरिये की धोखाधड़ी
प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि आरोपी का एक संगठित गिरोह है। इस गिरोह ने गोरखपुर के पीपीगंज थाना अंतर्गत जंगल कौड़िया निवासी शत्रुधन सिंह, चिलुआताल थाना क्षेत्र के कुसहरा निवासी कृष्ण मोहन सिंह, पीपीगंज थाना क्षेत्र के रमवापुर निवासी विजय बहादुर सिंह, मानबहादुर सिंह, शाहपुर थाना क्षेत्र के पादरी बाजार निवासी धनंजय मल से भी मार्केटिंग एप इन्वेस्ट एम और शेयर ट्रेडिंग के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी की है। वहां की कोतवाली में इसकी प्राथमिकी भी दर्ज है।
कोलकाता-असम से जुड़ सकते हैं तार
सूत्रों की मानें तो कभी शेयर ट्रेडिंग, कभी मार्केटिंग ऐप के नाम पर धोखाधड़ी करने वाला रैकेट के तार जांच आगे बढ़ने पर कोलकात-असम तक जुड़े हो सकते हैं। पुलिस की पूछताछ में मिली जानकारियां के आधार पर आगे जांच शुरू कर दी गई है। प्रदीप के अलावा एक और व्यक्ति के खाते को संदिग्ध पाया गया है।
साइबर ठगों का गिरोह काफी बड़ा है। इस गिरोह से कौन-कौन जुड़े हैं और इनके तार कहां-कहां तक फैले हैं, इसके बारे में पूरी जानकारी जुटाते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। - अनिल कुमार, एएसपी मुख्यालय।
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एनसीएल के बीना कोल प्रोजेक्ट में फोरमैन युगल किशोर तिवारी ने एक अप्रैल 2025 को साइबर थाने में तहरीर दी थी। इसके मुताबिक शेयर ट्रेडिंग एप शेयरखान एज के जरिए मोटे मुनाफे का लालच देकर 24 बार में 2,27,02,616 रुपये जमा कराए गए। सर्विस टैक्स के नाम पर 15,30,626 और सेंट्रल जीएसटी के नाम पर 22,95,934 रुपये जमा कराया गया। पैसा निकालने की प्रक्रिया अपनाने पर जब पासवर्ड और खाता संख्या गलत बताने लगा तब इसे सही करने के नाम पर 68 लाख रुपये और मांगे जाने लगे। मामला दर्ज कर पुलिस ने विवेचना शुरू की तो पता चला कि ठगी की धनराशि गोरखपुर में कोतवाली क्षेत्र के कुशवाहा स्टोर नखास चौक निवासी प्रदीप सिंह के खाते में स्थानांतरित हुई है। प्रभारी निरीक्षक डीके चौधरी ने बताया कि जांच के लिए टीम गोरखपुर के बैंक रोड स्थित विंध्यवासिनी कॉलोनी में पहुंची तो पता चला कि यहां शेयर ट्रेडिंग ग्रुप के लिए कार्यालय संचालित किया जा रहा है। किसी को उनकी धोखाधड़ी के बारे में मालूम न होने पाए इसके लिए कार्यालय के बाहर सोलर फ्रेंचाइजी का बोर्ड लगाया गया था और कार्यालय में 10 युवक तैनात किए गए थे।
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मार्केटिंग कंपनी के जरिये की धोखाधड़ी
प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि आरोपी का एक संगठित गिरोह है। इस गिरोह ने गोरखपुर के पीपीगंज थाना अंतर्गत जंगल कौड़िया निवासी शत्रुधन सिंह, चिलुआताल थाना क्षेत्र के कुसहरा निवासी कृष्ण मोहन सिंह, पीपीगंज थाना क्षेत्र के रमवापुर निवासी विजय बहादुर सिंह, मानबहादुर सिंह, शाहपुर थाना क्षेत्र के पादरी बाजार निवासी धनंजय मल से भी मार्केटिंग एप इन्वेस्ट एम और शेयर ट्रेडिंग के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी की है। वहां की कोतवाली में इसकी प्राथमिकी भी दर्ज है।
कोलकाता-असम से जुड़ सकते हैं तार
सूत्रों की मानें तो कभी शेयर ट्रेडिंग, कभी मार्केटिंग ऐप के नाम पर धोखाधड़ी करने वाला रैकेट के तार जांच आगे बढ़ने पर कोलकात-असम तक जुड़े हो सकते हैं। पुलिस की पूछताछ में मिली जानकारियां के आधार पर आगे जांच शुरू कर दी गई है। प्रदीप के अलावा एक और व्यक्ति के खाते को संदिग्ध पाया गया है।
साइबर ठगों का गिरोह काफी बड़ा है। इस गिरोह से कौन-कौन जुड़े हैं और इनके तार कहां-कहां तक फैले हैं, इसके बारे में पूरी जानकारी जुटाते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। - अनिल कुमार, एएसपी मुख्यालय।