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Sonebhadra News: रक्त, बाल और नाखून के लिए नमूने
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सोनभद्र। सोनभद्र के पर्यावरण में प्रदूषण वहन करने की क्षमता कितनी रह गई है और प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ रहा है? इसकी जांच तेज कर दी गई है। पिछले दिनों भोपाल से आई एम्स की टीम ने प्रदूषण प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति जांची। मानव स्वास्थ्य पर प्रदूषण के प्रभाव के अध्ययन के लिए प्रभावित क्षेत्र में रह रहे लोगों के रक्त के नमूने लिए। उनके बाल और नाखून के भी नमूने लिए गए। माह के अंत तक इसकी रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
वर्ष 2018 में एनजीटी ने सोनभद्र की पर्यावरणीय स्थिति और मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव के अध्ययन का निर्देश दिया था। इसकी कवायद न होने पर पिछले वर्ष सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी ने एनजीटी में याचिका दाखिल की थी। इस पर एनजीटी ने पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन के बारे में रिपोर्ट तलब की। इसके बाद जल संसाधन मंत्रालय के निर्देश पर ऊर्जांचल परिक्षेत्र के 30 गांव चिह्नित कर प्रत्येक तीन माह पर जल प्रदूषण की स्थिति जांचने की कवायद शुरू कर दी गई। यूपीपीसीबी की तरफ से एनजीटी को जानकारी दी गई कि उन्होंने सोनभद्र के पर्यावरण के अध्ययन के लिए आईआईटी रुड़की और मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभाव की जांच के लिए एम्स भोपाल से करार कर रखा है। इसकी कवायद शुरू कर दी गई है। पिछले वर्ष आईआईटी रुड़की और एम्स भोपाल दोनों की टीमों ने जिले का दौरा भी किया था लेकिन स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई थी। इसे पूरी तरह स्पष्ट करने के लिए एम्स भोपाल की टीम ने प्रदूषण प्रभावित एरिया में लोगों के रक्त, बाल और नाखून के नमूने जुटाए। एम्स की प्रयोगशाला में इसकी परीक्षण की प्रक्रिया जारी है।
वर्ष 2021 में सीएसई ने बाल, नाखून, रक्त, दूध, अनाज, पौधे, पेड़ों के पत्ते, जल, मिट़्टी में मरकरी पाए जाने का दावा किया था। वहीं वनवासी सेवा आश्रम और लोक विज्ञान संस्थान देहरादून की टीम ने वर्ष 2024-2025 में किए गए परीक्षण में लोगों के शरीर में मानक से ज्यादा फ्लोराइड की मौजूदगी का दावा किया था।
एम्स भोपाल की टीम प्रदूषण प्रभावित इलाकों में मानव स्वास्थ्य की स्थिति की जांच में लगी है। पिछले माह एक टीम ने रक्त, नाखून और बाल के नमूने लिए थे। रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट के सके आधार पर कवायद की जाएगी। - आरके सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी।
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वर्ष 2018 में एनजीटी ने सोनभद्र की पर्यावरणीय स्थिति और मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव के अध्ययन का निर्देश दिया था। इसकी कवायद न होने पर पिछले वर्ष सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी ने एनजीटी में याचिका दाखिल की थी। इस पर एनजीटी ने पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन के बारे में रिपोर्ट तलब की। इसके बाद जल संसाधन मंत्रालय के निर्देश पर ऊर्जांचल परिक्षेत्र के 30 गांव चिह्नित कर प्रत्येक तीन माह पर जल प्रदूषण की स्थिति जांचने की कवायद शुरू कर दी गई। यूपीपीसीबी की तरफ से एनजीटी को जानकारी दी गई कि उन्होंने सोनभद्र के पर्यावरण के अध्ययन के लिए आईआईटी रुड़की और मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभाव की जांच के लिए एम्स भोपाल से करार कर रखा है। इसकी कवायद शुरू कर दी गई है। पिछले वर्ष आईआईटी रुड़की और एम्स भोपाल दोनों की टीमों ने जिले का दौरा भी किया था लेकिन स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई थी। इसे पूरी तरह स्पष्ट करने के लिए एम्स भोपाल की टीम ने प्रदूषण प्रभावित एरिया में लोगों के रक्त, बाल और नाखून के नमूने जुटाए। एम्स की प्रयोगशाला में इसकी परीक्षण की प्रक्रिया जारी है।
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वर्ष 2021 में सीएसई ने बाल, नाखून, रक्त, दूध, अनाज, पौधे, पेड़ों के पत्ते, जल, मिट़्टी में मरकरी पाए जाने का दावा किया था। वहीं वनवासी सेवा आश्रम और लोक विज्ञान संस्थान देहरादून की टीम ने वर्ष 2024-2025 में किए गए परीक्षण में लोगों के शरीर में मानक से ज्यादा फ्लोराइड की मौजूदगी का दावा किया था।
एम्स भोपाल की टीम प्रदूषण प्रभावित इलाकों में मानव स्वास्थ्य की स्थिति की जांच में लगी है। पिछले माह एक टीम ने रक्त, नाखून और बाल के नमूने लिए थे। रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट के सके आधार पर कवायद की जाएगी। - आरके सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी।