सोनभद्र। मेडिकल कॉलेज में सरकार की प्राथमिकता वाली आयुष्मान योजना से उपचार पर ग्रहण लग गया है। इसकी मुख्य वजह हड्डियों को जोड़ने व सर्जरी में प्रयुक्त होने वाले उपकरणों-सामग्री की लड़खड़ाई आपूर्ति है। पिछले छह महीने से भुगतान न मिलने से संस्था ने सामान उपलब्ध कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं। करीब डेढ़ साल से प्रोत्साहन भत्ता न मिलने से चिकित्सक-कर्मचारी भी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। हैरानी की बात है कि लगातार शिकायतों के बाद इसकी पहल शुरू भी हुई तो संबंधित पटल का काम देख रहे बाबू के अन्यत्र तबादले के 40 दिन बाद भी कार्यभार न सौंपने से मामला जस का तस अटका हुआ है। नतीजा उपचार के लिए आने वाले मरीज भटक रहे हैं या उन्हें दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। कई मरीजों को उपकरण का खर्च खुद वहन करना पड़ रहा है। आयुष्मान के जरिये मरीजों के उपचार पर खर्च होने वाली धनराशि का 25 प्रतिशत प्रोत्साहन पर व्यय किया जाता है। यह धनराशि मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर और उनके सहयोगी स्टाफ को प्रदान की जाती है। वहीं शेष धनराशि हड्डी को सहारा देने, जोड़ने वाले उपकरण, दवा और सर्जरी के लिए उपलब्ध कराए जाने वाली सामग्री आदि पर व्यय की जाती है। आंकड़े बताते हैं कि मेडिकल कॉलेज में आयुष्मान के तहत फरवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच 501 और जनवरी 2026 से 10 जुलाई 2026 के बीच 261 मरीजों का उपचार किया गया। इसके एवज में प्रस्तुत दावों के मुकाबले अब तक 99 लाख रुपये का भुगतान उपलब्ध कराया जा चुका है। बावजूद यहां लगभग डेढ़ साल से प्रोत्साहन राशि के नाम पर यहां के डॉक्टरों-स्टाफ को फूटी कौड़ी नहीं मिल पाई है। वहीं वेंडरों का भुगतान जनवरी से अब तक लंबित पड़ा हुआ है। इससे पहले भी वर्ष 2025 का भुगतान नहीं दिया गया था। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद दिसंबर 2025 तक के बिल का भुगतान किया गया। इसके बाद चुप्पी साध ली गई। उस समय भी वेंडरों ने आपूर्ति ठप की, तब जाकर भुगतान हो पाया। अब एक बार फिर से वेंडरों ने पुराने बिलों के भुगतान प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही आपूर्ति की बात कहकर हाथ खड़े कर लिए हैं। हालात पर नोडल डॉ. बलवंत नारायण और विभागाध्यक्ष डॉ. विजय सिंह ने चिंता जताते हुए प्राचार्य से कड़ा कदम उठाने का अनुरोध किया है। मेडिकल कॉलेज जैसी महत्वपूर्ण जगह पर हर महीने 100 मरीजों को भी आयुष्मान का लाभ नहीं मिल पा रहा। यह स्थिति तब है जब इसमें मरीजों की मदद के लिए आयुष्मान विभाग ने आरोग्य मित्र भी तैनात कर रखा है। आयुष्मान पोर्टल के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2026 के जुलाई महीने की 10 तारीख तक महज नौ मरीजों को आयुष्मान से उपचार की सुविधा मिल पाई। जनवरी में 37, फरवरी में 47, मार्च में 28, अप्रैल में 29, मई में 50 और जून में 61 मरीजों का आयुष्मान के जरिए इलाज किया गया। मेडिकल कॉलेज में वित्तीय चार्ज संभालने वाले वरिष्ठ सहायक धीरज श्रीवास्तव का 40 दिन पहले तबादला हो गया था, मगर अब तक उनकी ओर से चार्ज नहीं सौंपा गया है। बता दें कि वर्ष 2017 और 2022 में निदेशालय ने उनके विरुद्ध लंबित अनुशासनात्मक कार्रवाई का हवाला देते हुए वित्तीय, स्थापना व अन्य संवेदनशील पटल का कार्य नहीं सौंपने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज में उन्हें महत्वपूर्ण वित्तीय जिम्मेदारियां दी गईं। इसे लेकर वर्ष 2024 में जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव से शिकायत भी की गई थी।