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Sonebhadra News: अति पिछड़े जिले से आगे निकल बेटियों ने बनाई अपनी पहचान

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 07 Mar 2026 11:14 PM IST
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Daughters from the most backward district have made their mark
करमा ब्लॉक के करकी गांव के एक  ही किसान की तीन बेटियों का पुलिस में हुआ चयन। स्रोत स्वयं
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सोनभद्र। कभी समाज में चार-पांच बेटियों वाले परिवार को चिंता और बोझ से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब यही बेटियां परिवार की सबसे बड़ी ताकत बन रही हैं। अति पिछड़े जिलों में शामिल आदिवासी बहुल सोनभद्र के कई घरों में बेटियों ने पढ़ाई, खेल, सेना और प्रतिष्ठित संस्थानों में जगह बनाकर नई मिसाल कायम की है। सीमित संसाधनों, सामाज के तानों और जिम्मेदारियों के बीच हार मानने की बजाय एक-दूसरे का सहारा बनकर बहनों ने अपने सपनों को उड़ान दी। एक की हिम्मत दूसरी की ताकत बनी और मिलकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि बेटियां बोझ नहीं, भविष्य की सबसे मजबूत नींव होती हैं। सपनों की उड़ान के लिए लिंग नहीं, हौसले की जरूरत होती है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ऐसी ही बेटियों की प्रेरक कहानी।
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किसान की तीन बेटियों ने पहनी खाकी
केकराही। करमा थाना क्षेत्र के करकी गांव के एक साधारण किसान की तीनों बेटियों ने एक साथ पुलिस में चयनित होकर गांव ही नहीं, पूरे इलाके को गौरवान्वित कर दिया। करकी गांव निवासी अनिल सिंह खेती-बाड़ी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटियों सुमन, मंजू और आराधना को पढ़ाई के लिए हमेशा प्रेरित किया। पिता के इसी विश्वास और बेटियों की मेहनत का नतीजा रहा कि जब पुलिस भर्ती निकली तो तीनों बहनों ने आवेदन किया और मेहनत से परीक्षा में सफलता हासिल कर ली। परिणाम घोषित हुआ तो परिवार की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। तीनों बहनों ने एक साथ पुलिस की वर्दी हासिल कर ली। वर्तमान में तीनों बहने लखनऊ में प्रशिक्षण ले रही हैं। इस बीच बड़ी बहन सुमन की शादी हो चुकी है, जबकि मंजू और आराधना अभी अविवाहित हैं। पिता अनिल सिंह बताते हैं कि उन्होंने हमेशा बेटियों को बेटों से कम नहीं समझा। उन्हें उन पर नाज है।
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चार में तीन बहनों ने पाई सरकारी नौकरी
दुद्धी। तहसील के बघाडू गांव की चार बहनों की कहानी बेटियों की मेहनत और पिता के भरोसे की मिसाल बनकर सामने आई है। गांव के पूर्व प्रधान रामविचार सिंह की बड़ी बेटी शकुंतला बताती हैं कि उनके पिता करीब 11 साल तक प्रधान रहे। उन्होंने हमेशा बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। पिता ने सामाजिक बंदिशों की परवाह किए बिना बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता दी। शकुंतला बताती हैं कि परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उनकी मां कलपतिया देवी ने भी बेटियों का हौसला बढ़ाया। वह हमेशा कहती थीं कि बेटियां पढ़-लिखकर आगे बढ़ें और अपना मुकाम बनाएं। माता-पिता के इसी प्रोत्साहन का परिणाम है कि चार बहनों में तीन ने सरकारी सेवा हासिल कर परिवार और गांव का नाम रोशन किया। बड़ी बहन शकुंतला परिषदीय विद्यालय में शिक्षिका हैं। दूसरी बहन कमला गांव में आशा संगिनी के रूप में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी रहीं। तीसरी बहन सोनिया गाजीपुर में महिला हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं, जबकि सबसे छोटी बहन दुर्गावती पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में देश की सेवा कर रही हैं। बहनों का कहना है कि अगर परिवार का साथ और विश्वास मिले तो बेटियां किसी भी मंजिल को हासिल कर सकती हैं।
बेटियों ने विपरीत हालातों में आगे बढ़ने का दिखाया हौसला
सोनभद्र। बभनी ब्लाॅक के फरीपान ग्राम पंचायत निवासी रमाशंकर गोंड और पत्नी चमेली देवी मजदूरी करते हैं। उन्हें चार बेटियां पैदा हुईं तो कई लोगों ने आर्थिक स्थिति को लेकर ताना दिया लेकिन चमेली देवी ने इसकी परवाह न करते हुए बेटियों को पढ़ा-लिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का फैसला लिया और बड़ी बेटी कुसुम का शिक्षा निकेतन में दाखिला कराकर इसकी शुरुआत की। बेटी को बाहर जाने की बारी आई तब मां ने भी अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर लिए। तब कुसुम ने खुद के साथ ही बहनों की पढ़ाई में दिक्कत न आने पाए इसके लिए कैंटीन चलाने का निर्णय लिया। इसके जरिये पढ़ाई का खर्च पूरा करते हुए काशी विद्यापीठ के एनटीपीसी परिसर से एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई पूरी की। कुसुम (24) वर्तमान में बाल विकास से जुड़ी सुपोषण योजना में असिस्टेंट सुपोषण ऑफिसर है और बहनों की भी पढ़ाई जारी रखने के लिए उनका साथ देने में लगी हुई है। दूसरी बेटी रेशमी प्रयागराज से इलेक्ट्रीकल ट्रेड में पालिटेक्निक की पढ़ाई पूरी करने के बाद तैयारी कर रही है। तीसरी बेटी आशा म्योरपुर क्षेत्र के ही एक डिग्री काॅलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही है। सबसे छोटी बेटी गीता हाईस्कूल की पढ़ाई के साथ स्थानीय स्तर पर उसकी क्रिकेट के एक अच्छे खिलाड़ी के रूप में पहचान है। पिछले दिनों ब्लॉक स्तर पर हुई भाला फेंक प्रतियोगिता और दौड़ में प्रथम स्थान हासिल कर उसने लोगों का ध्यान खींचा।

करमा ब्लॉक के करकी गांव के एक  ही किसान की तीन बेटियों का पुलिस में हुआ चयन। स्रोत स्वयं

करमा ब्लॉक के करकी गांव के एक  ही किसान की तीन बेटियों का पुलिस में हुआ चयन। स्रोत स्वयं

करमा ब्लॉक के करकी गांव के एक  ही किसान की तीन बेटियों का पुलिस में हुआ चयन। स्रोत स्वयं

करमा ब्लॉक के करकी गांव के एक  ही किसान की तीन बेटियों का पुलिस में हुआ चयन। स्रोत स्वयं

करमा ब्लॉक के करकी गांव के एक  ही किसान की तीन बेटियों का पुलिस में हुआ चयन। स्रोत स्वयं

करमा ब्लॉक के करकी गांव के एक  ही किसान की तीन बेटियों का पुलिस में हुआ चयन। स्रोत स्वयं

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