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Sonebhadra News: महारानी दुर्गावती के 462वें बलिदान दिवस पर शौर्य गाथाओं से जीवंत हुआ इतिहास
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*वीरांगना महारानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर चक्का में गूंजा ‘गोंडवाना शौर्य महोत्सव’’।
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हरहुआ क्षेत्र के चक्का ग्राम स्थित गोंड़ वीरांगना महारानी दुर्गावती स्मृति भवन न्यास परिसर में बुधवार को गोंड़वाना शौर्य महोत्सव का आयोजन किया गया। यह जनजाति उत्सव महारानी दुर्गावती के 462वें बलिदान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ।
यह कार्यक्रम संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार) और संस्कृति विभाग (उत्तर प्रदेश) के सहयोग से संपन्न हुआ। निर्मल जनकल्याण एवं सांस्कृतिक समिति, लखनऊ तथा जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में इसका आयोजन किया गया। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ जन शिक्षण संस्थान निदेशालय, वाराणसी के निदेशक आनंद द्विवेदी, वरिष्ठ भाजपा नेता कपिल नारायण पाण्डेय, जिला महामंत्री व ग्राम प्रधान मधुबन यादव और पूर्व कैप्टन सतीश यादव ने किया। समिति की अध्यक्ष निर्मला शर्मा, संस्थान के सचिव बृजभान मरावी और न्यास के अध्यक्ष दिनेश कुमार गोंड़ भी इस अवसर पर उपस्थित थे। सभी ने महारानी दुर्गावती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित किया। समारोह में वक्ताओं ने कहा कि मध्यकालीन भारत के इतिहास में महारानी दुर्गावती का महिला सशक्तीकरण और राष्ट्र निर्माण में अद्वितीय योगदान रहा है।
महोत्सव के दौरान जनजातीय कला और लोक परंपराओं का प्रदर्शन किया गया। गोंड़वाना के शौर्य को दर्शाने वाले कई सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत हुए। विनोद कुमार के नेतृत्व में जिले के गोंड़ आदिवासियों ने प्रसिद्ध गोंडी नृत्य की प्रस्तुति दी। सोनभद्र से आए पवन खरवार और उनकी टोली ने पारंपरिक आदिवासी करमा नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। मोहन कुमार ने शैला नृत्य-गीत प्रस्तुत किया। प्रियंका गोंड़ ने शानदार एकल नृत्य की रंगारंग प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरीं। इस उत्सव में हरहुआ और आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान के सचिव बृजभान मरावी ने किया।
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यह कार्यक्रम संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार) और संस्कृति विभाग (उत्तर प्रदेश) के सहयोग से संपन्न हुआ। निर्मल जनकल्याण एवं सांस्कृतिक समिति, लखनऊ तथा जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में इसका आयोजन किया गया। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ जन शिक्षण संस्थान निदेशालय, वाराणसी के निदेशक आनंद द्विवेदी, वरिष्ठ भाजपा नेता कपिल नारायण पाण्डेय, जिला महामंत्री व ग्राम प्रधान मधुबन यादव और पूर्व कैप्टन सतीश यादव ने किया। समिति की अध्यक्ष निर्मला शर्मा, संस्थान के सचिव बृजभान मरावी और न्यास के अध्यक्ष दिनेश कुमार गोंड़ भी इस अवसर पर उपस्थित थे। सभी ने महारानी दुर्गावती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित किया। समारोह में वक्ताओं ने कहा कि मध्यकालीन भारत के इतिहास में महारानी दुर्गावती का महिला सशक्तीकरण और राष्ट्र निर्माण में अद्वितीय योगदान रहा है।
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महोत्सव के दौरान जनजातीय कला और लोक परंपराओं का प्रदर्शन किया गया। गोंड़वाना के शौर्य को दर्शाने वाले कई सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत हुए। विनोद कुमार के नेतृत्व में जिले के गोंड़ आदिवासियों ने प्रसिद्ध गोंडी नृत्य की प्रस्तुति दी। सोनभद्र से आए पवन खरवार और उनकी टोली ने पारंपरिक आदिवासी करमा नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। मोहन कुमार ने शैला नृत्य-गीत प्रस्तुत किया। प्रियंका गोंड़ ने शानदार एकल नृत्य की रंगारंग प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरीं। इस उत्सव में हरहुआ और आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान के सचिव बृजभान मरावी ने किया।