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Sonebhadra News: सेवानिवृत्त रेल कर्मियों के खाते से करोड़ों उड़ाने वाले अंतरराज्यीय गैंग का खुलासा, कोलकाता से दो गिरफ्तार

Thu, 13 Aug 2026 11:46 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2026 11:46 PM IST
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Interstate gang that siphoned off crores from retired railway employees' accounts busted; two arrested from Kolkata.
पेंशनरों से ठगी के आरोप में गिरफ्तार मनीष और रुपक। स्त्रोत:पुलिस
सोनभद्र। सेवानिवृत्त रेलकर्मियों के खाते से करोड़ों रुपये उड़ाने वाले साइबर अपराधियों के एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा हुआ है। गिरोह के दो सदस्यों को सोनभद्र पुलिस ने कोलकाता के दमदम से गिरफ्तार किया है। गिरोह के तार यूपी, झारखंड, बिहार से जुड़े पाए गए हैं। अब तक यह गिरोह कई कर्मियों को ठगी का शिकार बनाकर उनके खाते से करोड़ों रुपये उड़ा चुका हैं। झांसे में लेने के लिए संबंधित कर्मी के पीपीओ (पेंशन पेमेंट आर्डर) से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल किया जाता था। इसमें रेलवे डिवीजन के कुछ कर्मियों की भी संलिप्तता पाई गई है, उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। 17 जून 2025 को पेंशन अधिकारी बनकर साइबर ठगों ने ओबरा के रहने वाले शिवकुमार को झांसे में लेकर मोबाइल हैक किया और उनके खाते से 31 लाख रुपये अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर लिए। फोन-पे के जरिये 11 लाख की एफडी भी करा ली। मामला दर्ज कर साइबर पुलिस ने जांच शुरू की तो चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। यूपी के साथ झारखंड, बिहार तक हुई छानबीन में पता चला कि साइबर ठगों का यह गिरोह रेलवे के पेंशनधारकों-सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़ा डेटा रेलवे के कुछ कर्मचारियों के जरिये प्राप्त कर लेता है और उसके आधार पर लोगों को ठगी का शिकार बनाता है। साइबर थाना प्रभारी धीरेंद्र कुमार चौधरी के नेतृत्व में छह सदस्यीय टीम पहले मिर्जापुर पहुंची। वहां गैंग को संरक्षण देने वाले व्यक्तियों के बारे में जानकारी हासिल करने के बाद कोलकाता रवाना हुई। वहां पहुंचने पर पता चला कि साहेबगंज (झारखंड) जिले के मिर्जा चौकी निवासी मनीष कुमार शाह और चंदना (झारखंड) थानाक्षेत्र के गोपडीह बांका रूपक कुमार दमदम स्थित एक घनी बस्ती में छिपे हुए। वहां की पुलिस के सहयोग से बृहस्पतिवार की तड़के दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद वहां की अदालत में आरोपियों को पेश कर ट्रांजिट रिमांड हासिल किया गया। शाम को टीम वहां से सोनभद्र के लिए रवाना भी हो गई। अपर पुलिस अधीक्षक ऑपरेशन ऋषभ रुणवाल के मुताबिक आरोपी उम्मीद पोर्टल के आरएएसएस टैब पर रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारियों का डेटा हासिल करने के लिए उनकी जन्मतिथि का अनुमान लगाकर विवरण डालते थे। डेटा खुलने के बाद उसकी कॉपी कर उसे पेंशनर को भेजा जाता था। इसके जरिए उन्हें विश्वास में लेने के लिए आरोपी स्वयं को रेलवे का अधिकारी बताते थे और उनकी पेंशन संबंधी समस्याओं के समाधान का भरोसा देते थे। कभी-कभी आरोपी स्वयं को रेलवे बोर्ड का अधिकारी बताकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सूची और उनके पीपीओ नंबर भी हासिल कर लेते थे। इसके बाद पेंशन, पीपीओ में सुधार, मोबाइल नंबर अपडेट/बंद होने आदि का डर दिखाकर व्यक्तिगत एवं बैंकिंग की गोपनीय जानकारी हासिल कर ली जाती थी। इसके बाद संबंधित के मोबाइल पर एपीके फाइल/लिंक भेजकर स्क्रीन शेयरिंग कराई जाती थी। इसके बाद ओटीपी प्राप्त कर उनके बैंक खाते से धनराशि दूसरे खातों में ट्रांसफर कर ली जाती थी। आरोपियों के ठिकाने-उनके बातचीत के बारे में किसी को जानकारी न हो, इसके लिए वाईफाई राउटर व वीपीएन एप का इस्तेमाल किया जा रहा है। क्षेत्राधिकारी नोडल हर्ष पांडेय के मुताबिक आरोपियों ने पूछताछ में झारखंड के रहने वाले पवन मंडल और मुकेश मंडल के बारे में जानकारी दी है। दोनों का नाम डेटा उपलब्ध कराने वालों में सामने आया है। दोनों रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारियों/अधिकारियों का विवरण कहां से और रेलवे के किन कर्मचारियों की मदद से प्राप्त करते थे, इसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। गिरोह के सदस्य अलग-अलग भूमिकाओं में कार्य करते थे। कोई डेटा उपलब्ध कराता था। कोई पेंशनधारकों को कॉल करता था। ऑनलाइन की जाने वाली ठगी में धनराशि किन खातों में ट्रांसफर की जाए इसकी भी गिरोह में अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ठगी की धनराशि एटीएम से गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाने के लिए भी जिम्मेदारी तय थी। अब तक आरोपियों से पूछताछ में धनबाद, समस्तीपुर, हापुड़, संभल एवं मुंगेर सहित अन्य स्थानों से लगभग डेढ़ करोड़ की ठगी किए जाने की जानकारी मिल चुकी है। आगे जानकारी जुटाई जा रही है। पकड़े गए रूपक की भूमिका एटीएम से पैसे निकालकर गिरोह के दूसरे सदस्यों तक पहुंचाने की सामने आई है। पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों को ठहरने के लिए बगैर आईडी के ही कमरे उपलब्ध कराए जाते थे। मिर्जापुर में एक बड़े अपराधी के जरिए कमरा उपलब्ध कराने का भी मामला सामने आया है। पुलिस गैंग के सदस्यों और उनके शरणदाताओं के बारे में जानकारी जुटाई में लगी हुई है।
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