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Sonebhadra News: सौतेली मां की हत्या में दोषी बाल अपचारी को उम्रकैद
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सोनभद्र। करीब साढ़े छह साल पहले सौतेली मां की हत्या में न्यायालय ने बाल अपचारी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। बाल न्यायालय के न्यायाधीश अमित वीर सिंह ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए उस पर 50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक कोन थाना क्षेत्र के गिधिया टोला अजनिया गांव निवासी एक व्यक्ति ने 19 सितंबर 2019 को कोन थाने में दी तहरीर में अवगत कराया था कि वह दिन में कचनरवा बाजार गया था। उसने अपनी बेटी की शादी करीब 6 साल पूर्व कचनरवा बाजार निवासी एक व्यक्ति से की थी। उसे चार वर्ष का बेटा भी है। जिससे उसने अपनी बेटी की शादी की थी, उसकी एक पत्नी पहले से थी, जिसे लेकर वे औरंगाबाद कोर्ट गए थे। पहली पत्नी को एक बेटा भी है। घर पर उनकी बेटी अपने बेटे के साथ अकेली थी। इस दौरान पहली पत्नी के बेटे ने उनकी बेटी की चाकू मारकर हत्या कर दी।
तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने मामले की विवेचना की और पर्याप्त सबूत मिलने पर चार्जशीट दाखिल किया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषी बाल अपचारी को उम्रकैद एवं 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अदालत ने कहा कि बाल अपचारी की आयु 21 वर्ष पूरी होने तक उसे सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा। इसके बाद उसे जिला जेल स्थानांतरित किया जाएगा। इस दौरान बाल अपचारी को सुधारात्मक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
शरीर पर मिले चाकू के आठ वार, पेट में गहरी चोट
सोनभद्र। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों, पोस्टमार्टम और विधि विज्ञान प्रयोगशाला से प्राप्त रिपोर्ट का अवलोकन करते हुए पाया कि मृतका के शरीर पर आठ घाव मिले थे, जो चाकू से गोदने और काटने के थे। इसमें चोट संख्या आठ पेट में कई बार चाकू घोंपने की है। अदालत ने माना कि इन चोटों से स्पष्ट है कि बाल अपचारी का उद्देश्य सौतेली मां पर ऐसा हमला था, जिससे उसकी मौत हो जाए। ऐसे में हत्या का अपराध होना पुष्ट होता है। अदालत ने कहा कि हत्या के मामले में बाल अपचारी (फैसले के वक्त उम्र 17 वर्ष 15 दिन) को मृत्यु दंड नहीं दिया जा सकता, इसलिए उसे छोड़े जाने की संभावना के साथ उम्रकैद की सजा दी जाती है।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक कोन थाना क्षेत्र के गिधिया टोला अजनिया गांव निवासी एक व्यक्ति ने 19 सितंबर 2019 को कोन थाने में दी तहरीर में अवगत कराया था कि वह दिन में कचनरवा बाजार गया था। उसने अपनी बेटी की शादी करीब 6 साल पूर्व कचनरवा बाजार निवासी एक व्यक्ति से की थी। उसे चार वर्ष का बेटा भी है। जिससे उसने अपनी बेटी की शादी की थी, उसकी एक पत्नी पहले से थी, जिसे लेकर वे औरंगाबाद कोर्ट गए थे। पहली पत्नी को एक बेटा भी है। घर पर उनकी बेटी अपने बेटे के साथ अकेली थी। इस दौरान पहली पत्नी के बेटे ने उनकी बेटी की चाकू मारकर हत्या कर दी।
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तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने मामले की विवेचना की और पर्याप्त सबूत मिलने पर चार्जशीट दाखिल किया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषी बाल अपचारी को उम्रकैद एवं 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अदालत ने कहा कि बाल अपचारी की आयु 21 वर्ष पूरी होने तक उसे सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा। इसके बाद उसे जिला जेल स्थानांतरित किया जाएगा। इस दौरान बाल अपचारी को सुधारात्मक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
शरीर पर मिले चाकू के आठ वार, पेट में गहरी चोट
सोनभद्र। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों, पोस्टमार्टम और विधि विज्ञान प्रयोगशाला से प्राप्त रिपोर्ट का अवलोकन करते हुए पाया कि मृतका के शरीर पर आठ घाव मिले थे, जो चाकू से गोदने और काटने के थे। इसमें चोट संख्या आठ पेट में कई बार चाकू घोंपने की है। अदालत ने माना कि इन चोटों से स्पष्ट है कि बाल अपचारी का उद्देश्य सौतेली मां पर ऐसा हमला था, जिससे उसकी मौत हो जाए। ऐसे में हत्या का अपराध होना पुष्ट होता है। अदालत ने कहा कि हत्या के मामले में बाल अपचारी (फैसले के वक्त उम्र 17 वर्ष 15 दिन) को मृत्यु दंड नहीं दिया जा सकता, इसलिए उसे छोड़े जाने की संभावना के साथ उम्रकैद की सजा दी जाती है।