मां विंध्यवासिनी धाम रोजाना लाखों भक्त पहुंचते हैं। यहां विश्वस्तरीय सुविधाओं के नाम पर अरबों रुपये खर्च हो चुके हैं। बुधवार को इस सीजन की पहली बारिश सभी तैयारियों की पोल खोल दी है। जलनिकासी के लिए बनाई गई नालियां अतिक्रमण के कारण फेल हो गई। विंध्याचल के पुराने वीआईपी मार्ग, नटवां स्थित रेलवे अंडरपास, रेहड़ा चुंगी, पटेंगरा रेहड़ा, दूध नाथ तिराहा और पुरानी बारी मार्ग के रेलवे अंडरपास में बृहस्पतिवार को दोपहर तक चार फीट तक पानी भरा रहा। 12 घंटे बाद भी जलनिकासी नहीं की गई। कुछ स्थानों पर सड़क पर जलभराव के बीच वाहन फंस जाने से जाम भी लग गया। श्रद्धालुओं को आवागमन के लिए मजबूरन रेलवे ट्रैक पार करना पड़ा। जलभराव के कारण एंबुलेंस देरी से पहुंची। श्रद्धालु। विक्रम सिंह ने कहा कि हल्की बारिश होने पर भी विंध्याचल के पुराने वीआईपी मार्ग पर पानी भर जाता है। बालकृष्ण दूबे ने कहा कि जलभराव होने पर श्रद्धालु रेलवे लाइन पार करने लगते हैं। आकाश मौर्या ने कहा कि कॉरिडोर निर्माण के दौरान आधुनिक इंजीनियरिंग और स्थायी जल निकासी व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन वर्तमान स्थिति देखकर लगता है कि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं अपेक्षा के अनुरूप नहीं बन सकी हैं। घनश्याम गुप्ता ने कहा कि बुधवार को दोपहर बारह बजे एक घंटे तक बारिश हुई थी। रेलवे अंडरब्रिज के नीचे बारिश का पानी भरा है। स्थानीय लोगों की मांग है कि विंध्यधाम और शहर के प्रमुख मार्गों पर स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए। नालों की सफाई, ड्रेनेज नेटवर्क का पुनर्मूल्यांकन और जलभराव वाले स्थानों का तकनीकी सर्वे कराकर स्थायी समाधान निकाला जाए। रेलवे अंडर पास में पानी भरने के बाद उसे निकालने का एक मात्र साधन पंपिंगसेट है। अक्सर यहां पंपिंसेट मशीनें लगाई जाती हैं। तीन चार मशीनें लगाकर पानी निकाला जाता है। घंटों की प्रक्रिया के बाद राहत मिल पाती है। - जी लाल, ईओ, नगर पालिका परिषद मिर्जापुर ने कहा कि अंडरपास रेलवे का है और सड़क एनएचाई की। आम जनता को समस्या न हो। इसलिए नगर पालिका पंपिंग सेट से पानी निकलवा देती है। इसका स्थायी समाधान वे विभाग ही कर सकते हैं। नगर पालिका ने अस्थायी रुप से जेनरेटर व पंप की व्यवस्था कर दी है।