वन विभाग की नर्सरी अब दुर्लभ और धार्मिक महत्व वाले पौधों का केंद्र बनने की ओर बढ़ रही है। विभाग ने पहली बार चंदन, रुद्राक्ष, कल्पवृक्ष, अंजीर, सिंदूर, बड़हल और पलाश (ढाक) समेत सात विशेष प्रजातियों के करीब 500 पौधे तैयार किए हैं।
इन प्रजातियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन कर स्थानीय स्तर पर उपलब्धता सुनिश्चित करना विभाग का उद्देश्य है, ताकि किसानों, संस्थानों और आम लोगों को पौधों के लिए दूसरे जिलों का रुख न करना पड़े। वन विभाग के अनुसार, तैयार पौधों का रोपण सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों, धार्मिक स्थलों, सार्वजनिक परिसरों और इच्छुक किसानों के खेतों में किया जाएगा। धार्मिक, औषधीय और पर्यावरणीय महत्व को देखते हुए इन प्रजातियों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। चंदन अपनी सुगंधित लकड़ी, रुद्राक्ष आध्यात्मिक महत्व, कल्पवृक्ष समृद्धि के प्रतीक, अंजीर पोषण तथा सिंदूर वृक्ष प्राकृतिक रंग और आयुर्वेदिक उपयोग के लिए जाना जाता है। वन क्षेत्राधिकारी जयशंकर प्रसाद वर्मा ने बताया कि प्रयोग सफल रहा तो आने वाले वर्षों में हजारों पौधे तैयार किए जाएंगे।