सोनभद्र। नगवां ब्लॉक के सुदूरवर्ती गांवों को बेहतर सड़क और सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई गई योजना वर्षों बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी। पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन के तहत चयनित कोदई क्लस्टर को परिवहन सेवा से जोड़ने की योजना कागजों में ही सिमटकर रह गई। नतीजतन कोदई, पल्हारी, बैजनाथ, मरकुड़ी और चेरूई गांवों के हजारों ग्रामीण आज भी आवागमन के लिए निजी वाहनों या पैदल सफर करने को विवश हैं। रूर्बन मिशन के तहत इन गांवों का सर्वांगीण विकास करते हुए सड़क, पेयजल, मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन जैसी सुविधाएं विकसित की जानी थीं। कोदई क्लस्टर में पेयजल, मोबाइल नेटवर्क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास पर कुछ कार्य हुए भी हैं। मगर परिवहन व्यवस्था का सपना अब तक अधूरा है। योजना में इन दुर्गम गांवों तक छोटी बसों के संचालन का प्रावधान था, ताकि ग्रामीणों को तहसील, जिला मुख्यालय और बाजार तक पहुंचने में आसानी हो सके। हालांकि योजना शुरू होने के कई वर्ष बाद भी परिवहन सेवा शुरू नहीं हो सकी है। मरकुड़ी गांव के हरिशंकर, जयप्रकाश, मनोज, चेरुई के भोला, शांति देवी आदि बताते हैं कि आज भी बीमार मरीजों, गर्भवती महिलाओं, विद्यार्थियों और किसानों को आवागमन में सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। नियमित बस सेवा नहीं होने से लोगों को निजी वाहनों पर अधिक किराया खर्च करना पड़ता है, जबकि कई बार वाहन भी उपलब्ध नहीं हो पाते। ग्रामीणों का कहना है कि यदि योजना के अनुरूप छोटी बसों का संचालन शुरू हो जाए तो न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच भी आसान हो जाएगी।