शक्तिनगर। विश्व आदिवासी दिवस पर रविवार को चिल्काडांड ग्राम पंचायत सभागार में जनजातीय विमर्श 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा में जनजातीय ज्ञान : संस्कृति, प्रकृति और सतत विकास विषय पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। कार्यक्रम के संयोजक एवं आयोजन सचिव रंजीत कुमार राय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि जनजातीय समाज भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय विमर्श का उद्देश्य जनजातीय ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं को व्यापक सामाजिक विमर्श से जोड़ना है। मुख्य वक्ता काशी विद्यापीठ के डॉ. मणिकचंद पांडेय ने कहा कि जनजातीय समाज का पारंपरिक ज्ञान केवल उनकी सांस्कृतिक पहचान नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा की जीवंत धरोहर है। मुख्य अतिथि रामप्रकाश पनिका ने कहा कि जनजातीय समाज ने अपनी परंपराओं, लोकसंस्कृति और प्रकृति संरक्षण के माध्यम से भारतीय सभ्यता को समृद्ध किया है। जनजातीय क्षेत्रों के विकास के साथ उनकी सांस्कृतिक पहचान और परंपरागत ज्ञान को संरक्षित रखना आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि विश्वजीत सिंह ने कहा कि जनजातीय विमर्श को समाज के व्यापक विकास से जोड़ने की आवश्यकता है। अध्यक्षता ग्राम प्रधान हीरालाल ने की। कार्यक्रम में एनटीपीसी अधिकारी डॉ. ओमप्रकाश, अमरेश पांडेय, राघवेंद्र सिंह, अभय सिंह, विमल त्रिपाठी, राकेश सिंह, पंकज चौबे, शशि राज शर्मा आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ. विनोद पांडेय और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. छोटेलाल ने किया।