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Varanasi News: कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस प्रशासन ने रोका, जानें मामला; पदयात्रा निकालने की बनाई थी रणनीति
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Aman Vishwakarma
Updated Mon, 04 May 2026 04:11 PM IST
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सार
Varanasi News: पुलिस से कुछ समय तक तीखी नोकझोंक भी हुई, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण विरोध जारी रखा। राघवेंद्र चौबे ने कहा कि मंदिर प्रशासनिक प्रयोगशाला, टिकट आधारित व्यवसायिक केंद्र या डिजिटल नियंत्रण का मॉडल नहीं है।
मंदिर के गेट पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोका गया।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
पुलिस प्रशासन की ओर से बैरिकेडिंग लगाकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को काशी विश्वनाथ मंदिर जाने से रोका गया। मंदिर में 90 दिन की मंगला आरती पर रोक लगाने के मामले में कांग्रेस ने मैदागिन कार्यालय से विश्वनाथ मंदिर तक पदयात्रा निकालने की योजना बनाई थी। रविवार को कार्यालय के बाहर पुलिस प्रशासन ने घेरेबंदी कर उन्हें रोका। कांग्रेस की ओर से मंडलायुक्त को पांच सूत्रीय मांगपत्र भेजा गया।
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महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे के नेतृत्व में जैसे ही कांग्रेसजन मंदिर की ओर बढ़े पहले से तैनात पुलिस बल ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। प्रशासन ने कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी।
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बाबा के दरबार में दर्शन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो सरल, सहज, सुलभ और श्रद्धालु केंद्रित हो। मंगला आरती टिकट बुकिंग पर एक बार दर्शन के बाद 90 दिन की समय सीमा लगाना पूरी तरह अनुचित, अव्यवहारिक और भक्तों की धार्मिक स्वतंत्रता पर कुठाराघात है। पदयात्रा को प्रशासन ने बलपूर्वक रोक दिया। प्रदर्शन में सतनाम सिंह, प्रवीन प्रकाश, सैय्यद हसन, रमजान अली, वकील अंसारी रहे।
ये हैं पांच प्रमुख मांगें
- मंगला आरती टिकट बुकिंग पर एक बार दर्शन के बाद 90 दिन की समयसीमा तय करने का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए। यह निर्णय श्रद्धालुओं की धार्मिक स्वतंत्रता पर अनावश्यक प्रतिबंध है। मंगला आरती कोई मनोरंजन नहीं, बल्कि भक्तों की भावना से जुड़ी परंपरा है।
- मंदिर प्रशासन में कार्यरत भ्रष्ट, विवादित और बदनाम अधिकारियों को जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाए। मंदिर प्रशासन पारदर्शी, संवेदनशील और जवाबदेह होना चाहिए।
- काशी वासियों के लिए सुगम दर्शन के लिए निर्धारित प्रवेश द्वार और समयसीमा बढ़ाई जाए। स्थानीय लोगों को आराध्य के दर्शन के लिए परेशान होना पड़ रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
- एप आधारित दर्शन व्यवस्था समाप्त कर पूर्व की भांति सरल, सहज और सर्वसुलभ दर्शन व्यवस्था लागू की जाए।
- मंदिर में आने वाले चढ़ावे की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि धनराशि का उपयोग मंदिर हित, सेवा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा में हो सके।