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सीआईएससीई : 12वीं की सुविधा नहीं, मजबूरी में बोर्ड बदलेंगे मेधावी
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Thu, 30 Apr 2026 11:38 PM IST
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सुल्तानपुर। सीआईएससीई के शानदार परीक्षा परिणाम ने जिले को गर्व का मौका दिया है। मेधावियों ने बेहतरीन अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, लेकिन इस खुशी के साथ एक कड़वी सच्चाई भी सामने आई है। 10वीं के बाद आगे की पढ़ाई के रास्ते जिले में बंद हो जाते हैं।
जिले में सीआईएससीई से संचालित तीन स्कूल हैं, लेकिन सभी में पढ़ाई सिर्फ हाईस्कूल तक सीमित है। 10 वीं पास करते ही छात्रों के सामने संकट खड़ा हो जाता है। विद्यार्थी दूसरे शहरों का रुख करें या फिर मजबूरी में अपना बोर्ड बदल लें। यह स्थिति उन छात्रों के लिए और भी मुश्किल है, जो अपने ही शैक्षिक माहौल में आगे बढ़ना चाहते हैं।
अभिभावक शेषमणि दूबे ने बताया कि बाहर पढ़ाई का मतलब है हॉस्टल, कोचिंग और अन्य खर्च, जो हर परिवार के बस में नहीं। ऐसे में हमें आर्थिक मजबूरी के चलते दूसरे बोर्ड में शिफ्ट करने का फैसला लेना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ बच्चे की पढ़ाई की लय टूटती है, बल्कि उनकी मेहनत और तैयारी भी प्रभावित होती है।
शिक्षाविद मो. अतहर का कहना है कि जिले के छात्र सीआईएससीई में टॉप कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उसी बोर्ड में आगे पढ़ने का विकल्प ही नहीं है। शिक्षा व्यवस्था की यह विडंबना मेधावियों के सपनों पर ब्रेक लगा रही है। ऐसे में यदि जिले में ही इंटर स्तर तक सीआईएससीई की सुविधा शुरू हो जाए, तो यहां के छात्र राष्ट्रीय स्तर पर और बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। फिलहाल, जिले के मेधावी अपनी सफलता के बावजूद आगे की राह तलाशने को मजबूर हैं।
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जिले में सीआईएससीई से संचालित तीन स्कूल हैं, लेकिन सभी में पढ़ाई सिर्फ हाईस्कूल तक सीमित है। 10 वीं पास करते ही छात्रों के सामने संकट खड़ा हो जाता है। विद्यार्थी दूसरे शहरों का रुख करें या फिर मजबूरी में अपना बोर्ड बदल लें। यह स्थिति उन छात्रों के लिए और भी मुश्किल है, जो अपने ही शैक्षिक माहौल में आगे बढ़ना चाहते हैं।
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अभिभावक शेषमणि दूबे ने बताया कि बाहर पढ़ाई का मतलब है हॉस्टल, कोचिंग और अन्य खर्च, जो हर परिवार के बस में नहीं। ऐसे में हमें आर्थिक मजबूरी के चलते दूसरे बोर्ड में शिफ्ट करने का फैसला लेना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ बच्चे की पढ़ाई की लय टूटती है, बल्कि उनकी मेहनत और तैयारी भी प्रभावित होती है।
शिक्षाविद मो. अतहर का कहना है कि जिले के छात्र सीआईएससीई में टॉप कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उसी बोर्ड में आगे पढ़ने का विकल्प ही नहीं है। शिक्षा व्यवस्था की यह विडंबना मेधावियों के सपनों पर ब्रेक लगा रही है। ऐसे में यदि जिले में ही इंटर स्तर तक सीआईएससीई की सुविधा शुरू हो जाए, तो यहां के छात्र राष्ट्रीय स्तर पर और बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। फिलहाल, जिले के मेधावी अपनी सफलता के बावजूद आगे की राह तलाशने को मजबूर हैं।
