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Sultanpur News: वकीलों का हंगामा, बार एसोसिएशन ने वापस लिया संशोधन प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Thu, 30 Apr 2026 11:58 PM IST
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दीवानी न्यायालय परिसर में प्रदर्शन करते अधिवक्ता।-स्रोत सोशल मीडिया
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सुल्तानपुर। दीवानी न्यायालय परिसर में बृहस्पतिवार को बार एसोसिएशन के उपनियमों (बॉयलॉज) में संशोधन को लेकर जमकर हंगामा हुआ। वकीलों के विरोध और एकजुटता के आगे बार नेतृत्व को झुकना पड़ा और अध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह को संशोधन प्रस्ताव वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी।
सुबह 11 बजे जैसे ही संशोधन का एजेंडा पेश किया गया, वकीलों ने नारेबाजी शुरू कर दी। शोर-शराबे के कारण बैठक को आधे घंटे के लिए रोकना पड़ा। दोबारा बैठक शुरू होने पर माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। अधिवक्ता, अध्यक्ष और महासचिव के खिलाफ लामबंद हो गए और प्रस्ताव को तुरंत रद्द करने की मांग पर अड़ गए। स्थिति बिगड़ती देख वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने बीच-बचाव किया। उन्होंने इस संशोधन को वकीलों के हितों के खिलाफ बताते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। लगातार बढ़ते दबाव के कारण बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को पीछे हटना पड़ा और संशोधन प्रस्ताव वापस ले लिया गया। इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से रविकांत मिश्र, अशोक सिंह बिसेन, बद्री प्रसाद पांडेय, मदन तिवारी, राकेश पांडेय, रोहित अवस्थी, सूर्यनाथ यादव, वेदांग त्रिपाठी और अंकित सिंह समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल रहे।
न्यायिक कार्य ठप, बिना सुनवाई लौटे वादकारी
न्यायालय परिसर में हुए हंगामे का सीधा असर कामकाज पर पड़ा। दिनभर अदालतों में सुनवाई लगभग ठप रही, जिससे दूर-दराज से आए वादकारियों को लौटना पड़ा। धम्मौर के रामकुमार यादव ने कहा कि आज जमीन के मामले की सुनवाई होनी थी, लेकिन हंगामे के कारण बिना सुनवाई के ही अगली तारीख दे दी गई। लंभुआ के शिवराम मौर्य ने बताया कि जब मैं न्यायालय पहुंचा, तो वकील साहब ने बताया कि विरोध-प्रदर्शन के चलते आज कोई सुनवाई नहीं होगी।
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सुबह 11 बजे जैसे ही संशोधन का एजेंडा पेश किया गया, वकीलों ने नारेबाजी शुरू कर दी। शोर-शराबे के कारण बैठक को आधे घंटे के लिए रोकना पड़ा। दोबारा बैठक शुरू होने पर माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। अधिवक्ता, अध्यक्ष और महासचिव के खिलाफ लामबंद हो गए और प्रस्ताव को तुरंत रद्द करने की मांग पर अड़ गए। स्थिति बिगड़ती देख वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने बीच-बचाव किया। उन्होंने इस संशोधन को वकीलों के हितों के खिलाफ बताते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। लगातार बढ़ते दबाव के कारण बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को पीछे हटना पड़ा और संशोधन प्रस्ताव वापस ले लिया गया। इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से रविकांत मिश्र, अशोक सिंह बिसेन, बद्री प्रसाद पांडेय, मदन तिवारी, राकेश पांडेय, रोहित अवस्थी, सूर्यनाथ यादव, वेदांग त्रिपाठी और अंकित सिंह समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल रहे।
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न्यायिक कार्य ठप, बिना सुनवाई लौटे वादकारी
न्यायालय परिसर में हुए हंगामे का सीधा असर कामकाज पर पड़ा। दिनभर अदालतों में सुनवाई लगभग ठप रही, जिससे दूर-दराज से आए वादकारियों को लौटना पड़ा। धम्मौर के रामकुमार यादव ने कहा कि आज जमीन के मामले की सुनवाई होनी थी, लेकिन हंगामे के कारण बिना सुनवाई के ही अगली तारीख दे दी गई। लंभुआ के शिवराम मौर्य ने बताया कि जब मैं न्यायालय पहुंचा, तो वकील साहब ने बताया कि विरोध-प्रदर्शन के चलते आज कोई सुनवाई नहीं होगी।
