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Sultanpur News: सीजेएम के एफआईआर दर्ज करने के आदेश को जिला जज कोर्ट में चुनौती
Sun, 09 Aug 2026 11:51 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Sun, 09 Aug 2026 11:51 PM IST
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सुल्तानपुर। सिपाही के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के आदेश को जिला जज कोर्ट में चुनौती दी गई है। युवक को थाने में प्रताड़ित करने और 10 हजार रुपये रिश्वत मांगने के आरोप से जुड़े इस मामले में जिला जज कोर्ट ने 12 अगस्त को सुनवाई तय की है।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह के माध्यम से जिला शासकीय अधिवक्ता ने फौजदारी निगरानी याचिका दाखिल की है। सीजेएम नवनीत सिंह की अदालत ने 19 जून को संगीता देवी की अर्जी पर सिपाही अरुण कुमार और तीन अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। संगीता ने आरोप लगाया था कि 20 मार्च को उनके पति अमर बहादुर को सिपाही और उसके साथी घर से उठाकर थाने ले गए। उनके साथ मारपीट की गई और 10 हजार रुपये रिश्वत मांगी गई। रुपये देने के बाद ही उन्हें छोड़ा गया।
संगीता के मुताबिक, अमर बहादुर को चोटें आई थीं, जिसका मेडिकल और एक्सरे कराया गया। उन्होंने पुलिस पर चोटों के संबंध में मनमाफिक लिखापढ़ी कराने का भी आरोप लगाया था। सीजेएम ने पुलिस अधिकारियों से मामले में रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन रिपोर्ट अदालत में पेश नहीं की गई। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। अब इसी आदेश के खिलाफ जिला जज कोर्ट में निगरानी याचिका दाखिल होने से मामला नया मोड़ ले चुका है।
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पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह के माध्यम से जिला शासकीय अधिवक्ता ने फौजदारी निगरानी याचिका दाखिल की है। सीजेएम नवनीत सिंह की अदालत ने 19 जून को संगीता देवी की अर्जी पर सिपाही अरुण कुमार और तीन अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। संगीता ने आरोप लगाया था कि 20 मार्च को उनके पति अमर बहादुर को सिपाही और उसके साथी घर से उठाकर थाने ले गए। उनके साथ मारपीट की गई और 10 हजार रुपये रिश्वत मांगी गई। रुपये देने के बाद ही उन्हें छोड़ा गया।
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संगीता के मुताबिक, अमर बहादुर को चोटें आई थीं, जिसका मेडिकल और एक्सरे कराया गया। उन्होंने पुलिस पर चोटों के संबंध में मनमाफिक लिखापढ़ी कराने का भी आरोप लगाया था। सीजेएम ने पुलिस अधिकारियों से मामले में रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन रिपोर्ट अदालत में पेश नहीं की गई। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। अब इसी आदेश के खिलाफ जिला जज कोर्ट में निगरानी याचिका दाखिल होने से मामला नया मोड़ ले चुका है।
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