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Sultanpur News: मैदान बचे होते तो चमकते खेल के सितारे
Thu, 23 Jul 2026 12:02 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Thu, 23 Jul 2026 12:02 AM IST
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एमजीएस के खेल मैदान में अभ्यास करतीं बालिका खिलाड़ी। संवाद
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सुल्तानपुर। जिस स्कूल के मैदान पर कभी बच्चों की दौड़ और खेल की आवाज गूंजती थी, वहां अब इमारतें, खाली पड़े परिसर या सन्नाटा है। जिले की खेल प्रतिभाएं पनपने से पहले ही दम तोड़ रही हैं। गिने-चुने स्कूलों ने अपने मैदान बचाए, वहीं से विजय नारायण सेन और वैष्णवी जैसे राष्ट्रीय खिलाड़ी निकले। यदि सभी माध्यमिक विद्यालयों में खेल मैदान और नियमित अभ्यास की व्यवस्था होती तो हर वर्ष सैकड़ों खिलाड़ी प्रदेश और देश के लिए तैयार हो सकते थे। इतना ही नहीं ओलंपिक विजेता बन सकते थे।
जिले के 29 राजकीय और 58 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई के साथ खेलों को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा माना गया है, लेकिन कई स्कूलों में पर्याप्त खेल मैदान नहीं हैं। जिन विद्यालयों ने मैदान बचाए वहां से खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं। महात्मा गांधी स्मारक इंटर कॉलेज इसका उदाहरण है। छात्र विजय नारायण सेन ने वर्ष 2019 में कक्षा छह में प्रवेश लेने के बाद पढ़ाई के साथ हैंडबॉल का नियमित अभ्यास किया। हाल ही में तेलंगाना में हुए राष्ट्रीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदेश को तीसरा स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसी विद्यालय की छात्रा वैष्णवी ने रांची में आयोजित राष्ट्रीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व किया। प्रतियोगिता में 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों की टीमें शामिल हुई थीं। रामरती इंटर कॉलेज, द्वारिकागंज के छात्र शनी और कपिल क्रिकेट में मंडल और प्रदेश स्तर तक अपनी पहचान बना चुके हैं।
खेल विशेषज्ञ आशुतोष गुप्ता का कहना है कि जहां मैदान हैं, वहां प्रतिभाएं भी हैं। समस्या उन स्कूलों की है, जहां मैदान या तो खत्म हो गए हैं या उन पर अन्य निर्माण हो चुके हैं।
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मैदान नहीं होंगे तो मोबाइल ही बनेगा साथी
पूर्व राष्ट्रीय वॉलीबॉल खिलाड़ी राम शिरोमणि वर्मा कहते हैं कि पहले गांवों और स्कूलों में खुले मैदान होते थे, जहां बच्चे घंटों खेलते थे। मैदान सिकुड़ गए हैं। नतीजा यह है कि बच्चे खेल की बजाय मोबाइल में समय बिता रहे हैं। जिससे न सिर्फ खेल प्रतिभाएं खत्म हो रही हैं बल्कि कम उम्र में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
जिला क्रीड़ाधिकारी राजेश कुमार सोनकर कहते हैं कि खेल बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए जरूरी है। एक घंटे का खेल पढ़ाई की क्षमता भी बढ़ाता है। जिन स्कूलों में मैदान नहीं हैं, वहां की ग्रामीण प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
गणित बता रहा बड़ा नुकसान
जिले में 29 राजकीय और 58 सहायता प्राप्त, यानी कुल 87 माध्यमिक विद्यालय हैं। यदि प्रत्येक विद्यालय से हर वर्ष केवल दो खिलाड़ी भी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचते, तो 174 खिलाड़ी हर साल जिले का नाम रोशन करते। दस वर्षों में यह संख्या 1,740 तक पहुंच सकती थी।
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जिले के 29 राजकीय और 58 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई के साथ खेलों को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा माना गया है, लेकिन कई स्कूलों में पर्याप्त खेल मैदान नहीं हैं। जिन विद्यालयों ने मैदान बचाए वहां से खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं। महात्मा गांधी स्मारक इंटर कॉलेज इसका उदाहरण है। छात्र विजय नारायण सेन ने वर्ष 2019 में कक्षा छह में प्रवेश लेने के बाद पढ़ाई के साथ हैंडबॉल का नियमित अभ्यास किया। हाल ही में तेलंगाना में हुए राष्ट्रीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदेश को तीसरा स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसी विद्यालय की छात्रा वैष्णवी ने रांची में आयोजित राष्ट्रीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व किया। प्रतियोगिता में 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों की टीमें शामिल हुई थीं। रामरती इंटर कॉलेज, द्वारिकागंज के छात्र शनी और कपिल क्रिकेट में मंडल और प्रदेश स्तर तक अपनी पहचान बना चुके हैं।
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खेल विशेषज्ञ आशुतोष गुप्ता का कहना है कि जहां मैदान हैं, वहां प्रतिभाएं भी हैं। समस्या उन स्कूलों की है, जहां मैदान या तो खत्म हो गए हैं या उन पर अन्य निर्माण हो चुके हैं।
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मैदान नहीं होंगे तो मोबाइल ही बनेगा साथी
पूर्व राष्ट्रीय वॉलीबॉल खिलाड़ी राम शिरोमणि वर्मा कहते हैं कि पहले गांवों और स्कूलों में खुले मैदान होते थे, जहां बच्चे घंटों खेलते थे। मैदान सिकुड़ गए हैं। नतीजा यह है कि बच्चे खेल की बजाय मोबाइल में समय बिता रहे हैं। जिससे न सिर्फ खेल प्रतिभाएं खत्म हो रही हैं बल्कि कम उम्र में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
जिला क्रीड़ाधिकारी राजेश कुमार सोनकर कहते हैं कि खेल बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए जरूरी है। एक घंटे का खेल पढ़ाई की क्षमता भी बढ़ाता है। जिन स्कूलों में मैदान नहीं हैं, वहां की ग्रामीण प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
गणित बता रहा बड़ा नुकसान
जिले में 29 राजकीय और 58 सहायता प्राप्त, यानी कुल 87 माध्यमिक विद्यालय हैं। यदि प्रत्येक विद्यालय से हर वर्ष केवल दो खिलाड़ी भी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचते, तो 174 खिलाड़ी हर साल जिले का नाम रोशन करते। दस वर्षों में यह संख्या 1,740 तक पहुंच सकती थी।