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Sultanpur News: ठंड में फेफड़े और अस्थमा के मरीजों की बढ़ी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Sat, 03 Jan 2026 12:06 AM IST
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मेडिकल काॅलेज में काउंटर पर दवा लेते मरीज। संवाद
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सुल्तानपुर। सर्द हवाओं, धुंध और बढ़ते प्रदूषण के साथ वायरल संक्रमण ने लोगों के स्वास्थ्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। विशेष रूप से फेफड़े, अस्थमा और एलर्जी से पीड़ित मरीजों के लिए यह मौसम मुसीबत भरा साबित हो रहा है। सांस फूलना, लगातार खांसी, सीने में जकड़न और घरघराहट जैसी शिकायतों के साथ बड़ी संख्या में मरीज अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के चेस्ट (श्वसन रोग) और फिजिशियन (चिकित्सक) की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 200 से 250 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। यह आंकड़ा मौसमी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप को दर्शाता है। मौसम में आए बदलाव के साथ ही गले में खराश, जुकाम, वायरल बुखार और सिरदर्द जैसी सामान्य लगने वाली बीमारियों के मरीजों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है।
बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष खतरा
ठंड के मौसम में बच्चों में निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है, जो उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। वहीं, बुजुर्गों में सांस संबंधी समस्याएं अधिक गंभीर रूप ले लेती हैं, जिससे उनकी दिनचर्या प्रभावित होती है। मेडिकल कॉलेज के पुरुष और महिला अस्पतालों की ओपीडी में सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जो स्थिति की गंभीरता को बयां करती हैं।
विशेषज्ञों की सलाह और बचाव के उपाय
मेडिकल कॉलेज के चेस्ट फिजिशियन डॉ. आर धीरेंद्र के अनुसार, समय समय पर जांच और उचित उपचार से अस्थमा अटैक और गंभीर ब्रोंकाइटिस जैसी जानलेवा स्थितियों को रोका जा सकता है। नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार और चिकित्सकों की सलाह का पालन करके सर्दियों में भी इन रोगों को नियंत्रित रखा जा सकता है। उन्होंने ने गले और फेफड़ों को राहत देने के लिए गुनगुने पानी, सूप और हर्बल काढ़े के सेवन की सलाह दी है।
सर्दियों में बरतने योग्य सावधानियां
सुबह और शाम को बाहर निकलते समय नाक और मुंह को स्कार्फ या मास्क से ढकें, ताकि ठंडी हवा सीधे श्वसन तंत्र में न जाए।
अस्थमा के मरीज अपने इन्हेलर और निर्धारित दवाओं का नियमित रूप से सेवन करें। किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है।
घर और कमरे को धूल और फफूंद से मुक्त रखें। यह श्वसन संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद करेगा।
गुनगुना पानी, सूप और हर्बल काढ़े का सेवन गले और फेफड़ों को आराम पहुंचाता है।
धूम्रपान फेफड़ों के लिए अत्यंत हानिकारक है। इससे पूरी तरह दूरी बनाना आवश्यक है।
बुजुर्गों को हल्का योग और श्वसन अभ्यास करना चाहिए, जिससे उनकी श्वसन क्षमता बेहतर बनी रहे।
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मेडिकल कॉलेज के चेस्ट (श्वसन रोग) और फिजिशियन (चिकित्सक) की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 200 से 250 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। यह आंकड़ा मौसमी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप को दर्शाता है। मौसम में आए बदलाव के साथ ही गले में खराश, जुकाम, वायरल बुखार और सिरदर्द जैसी सामान्य लगने वाली बीमारियों के मरीजों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है।
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बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष खतरा
ठंड के मौसम में बच्चों में निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है, जो उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। वहीं, बुजुर्गों में सांस संबंधी समस्याएं अधिक गंभीर रूप ले लेती हैं, जिससे उनकी दिनचर्या प्रभावित होती है। मेडिकल कॉलेज के पुरुष और महिला अस्पतालों की ओपीडी में सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जो स्थिति की गंभीरता को बयां करती हैं।
विशेषज्ञों की सलाह और बचाव के उपाय
मेडिकल कॉलेज के चेस्ट फिजिशियन डॉ. आर धीरेंद्र के अनुसार, समय समय पर जांच और उचित उपचार से अस्थमा अटैक और गंभीर ब्रोंकाइटिस जैसी जानलेवा स्थितियों को रोका जा सकता है। नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार और चिकित्सकों की सलाह का पालन करके सर्दियों में भी इन रोगों को नियंत्रित रखा जा सकता है। उन्होंने ने गले और फेफड़ों को राहत देने के लिए गुनगुने पानी, सूप और हर्बल काढ़े के सेवन की सलाह दी है।
सर्दियों में बरतने योग्य सावधानियां
सुबह और शाम को बाहर निकलते समय नाक और मुंह को स्कार्फ या मास्क से ढकें, ताकि ठंडी हवा सीधे श्वसन तंत्र में न जाए।
अस्थमा के मरीज अपने इन्हेलर और निर्धारित दवाओं का नियमित रूप से सेवन करें। किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है।
घर और कमरे को धूल और फफूंद से मुक्त रखें। यह श्वसन संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद करेगा।
गुनगुना पानी, सूप और हर्बल काढ़े का सेवन गले और फेफड़ों को आराम पहुंचाता है।
धूम्रपान फेफड़ों के लिए अत्यंत हानिकारक है। इससे पूरी तरह दूरी बनाना आवश्यक है।
बुजुर्गों को हल्का योग और श्वसन अभ्यास करना चाहिए, जिससे उनकी श्वसन क्षमता बेहतर बनी रहे।
