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शिक्षकों पर है समाज को नई दिशा देने की जिम्मेदारी : कुलपति
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Fri, 30 Jan 2026 11:45 PM IST
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राणा प्रताप पीजी कॉलेज में सम्मेलन को संबोधित करते वक्ता। स्रोत- महाविद्यालय
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सुल्तानपुर। राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के विवेकानंद सभागार में शुक्रवार को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा समिति की ओर से दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि भाषा हमको जोड़ती है। भाषा शिक्षकों पर समाज को नई दिशा में ले जाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जो आजकल नहीं दिखाई पड़ती है।
मुख्य वक्ता भारतीय भाषा समिति के महासचिव व काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भाषा विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. अभिनव मिश्र ने कहा कि भारत में भाषाओं को कभी भी विशिष्ट पहचान के प्रतीक के रूप में नहीं देखा जाता था। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए क्षत्रिय शिक्षा समिति के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि भाषाई बहुलता ने भारत में बौद्धिक आदान-प्रदान और सामाजिक सामंजस्य को मजबूत किया।
कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. इंद्रमणि कुमार ने किया। स्वागत प्राचार्य प्रोफेसर दिनेश कुमार त्रिपाठी व आभार ज्ञापन प्रबंधक एडवोकेट बालचंद्र सिंह ने किया। सम्मेलन में द्वितीय सत्र के मुख्य वक्ता रामजस काॅलेज दिल्ली में प्रो. उमाशंकर पांडेय ने कहा कि भारतीय भाषाओं की एकता में विविधता है। कार्यक्रम को मुंबई विश्वविद्यालय के अध्यक्ष व पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रामजी तिवारी ने कहा कि भारत के लोग भाषा को केवल संवाद का साधन ही नहीं मानते, यहां भाषा के प्रति आदर भाव बहुत व्यापक है। विशिष्ट अतिथि केएनआईटी निदेशक प्रो. आरके उपाध्याय ने बताया कि विद्यार्थियों को उसकी भाषा में हर तरह का ज्ञान मिले, यह आज की जरूरत है। कार्यक्रम का संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रभात कुमार श्रीवास्तव ने किया।
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सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि भाषा हमको जोड़ती है। भाषा शिक्षकों पर समाज को नई दिशा में ले जाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जो आजकल नहीं दिखाई पड़ती है।
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मुख्य वक्ता भारतीय भाषा समिति के महासचिव व काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भाषा विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. अभिनव मिश्र ने कहा कि भारत में भाषाओं को कभी भी विशिष्ट पहचान के प्रतीक के रूप में नहीं देखा जाता था। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए क्षत्रिय शिक्षा समिति के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि भाषाई बहुलता ने भारत में बौद्धिक आदान-प्रदान और सामाजिक सामंजस्य को मजबूत किया।
कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. इंद्रमणि कुमार ने किया। स्वागत प्राचार्य प्रोफेसर दिनेश कुमार त्रिपाठी व आभार ज्ञापन प्रबंधक एडवोकेट बालचंद्र सिंह ने किया। सम्मेलन में द्वितीय सत्र के मुख्य वक्ता रामजस काॅलेज दिल्ली में प्रो. उमाशंकर पांडेय ने कहा कि भारतीय भाषाओं की एकता में विविधता है। कार्यक्रम को मुंबई विश्वविद्यालय के अध्यक्ष व पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रामजी तिवारी ने कहा कि भारत के लोग भाषा को केवल संवाद का साधन ही नहीं मानते, यहां भाषा के प्रति आदर भाव बहुत व्यापक है। विशिष्ट अतिथि केएनआईटी निदेशक प्रो. आरके उपाध्याय ने बताया कि विद्यार्थियों को उसकी भाषा में हर तरह का ज्ञान मिले, यह आज की जरूरत है। कार्यक्रम का संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रभात कुमार श्रीवास्तव ने किया।
