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Unnao News: खुशबू से लुभाने वाले बासमती देहरादून धान का घटा रकबा
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फोटो-27-पुरवा क्षेत्र के फतेहगंज में धान रोपाई करती महिलाएं। संवाद
-कम बारिश व घटते रेट से किसानों का होने लगा मोहभंग, तिल्ली, उड़द पर ध्यान
-इस साल कम हुआ 1800 हेक्टेयर रकबा, किसान बोले नहीं निकल पाती है लागत
नवीन द्विवेदी
पुरवा। विदेशियों को अपनी खुशबू व स्वाद से लुभाने वाले बासमती देहरादून धान से किसानों का मोहभंग हो चला है। एक तरफ कम बारिश और दूसरी ओर घटती कीमत के कारण किसानों ने बुआई कम कर दी है। इसी कारण इस साल देहरादून वैराइटी के धान की बुआई का रकबा 1800 हेक्टेयर कम हो गया है।
पुरवा क्षेत्र में बासमती देहरादून प्रजाति के धान की रोपाई बड़े क्षेत्रफल में होती रही है। क्षेत्र के निद्धाखेड़ा, तारनखेड़ा, बचरौली, रामापुर, अमरापुर, भीखमपुर, बकुलीखेड़ा, चमियानी, टीकरखुर्द, रम्माखेड़ा, त्रिपुरारपुर, बेबलमंशाखेड़ा, महरामऊ, किशुनखेड़ा, लखमदेमऊ, हीराखेड़ा, मिर्रीखेड़ा, सैदपुर निहालखेड़ा,भीषमपुर व भदनांग गांवों में बासमती देहरादून धान की खेती होती रही है। यह धान अन्य प्रजातियों की अपेक्षा काफी महंगा बिकता है। इसका चावल काफी लंबा होता है। चावल बनने पर इसकी खुशबू काफी दूर तक फैलती है। स्वाद भी खाने में काफी अलग होता है।
सऊदी अरब, इराक, ईरान, दुबई, अमीरात, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, जापान, कोरिया, कनाडा, नाइजीरिया में इस बासमती चावल की काफी मांग होती है। वहां के लोग महक व स्वाद के कारण इस चावल को खूब पसंद करते हैं। हालांकि इस साल अभी तक हुई बारिश इस धान की बुआई के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुई है। इसी कारण काफी किसानों ने धान नहीं बोया है। इससे करीब 1800 हेक्टेयर रकबा कम हुआ है।
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इंसेट-1
पिछले सात साल का रकबा, पैदावार व रेट
वर्ष हेक्टेअर में पैदावार एमटी में कीमत प्रति क्विंटल
2019-20 14255 22 हजार 3100
2020-21 15180 23 हजार 3500
2021-22 16334 24 हजार 4500
2022-23 16735 28 हजार 4200
2023-24 16801 29 हजार 4400
2024-25 16830 30 हजार 3500
2025-26 16920 31 हजार 3100
इस बार 15120 30 हजार प्रस्तावित अभी खुला नहीं
वर्जन
कम बारिश होने के कारण किसानों ने बासमती देहरादून धान का रकबा कम किया है। इसी कारण 1800 हेक्टेअर रकबा कम हुआ है। इसकी जगह कम बारिश वाली फसलों में तिल्ली, उड़द का रकबा बढ़ाया है। -महेंद्र यादव, प्रभारी राजकीय कृषि बीज भंडार
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-कम बारिश व घटते रेट से किसानों का होने लगा मोहभंग, तिल्ली, उड़द पर ध्यान
-इस साल कम हुआ 1800 हेक्टेयर रकबा, किसान बोले नहीं निकल पाती है लागत
नवीन द्विवेदी
पुरवा। विदेशियों को अपनी खुशबू व स्वाद से लुभाने वाले बासमती देहरादून धान से किसानों का मोहभंग हो चला है। एक तरफ कम बारिश और दूसरी ओर घटती कीमत के कारण किसानों ने बुआई कम कर दी है। इसी कारण इस साल देहरादून वैराइटी के धान की बुआई का रकबा 1800 हेक्टेयर कम हो गया है।
पुरवा क्षेत्र में बासमती देहरादून प्रजाति के धान की रोपाई बड़े क्षेत्रफल में होती रही है। क्षेत्र के निद्धाखेड़ा, तारनखेड़ा, बचरौली, रामापुर, अमरापुर, भीखमपुर, बकुलीखेड़ा, चमियानी, टीकरखुर्द, रम्माखेड़ा, त्रिपुरारपुर, बेबलमंशाखेड़ा, महरामऊ, किशुनखेड़ा, लखमदेमऊ, हीराखेड़ा, मिर्रीखेड़ा, सैदपुर निहालखेड़ा,भीषमपुर व भदनांग गांवों में बासमती देहरादून धान की खेती होती रही है। यह धान अन्य प्रजातियों की अपेक्षा काफी महंगा बिकता है। इसका चावल काफी लंबा होता है। चावल बनने पर इसकी खुशबू काफी दूर तक फैलती है। स्वाद भी खाने में काफी अलग होता है।
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सऊदी अरब, इराक, ईरान, दुबई, अमीरात, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, जापान, कोरिया, कनाडा, नाइजीरिया में इस बासमती चावल की काफी मांग होती है। वहां के लोग महक व स्वाद के कारण इस चावल को खूब पसंद करते हैं। हालांकि इस साल अभी तक हुई बारिश इस धान की बुआई के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुई है। इसी कारण काफी किसानों ने धान नहीं बोया है। इससे करीब 1800 हेक्टेयर रकबा कम हुआ है।
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पिछले सात साल का रकबा, पैदावार व रेट
वर्ष हेक्टेअर में पैदावार एमटी में कीमत प्रति क्विंटल
2019-20 14255 22 हजार 3100
2020-21 15180 23 हजार 3500
2021-22 16334 24 हजार 4500
2022-23 16735 28 हजार 4200
2023-24 16801 29 हजार 4400
2024-25 16830 30 हजार 3500
2025-26 16920 31 हजार 3100
इस बार 15120 30 हजार प्रस्तावित अभी खुला नहीं
वर्जन
कम बारिश होने के कारण किसानों ने बासमती देहरादून धान का रकबा कम किया है। इसी कारण 1800 हेक्टेअर रकबा कम हुआ है। इसकी जगह कम बारिश वाली फसलों में तिल्ली, उड़द का रकबा बढ़ाया है। -महेंद्र यादव, प्रभारी राजकीय कृषि बीज भंडार