{"_id":"6a188c04e420abbe87036624","slug":"both-the-accused-linked-to-ulfa-worked-in-a-factory-in-the-dahi-area-unnao-news-c-12-knp1014-1539508-2026-05-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Unnao News: उल्फा से जुड़े दोनों आरोपी दही क्षेत्र की फैक्टरी में करते थे काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Unnao News: उल्फा से जुड़े दोनों आरोपी दही क्षेत्र की फैक्टरी में करते थे काम
विज्ञापन
फोटो-26- शहर के बुधवारी मोहल्ले के बिना प्लाटर की दीवार से सटे कमरे में किराए पर रहते थे दोनों
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उन्नाव। असम के उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा-आई) से जुड़े दोनों आरोपी दही स्थित एक फैक्टरी में काम करते थे। बुधवारी मोहल्ले से असम पुलिस ने दोनों को बुधवार को गिरफ्तार किया था। लोगों में चर्चा रही कि दोनों को रोज देखा जाता था लेकिन यह नहीं पता था कि यह किसी साजिश के तहत यहां रह रहे हैं।
सहारनपुर जिले के थाना कुतुबशेर क्षेत्र स्थित हबीबगढ़ अलाटा कॉलोनी निवासी नूर मोहम्मद और कानपुर के मूलगंज थानाक्षेत्र के नया चौक निवासी मोहम्मद सुभान अहमद पिछले आठ महीने से शादाब के घर में किराये पर रह रहे थे। दोनों दहीक्षेत्र स्थित फैक्टरी में काम करते थे ताकि लोगों को इन पर शक न हो। दो दिन पहले उन्नाव आई असम पुलिस के अनुसार दोनों पर प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन उल्फा-आई के लिए फंडिंग करने का आरोप है। मामले में तिनसुकिया जिले की सदर कोतवाली में वर्ष 2026 में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत प्राथमिकी भी दर्ज है। एसओजी की मदद से दोनों की गिरफ्तारी के बाद लोगों में यह चर्चा का विषय बन गया है। वहीं लगातार आतंकी संगठन से जुड़े लोग उन्नाव में ही पकड़े जा रहे हैं। इस पर फैक्ट्रियों में काम करने वालों की सही जांच न होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
--
दो बड़े शहरों के बीच उन्नाव सुरक्षित ठिकाना
प्रदेश की राजधानी लखनऊ और महानगर कानपुर के बीच स्थित उन्नाव में छिपने के लिए कई सुरक्षित ठिकाने हैं। उन्नाव शहर विदेशियों और आतंकियों पनाहगाह के रूप में पहले भी सामने आ चुका है। हालांकि शहर व आसपास क्षेत्रों में किरायेदारों और फैक्टरी श्रमिकों का सत्यापन कराने के लिए पुलिस ने कई बार योजना बनाई लेकिन वह जमीनी हकीकत नहीं बन पाई। इसी का नतीजा है कि अपराधी दूसरे जिलों और प्रांतों में वारदात को अंजाम देने के बाद यहां ठिकाना बनाकर रहते हैं। यहां भी वारदातों को अंजाम देने के बाद आसानी से निकल जाते हैं।
विज्ञापन
पहले भी पकड़े गए घुसपैठिए
उन्नाव। जिले में आतंकी संगठन से जुड़े लोगों के मिलने का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी कई बांग्लादेशी इसी शहर से गिरफ्तार किए गए। बीघापुर क्षेत्र में बांग्लादेशियों ने पकड़े जाने के बाद जमानत के लिए फर्जी अभिलेख तक लगाए हैं। इससे उनकी जमानत भी खारिज हुई है। रायबरेली जिले के थाना लालगंज के नवरंग का पुरवा निवासी मानू सोनी ने बीघापुर कोतवाली में 21 फरवरी 2025 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने सऊदी अरब की मुद्रा (रियाल) का लालच देकर महिला व दो युवकों पर 1.55 लाख की ठगी की प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच में पुलिस ने मथुरा जिले के थाना लोहवन के रघुवीर बिहार कॉलोनी जमुना निवासी अब्दुल हुसैन, पश्चिम बंगाल के जिला उत्तर के थाना जीवनतला के काली कतला गांव निवासी मासूम मुल्ला, मथुरा के कोदवन गांव निवासी मिंटू, उसकी पत्नी हमीदा और मथुरा के रघुवीर बिहार कॉलोनी निवासी अफरोजा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मिंटू, उसकी पत्नी हमीदा बांग्लादेश के नागरिक हैं। सभी जेल में हैं। (संवाद)
-जुलाई 2023 में यूपी एटीएस ने बिहार प्रांत के स्लॉटर हाउस से रिजवान खान नाम के आतंकी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में पता चला था कि वह वर्ष 2023 के फरवरी और मार्च महीने में दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक स्लॉटर हाउस में काम कर चुका था। फैक्टरी ने जिस सिक्योरिटी एजेंसी से 20 सुरक्षा कर्मी लिए थे उनमें रिजवान भी था। दो महीने बाद कंपनी ने उसे बिहार प्रांत भेज दिया था।
-मार्च 2021 में एटीएस ने मोहल्ला अनवार नगर में रहकर मानव तस्करी में लिप्त रोहिंग्या शाहिद को गिरफ्तार किया था। उसने अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता, एटीएम और पासपोर्ट बनवा लिया था। उसने 2010 में अलीगढ़ से अपना वोटर आईडी कार्ड भी बनवा लिया था।
-मार्च 2017 में भोपाल में ट्रेन में हुए विस्फोट के बाद एटीएस ने लखनऊ के ठाकुरगंज में आतंकी सैफुल्ला को एनकाउंटर में मार गिराया था। एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) के हत्थे चढ़े कानपुर के गौस मोहम्मद और फैसल को लेकर एनआईए एसपी दीपक कुमार 28 मार्च 2017 को शहर आए थे। जांच में पता चला कि आतंकी सैफुल्ला और उसके साथी शहर की दरगाहों में जायरीन बनकर कई-कई दिन रुकते थे।
-फरवरी 2018 में दही चौकी स्थित एक स्लॉटर हाउस में काम कर रहे रोहिंग्या मुसलमानों को एटीएस ने पकड़ा था।
-मार्च 2017 को लखनऊ में एटीएस के एनकाउंटर में मारा गया आतंकी सैफुल्ला साथियों के साथ स्टेशन रोड व किला स्थित मस्जिद में जायरीन के रूप में महीनों रुका था।
-2008 में जौनपुर में विस्फोट की घटना में शामिल नूर आलम ने दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र में एक बंद फैक्टरी के पीछे विस्फोटक छिपाकर रखा था। उन्नाव स्पेशल कोर्ट ने नूर आलम उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
-फरवरी 2012 को दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने सात महीने से बांगरमऊ के मदारनगर स्थित एक मदरसे में मौलवी बनकर रह रहे बशीर हसन नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया था।
विज्ञापन
सहारनपुर जिले के थाना कुतुबशेर क्षेत्र स्थित हबीबगढ़ अलाटा कॉलोनी निवासी नूर मोहम्मद और कानपुर के मूलगंज थानाक्षेत्र के नया चौक निवासी मोहम्मद सुभान अहमद पिछले आठ महीने से शादाब के घर में किराये पर रह रहे थे। दोनों दहीक्षेत्र स्थित फैक्टरी में काम करते थे ताकि लोगों को इन पर शक न हो। दो दिन पहले उन्नाव आई असम पुलिस के अनुसार दोनों पर प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन उल्फा-आई के लिए फंडिंग करने का आरोप है। मामले में तिनसुकिया जिले की सदर कोतवाली में वर्ष 2026 में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत प्राथमिकी भी दर्ज है। एसओजी की मदद से दोनों की गिरफ्तारी के बाद लोगों में यह चर्चा का विषय बन गया है। वहीं लगातार आतंकी संगठन से जुड़े लोग उन्नाव में ही पकड़े जा रहे हैं। इस पर फैक्ट्रियों में काम करने वालों की सही जांच न होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विज्ञापन
दो बड़े शहरों के बीच उन्नाव सुरक्षित ठिकाना
प्रदेश की राजधानी लखनऊ और महानगर कानपुर के बीच स्थित उन्नाव में छिपने के लिए कई सुरक्षित ठिकाने हैं। उन्नाव शहर विदेशियों और आतंकियों पनाहगाह के रूप में पहले भी सामने आ चुका है। हालांकि शहर व आसपास क्षेत्रों में किरायेदारों और फैक्टरी श्रमिकों का सत्यापन कराने के लिए पुलिस ने कई बार योजना बनाई लेकिन वह जमीनी हकीकत नहीं बन पाई। इसी का नतीजा है कि अपराधी दूसरे जिलों और प्रांतों में वारदात को अंजाम देने के बाद यहां ठिकाना बनाकर रहते हैं। यहां भी वारदातों को अंजाम देने के बाद आसानी से निकल जाते हैं।
विज्ञापन
पहले भी पकड़े गए घुसपैठिए
उन्नाव। जिले में आतंकी संगठन से जुड़े लोगों के मिलने का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी कई बांग्लादेशी इसी शहर से गिरफ्तार किए गए। बीघापुर क्षेत्र में बांग्लादेशियों ने पकड़े जाने के बाद जमानत के लिए फर्जी अभिलेख तक लगाए हैं। इससे उनकी जमानत भी खारिज हुई है। रायबरेली जिले के थाना लालगंज के नवरंग का पुरवा निवासी मानू सोनी ने बीघापुर कोतवाली में 21 फरवरी 2025 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने सऊदी अरब की मुद्रा (रियाल) का लालच देकर महिला व दो युवकों पर 1.55 लाख की ठगी की प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच में पुलिस ने मथुरा जिले के थाना लोहवन के रघुवीर बिहार कॉलोनी जमुना निवासी अब्दुल हुसैन, पश्चिम बंगाल के जिला उत्तर के थाना जीवनतला के काली कतला गांव निवासी मासूम मुल्ला, मथुरा के कोदवन गांव निवासी मिंटू, उसकी पत्नी हमीदा और मथुरा के रघुवीर बिहार कॉलोनी निवासी अफरोजा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मिंटू, उसकी पत्नी हमीदा बांग्लादेश के नागरिक हैं। सभी जेल में हैं। (संवाद)
-जुलाई 2023 में यूपी एटीएस ने बिहार प्रांत के स्लॉटर हाउस से रिजवान खान नाम के आतंकी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में पता चला था कि वह वर्ष 2023 के फरवरी और मार्च महीने में दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक स्लॉटर हाउस में काम कर चुका था। फैक्टरी ने जिस सिक्योरिटी एजेंसी से 20 सुरक्षा कर्मी लिए थे उनमें रिजवान भी था। दो महीने बाद कंपनी ने उसे बिहार प्रांत भेज दिया था।
-मार्च 2021 में एटीएस ने मोहल्ला अनवार नगर में रहकर मानव तस्करी में लिप्त रोहिंग्या शाहिद को गिरफ्तार किया था। उसने अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता, एटीएम और पासपोर्ट बनवा लिया था। उसने 2010 में अलीगढ़ से अपना वोटर आईडी कार्ड भी बनवा लिया था।
-मार्च 2017 में भोपाल में ट्रेन में हुए विस्फोट के बाद एटीएस ने लखनऊ के ठाकुरगंज में आतंकी सैफुल्ला को एनकाउंटर में मार गिराया था। एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) के हत्थे चढ़े कानपुर के गौस मोहम्मद और फैसल को लेकर एनआईए एसपी दीपक कुमार 28 मार्च 2017 को शहर आए थे। जांच में पता चला कि आतंकी सैफुल्ला और उसके साथी शहर की दरगाहों में जायरीन बनकर कई-कई दिन रुकते थे।
-फरवरी 2018 में दही चौकी स्थित एक स्लॉटर हाउस में काम कर रहे रोहिंग्या मुसलमानों को एटीएस ने पकड़ा था।
-मार्च 2017 को लखनऊ में एटीएस के एनकाउंटर में मारा गया आतंकी सैफुल्ला साथियों के साथ स्टेशन रोड व किला स्थित मस्जिद में जायरीन के रूप में महीनों रुका था।
-2008 में जौनपुर में विस्फोट की घटना में शामिल नूर आलम ने दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र में एक बंद फैक्टरी के पीछे विस्फोटक छिपाकर रखा था। उन्नाव स्पेशल कोर्ट ने नूर आलम उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
-फरवरी 2012 को दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने सात महीने से बांगरमऊ के मदारनगर स्थित एक मदरसे में मौलवी बनकर रह रहे बशीर हसन नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया था।