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Unnao News: तीन बड़े गड्ढों में दफना दिया गया मजार का मलबा

Thu, 11 Jun 2026 10:49 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jun 2026 10:49 PM IST
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The debris from the shrine was buried in three large pits.
-सफारी रोड के निकट फिशर वन क्षेत्र 0.0281 हेक्टेयर में बनी मजार का मामला
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-वन कोर्ट ने 16 अप्रैल को स्वामित्व के साक्ष्य न देने पर मजार को हटाने के दिए थे निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। वन विभाग ने जिला प्रशासन व फजहे इलाही के सहयोग से सफारी रोड के पास फिशर वन क्षेत्र के 0.0281 हेक्टेयर में बनी सैयद बाबा मजार को तीन दिन कार्रवाई के बाद जमींजोद कर दिया। साथ ही मजार के मलबे को तीन बड़े गड्ढे खोदकर उसमें दफना दिया गया। साथ ही वन विभाग ने यहां फलदार व छायादार पौधे लगा दिए हैं। इस कार्रवाई के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मजार के पास प्रशासनिक व पुलिस बल तैनात रहा।

इस मामले में सोमवार को जिला प्रशासन ने वन विभाग के अफसरों की मौजूदगी में दरगाह पक्ष को बुलाकर उनका पक्ष सुना। साथ ही कोर्ट के निर्णय के बारे में बताया। इस पर दरगाह पक्ष ने स्वयं ही मजार से कब्जा हटाने का अपना पक्ष रखा। इस पर प्रशासनिक अधिकारियों ने सहमति जता दी। साथ ही वन विभाग को इसमें सहयोग करने को कहा। सोमवार को दरगाह पक्ष ने सैयद बाबा मजार से धार्मिक पुस्तकें, चादरें तथा अन्य धार्मिक सामग्री भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दी थी। इसके बाद दरगाह पक्ष ने मजार से कब्जा हटाना शुरू किया। इसमें जेसीबी मशीन की मदद ली गई। तीन दिन चली कार्रवाई के बाद बुधवार देर शाम तक पूरी मजार को जमींजोद कर दिया गया। साथ ही मजार के मलबे को वहां ही तीन बड़े गड्ढे खोदकर वहां दफना दिया गया। बता दें कि मार्च हुई एक शिकायत पर वन विभाग की टीम ने इस मजार के अस्तित्व की जांच की थी। इस दौरान यह मजार बन क्षेत्र में पाई गई थी। बाद में यह मामला कोर्ट में पहुंचा था। करीब दो माह चली कार्रवाई के बाद दरगाह पक्ष मजार के स्वामित्व को लेकर साक्ष्य नहीं दे सका था। वन कोर्ट ने 16 अप्रैल को दरगाह पक्ष मजार के स्वामित्व को लेकर कोई पर्याप्त साक्ष्य नहीं दे पाने पर मजार के बेदखली के आदेश दिए थे। साथ ही दरगाह पक्ष को अपील करने के लिए एक से अधिक समय दिया गया। इस दौरान दरगाह पक्ष ने कानपुर मंडल की वन कोर्ट में अपील की। यहां 18 मई को उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद दरगाह पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील की, वहां उनकी सुनवाई नहीं हुई।
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