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Unnao News: अफसरों की सुस्ती, गंगा को नहीं मिली गंदगी से मुक्ति

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jan 2026 12:24 AM IST
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फोटो-10-शुक्लागंज में मिश्रा कॉलोनी के पास नदी में जाता गंदा पानी। संवाद
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उन्नाव। गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए वर्ष 2019 में शुरू की गई 3.80 अरब रुपये की परियोजनाएं दिसंबर 2022 की समय सीमा पार कर चुकी हैं लेकिन अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। इसके चलते माघ मेले के दौरान गंगाजल को निर्मल रखने के प्रशासन के प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं। फैक्टरियों और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) को सील कर गंदा पानी रोकने की कोशिशें की गईं लेकिन शहर के आबादी वाले क्षेत्रों से निकलने वाले लगभग 15 लाख लीटर गंदे पानी के शोधन की व्यवस्थाएं अभी भी अधूरी हैं।
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शहर की जलनिकासी और सीवरेज समस्याओं का समाधान कर गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार ने नमामि गंगे परियोजना के तहत शहर और शुक्लागंज (गंगाघाट) नगर पालिका क्षेत्रों के लिए 2019 में 3.80 अरब रुपये की परियोजना को मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत लोनी और सिटी ड्रेन में गिरने वाले नालों पर एसटीपी का निर्माण और गंगा में गिरने वाले नालों को पक्का करके उन्हें एसटीपी से जोड़ने का कार्य शुरू हुआ।
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योजना के पहले चरण में शहर के पीतांबर नगर, शिव नगर जैसे मोहल्लों में भूमिगत पाइपलाइनें बिछाई गईं। शुक्लागंज में एसटीपी का कार्य अंतिम चरण में है और नालों की टेपिंग का काम 70 प्रतिशत पूरा होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि सीवर लाइनों की कनेक्टिविटी और एसटीपी पाइपलाइनों की सफाई और उन्हें जोड़ने का कार्य अभी बाकी है।

योजना में होने थे ये काम

इस योजना में आबादी क्षेत्रों में भूमिगत सीवर पाइप लाइनें बिछाना शामिल है। शुक्लागंज में गंगा में गिर रहे नालों को इंद्रानगर नाले और एसटीपी से जोड़ा जाएगा। सिटी ड्रेन के पानी को साफ करने के लिए डकारी और शुक्लागंज में एक-एक एसटीपी का निर्माण किया जाना है। नालों को मोड़ने के कार्य पर 78 करोड़ रुपये और शहर के नालों को अपग्रेड कर एसटीपी से जोड़ने पर 104 करोड़ रुपये खर्च होंगे। भूमिगत सीवेज लाइनों पर 200 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं। अचलगंज के डकारी, शुक्लागंज के अहमद नगर और शहर के आदर्शनगर में एसटीपी का निर्माण हो चुका है। हालांकि डकारी एसटीपी की पाइपलाइन में सिल्ट जमा होने के कारण वह कार्य नहीं कर पा रहा है। शुक्लागंज एसटीपी का ट्रायल शुरू करने की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।



केवल एक एसटीपी का 80 फीसदी हुआ काम

शहर का गंदा पानी लोनी ड्रेन में गिरता है जिसमें दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र और शहर के सीवर पंप हाउस का पानी भी शामिल है। लगभग 150 किलोमीटर लंबी यह ड्रेन शहर से निकलकर रायबरेली जिले में गंगा में मिलती है। सिटी ड्रेन शहर के जिला कारागार के पास से शुरू होकर विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से गुजरते हुए गंगा में गिरती है। इसके पानी को साफ करने के लिए बनाया गया डकारी गांव का एसटीपी भी बंद है। शुक्लागंज क्षेत्र से पांच नाले सीधे गंगा नदी में गिरते हैं। इन्हें रोकने के लिए शुक्लागंज में तीन एसटीपी बनने हैं। इनमें से केवल एक का 80 फीसदी काम पूरा हुआ है।



वर्जन...

एसटीपी चालू न होने से आबादी क्षेत्र के गंदे पानी का ट्रीटमेंट (शोधन) नहीं हो पा रहा है। यह पानी सीधे गंगा में गिर रहा है। जल्द इन्हें चालू कराने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही दोनों ड्रेन में कुछ किलोमीटर के अंतराल में बंधा (बांध) लगाकर स्नान पर्व से पहले ही पानी को रोका जाएगा। ताकि गंदा पानी गंगा में न जाए। -शशि बिंदकर, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड



डकारी एसटीपी बन चुका है। अगस्त में गंगा में आई बाढ़ से एसटीपी की पाइप लाइन में रेत भर जाने से चोक है। यहां भूमिगत जलस्तर सिर्फ एक मीटर है जबकि 3.2 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन 5.50 मीटर गहराई में है। इससे सफाई में दिक्कत हो रही है। पंपसेट लगाकर पानी निकाल कर पाइप लाइन को साफ कराया जा रहा है। एक महीने में एसटीपी पूरी तरह काम करने लगेगा। -अजीत सिंह, एक्सईएन जलनिगम।

लोनी ड्रेन और सिटी ड्रेन में कुछ किलोमीटर के अंतराल में आबादी क्षेत्र में प्लांट लगाकर बायोरेमेडिएशन का काम चल रहा है। सिटी ड्रेन में शेखपुर, अकरमपुर, आदर्शनगर सहित अन्य स्थानों पर टंकियां रखकर नालों के पानी का बायोरेमेडिएशन कराया जा रहा है। अन्य स्थानों पर भी यही प्रक्रिया अपनाई जा रही है ताकि नालों के पानी को साफ किया जा सके। -एसके गौतम, ईओ नगर पालिका।

फोटो-10-शुक्लागंज में मिश्रा कॉलोनी के पास नदी में जाता गंदा पानी। संवाद

फोटो-10-शुक्लागंज में मिश्रा कॉलोनी के पास नदी में जाता गंदा पानी। संवाद

फोटो-10-शुक्लागंज में मिश्रा कॉलोनी के पास नदी में जाता गंदा पानी। संवाद

फोटो-10-शुक्लागंज में मिश्रा कॉलोनी के पास नदी में जाता गंदा पानी। संवाद

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