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Unnao News: जरदोजी ने सरोजनी की बदली किस्मत, मिला विशिष्ट प्रादेशिक हस्तशिल्प पुरस्कार
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फोटो-1-कैबिनेट मंत्री राकेश सचान से प्रतीकात्मक चेक व प्रमाणपत्र लेतीं सरोजनी देवी। स्रोत: स्वय
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उन्नाव। मियागंज गांव की सरोजनी ने जरदोजी कला में नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों को अपनी मेहनत और लगन से अनुकूल बनाया। मात्र तीन साल में ही सरोजनी ने जरदोजी में अच्छी पहचान बना ली है जिसके लिए विशिष्ट हस्तशिल्प प्रादेशिक पुरस्कार मिला है।
सरोजनी के पति विद्यासागर के पास मात्र दो बीघे कृषि योग्य भूमि है। परिवार में पत्नी सरोजनी और दो बेटे विकास व राज हैं। केवल दो बीघे जमीन पर खेती से परिवार का भरण-पोषण नहीं हो पा रहा था। विद्यासागर को मजदूरी भी करनी पड़ती थी, फिर भी परिवार की जरूरतें पूरी नहीं होती थीं। आर्थिक तंगी के कारण पत्नी और बच्चों के सपने अधूरे थे।
इसी बीच सरोजनी को जरदोजी के काम के बारे में पता चला। उन्होंने जानकारी ली और तीन साल पहले एक समूह से जुड़ीं। काम शुरू करने के लिए पैसे न होने पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) विभाग से 3500 रुपये का ऋण लिया। लखनऊ से साड़ियां लाकर सरोजनी ने कढ़ाई शुरू की। दिन-रात की मेहनत और लगन से उनका काम चल निकला।
खुद का बनाया समूह, प्रतिमाह की हो रही 30 हजार की कमाई
सरोजनी ने बाद में खुद का ‘नवदुर्गा’ नाम से स्वयं सहायता समूह बनाया। समूह से गांव की 10 से अधिक महिलाओं को भी काम दिया। सरोजनी मात्र आठवीं पास हैं लेकिन प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए वह देश के दूसरे प्रांतों में लगने वाले मेलों में जाती हैं। उनके समूह की प्रतिमाह 30 हजार रुपये की कमाई हो रही है।
प्रादेशिक पुरस्कार के लिए सरोजनी ने राधा कृष्ण के साथ गाय की सुंदर कलाकृति तैयार की थी। इसी आधार पर रविवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान ने उनका उत्साहवर्धन किया। मंत्री ने सरोजनी को शॉल, 35 हजार रुपये का प्रतीकात्मक चेक और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।
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सरोजनी के पति विद्यासागर के पास मात्र दो बीघे कृषि योग्य भूमि है। परिवार में पत्नी सरोजनी और दो बेटे विकास व राज हैं। केवल दो बीघे जमीन पर खेती से परिवार का भरण-पोषण नहीं हो पा रहा था। विद्यासागर को मजदूरी भी करनी पड़ती थी, फिर भी परिवार की जरूरतें पूरी नहीं होती थीं। आर्थिक तंगी के कारण पत्नी और बच्चों के सपने अधूरे थे।
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इसी बीच सरोजनी को जरदोजी के काम के बारे में पता चला। उन्होंने जानकारी ली और तीन साल पहले एक समूह से जुड़ीं। काम शुरू करने के लिए पैसे न होने पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) विभाग से 3500 रुपये का ऋण लिया। लखनऊ से साड़ियां लाकर सरोजनी ने कढ़ाई शुरू की। दिन-रात की मेहनत और लगन से उनका काम चल निकला।
खुद का बनाया समूह, प्रतिमाह की हो रही 30 हजार की कमाई
सरोजनी ने बाद में खुद का ‘नवदुर्गा’ नाम से स्वयं सहायता समूह बनाया। समूह से गांव की 10 से अधिक महिलाओं को भी काम दिया। सरोजनी मात्र आठवीं पास हैं लेकिन प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए वह देश के दूसरे प्रांतों में लगने वाले मेलों में जाती हैं। उनके समूह की प्रतिमाह 30 हजार रुपये की कमाई हो रही है।
प्रादेशिक पुरस्कार के लिए सरोजनी ने राधा कृष्ण के साथ गाय की सुंदर कलाकृति तैयार की थी। इसी आधार पर रविवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान ने उनका उत्साहवर्धन किया। मंत्री ने सरोजनी को शॉल, 35 हजार रुपये का प्रतीकात्मक चेक और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।