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Unnao News: आंधी से बागों की अमिया आधी, फायदा तो दूर लागत भी डूबी
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फोटो-23--जमींदोज हुई अमिया को बोरियों में भरते बागवान। संवाद
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उन्नाव/सफीपुर। आंधी और ओलावृष्टि से बागों में करीब आधी अमिया गिर गईं। सबसे ज्यादा नुकसान सफीपुर और हसनगंज तहसील क्षेत्र की फल पट्टी में हुआ है। बागवानों का कहना है कि 40 फीसदी से अधिक फसल तैयार होने से पहले ही गिर गई है। ऐसे में इस बार मुनाफा तो दूर लागत निकलना भी मुश्किल दिख रहा है।
सफीपुर, मियागंज और हसनगंज ब्लाॅक क्षेत्र के बागवानों को बुधवार शाम आई आंधी ने झटका दिया है। बागवानों को टूटकर गिरी अमिया मंडी में पांच से 10 रुपये किलो बेचना पड़ा है। बागवान लक्ष्मीशंकर शुक्ला, सैफुद्दीन, राजकुमार, धनीराम, शिवमंगल, उस्मान ने बताया कि जिस खेत में आम का बाग लगाते हैं उसमें साल में एक ही फसल मिलती है। उसमें भी हर एक या दो साल बाद सभी पेड़ों में फल नहीं लगते हैं। इस बार शुरुआत में मौसम अच्छा रहा था। कीट-पतंगों का भी प्रकोप नहीं रहा लेकिन आंधी ने कमर तोड़ दी।
हर साल 6.50 लाख क्विंटल होती है आम की पैदावार
जिले में 35,600 हेक्टेयर आम फल पट्टी क्षेत्र है। हर साल औसतन 6.50 लाख क्विंटल आम की पैदावार होती है। इनमें दशहरी, लगड़ा, चौसा, लखनऊवा, आम्रपाली, हुस्नारा, तोतापरी, रामकेला आदि प्रजातियां प्रमुख हैं। बागवान सफीपुर, मियागंज, मोहान, फरहदपुर, बांगरमऊ की आढ़तों के माध्यम से आम की बिक्री करते हैं। लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, आगरा, बिहार और पूर्वांचल क्षेत्र के व्यापारी बागवानों से आम खरीदकर ले जाते हैं और कोलकाता, मुंबई, पंजाब, बिहार, राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों में बेचते हैं। इस बार आंधी से करीब 40 फीसदी यानी लगभग दो लाख क्विंटल फसल तैयार होने से पहले ही गिर गई। इससे आम बाग पर निर्भर रहने वाले किसान और बाग के बौर (फूल) के आधार पर फलत का अनुमान लगाकर सीजन की फसल खरीदने वाले व्यापारी नुकसान होने से परेशान हैं।
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इनसेट...
सर्वे कराकर शासन को भेजेंगे रिपोर्ट
एडीएम (वित्त/राजस्व) सुशील कुमार गोंड ने बताया कि आंधी और ओलावृष्टि से आम की फसल को नुकसान पहुंचने की सूचना मिली है। फसल नुकसान के आकलन के लिए राजस्व कर्मियों के माध्यम से सर्वे कराया जाएगा। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
फोटो-24-मेहंदी हसन
उधार रुपये लेकर खरीदी थी फसल
मियागंज निवासी बागवान मेहंदी हसन ने बताया कि 150 बीघा से अधिक बाग की फसलें खरीदी हैं। दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई की बड़ी आढ़तों से उधार लेकर रुपये लगाए थे। इस साल दो बार गिरे ओलों और अब आंधी ने करीब 50 फीसदी फसल नष्ट कर दी।
फोटो-25-सुघर सिंह
आंधी रकम निकालनी भी होगी मुश्किल
मियागंज क्षेत्र के कायमपुर निबरवारा निवासी सुघर सिंह ने बताया कि पांच लाख रुपये में 10 बीघा आम की फसल खरीदी थी। कीटनाशक का छिड़काव, सिंचाई आदि कराई। आंधी ने आधी फसल खराब कर दी। इस साल कमाई तो दूर लागत की आधी रकम तक निकलना मुश्किल होगा।
फोटो-26-भग्गूलाल
घर बनवाने का सपना नहीं हो पाएगा पूरा
गौरा खुर्द निवासी भग्गूलाल ने बताया कि पांच बीघा आम का बाग है। वह खुद ही तैयार कर आम बेचते हैं। लगभग तीन से चार लाख रुपये की फसल होने की उम्मीद थी लेकिन आंधी ने नुकसान कर दिया। सोचा था कि फसल बेचकर घर बनवाएंगे लेकिन वह भी नहीं हो पाएगा।
फोटो-27-मनोज
आढ़त का व्यवसाय दिख रहा चौपट
सफीपुर के फाजिलपुर निवासी मनोज ने बताया कि वह खुद आढ़त चलाते हैं। क्षेत्र से आने वाले आम व्यापारियों से खरीद कर दिल्ली, मुंबई व अन्य प्रांतों की बड़ी आढ़तों पर भेजकर आमदनी करते हैं। इस बार फसल खराब हो जाने से व्यवसाय भी चौपट दिख रहा है।
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फोटो-28-मुनेश्वर सिंह
70 फीसदी गिर गईं अमिया
अजमत गढ़ी गांव निवासी व्यापारी मुनेश्वर सिंह ने बताया कि इस बार उन्हें अब तक का सबसे बड़ा नुकसान हुआ है। आठ बीघा आम की बाग पांच लाख रुपये में खरीदी थी। शुरुआत में बौर अच्छा था लेकिन आंधी, तूफान और ओलावृष्टि के चलते करीब 70 प्रतिशत अमिया गिर गई है।
फोटो-29-तामिल
चौथाई ही बची है आम की फसल
लखनऊ के बुद्धेश्वर निवासी तामिल ने बताया कि ढाई लाख रुपये में चार बीघा बाग खरीदा था। करीब 700 क्रेट फसल निकलने की उम्मीद दी। बुधवार को आई आंधी से अब 150 से 200 क्रेट ही फसल बची है।
वर्जन....
आंधी ने आम की फसल को तगड़ा नुकसान पहुंचाया है। सफीपुर और मियागंज क्षेत्र में तो 30 से 35 फीसदी ही फसल बची है। पूरे फल पट्टी क्षेत्र का देखा जाए तो 35 से 40 प्रतिशत ही आम की फसल बची है। -नागेंद्र सिंह, उद्यान अधिकारी
फोटो-30-
बारिश-ओलावृष्टि से तरबूज किसानों को भारी नुकसान
गंजमुरादाबाद। दो दिन पहले आंधी और ओलावृष्टि ने तरबूज किसानों की कमर तोड़ दी है। उन्हें भारी नुकसान हुआ है। तरबूज की शक्ल बिगड़ने और पैदावार घटने से किसानों को लागत भी नहीं मिल पा रही है।
माधुरी और आइस बॉक्स प्रजाति के तरबूज बांगरमऊ मंडी में 400 से 500 रुपये क्विंटल बिक रहे हैं। किसानों के अनुसार एक बीघा तरबूज की खेती में करीब 20 हजार रुपये की लागत आती है। इस बार बारिश और ओलावृष्टि से पैदावार घटकर 40 क्विंटल प्रति बीघा रह गई है। मौसम की मार से तरबूज फटकर सड़ गए हैं और उनकी शक्ल बिगड़ गई है। हैबतपुर के हनी कटियार और करीमुद्दीनपुर के जितेंद्र गौतम सहित कई किसानों ने बताया कि फसल को भारी नुकसान हुआ है। सूरत बिगड़ने के कारण उन्हें अच्छी कीमत नहीं मिल रही है। किसान लागत भी न निकल पाने से मायूस हैं।
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सफीपुर, मियागंज और हसनगंज ब्लाॅक क्षेत्र के बागवानों को बुधवार शाम आई आंधी ने झटका दिया है। बागवानों को टूटकर गिरी अमिया मंडी में पांच से 10 रुपये किलो बेचना पड़ा है। बागवान लक्ष्मीशंकर शुक्ला, सैफुद्दीन, राजकुमार, धनीराम, शिवमंगल, उस्मान ने बताया कि जिस खेत में आम का बाग लगाते हैं उसमें साल में एक ही फसल मिलती है। उसमें भी हर एक या दो साल बाद सभी पेड़ों में फल नहीं लगते हैं। इस बार शुरुआत में मौसम अच्छा रहा था। कीट-पतंगों का भी प्रकोप नहीं रहा लेकिन आंधी ने कमर तोड़ दी।
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हर साल 6.50 लाख क्विंटल होती है आम की पैदावार
जिले में 35,600 हेक्टेयर आम फल पट्टी क्षेत्र है। हर साल औसतन 6.50 लाख क्विंटल आम की पैदावार होती है। इनमें दशहरी, लगड़ा, चौसा, लखनऊवा, आम्रपाली, हुस्नारा, तोतापरी, रामकेला आदि प्रजातियां प्रमुख हैं। बागवान सफीपुर, मियागंज, मोहान, फरहदपुर, बांगरमऊ की आढ़तों के माध्यम से आम की बिक्री करते हैं। लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, आगरा, बिहार और पूर्वांचल क्षेत्र के व्यापारी बागवानों से आम खरीदकर ले जाते हैं और कोलकाता, मुंबई, पंजाब, बिहार, राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों में बेचते हैं। इस बार आंधी से करीब 40 फीसदी यानी लगभग दो लाख क्विंटल फसल तैयार होने से पहले ही गिर गई। इससे आम बाग पर निर्भर रहने वाले किसान और बाग के बौर (फूल) के आधार पर फलत का अनुमान लगाकर सीजन की फसल खरीदने वाले व्यापारी नुकसान होने से परेशान हैं।
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सर्वे कराकर शासन को भेजेंगे रिपोर्ट
एडीएम (वित्त/राजस्व) सुशील कुमार गोंड ने बताया कि आंधी और ओलावृष्टि से आम की फसल को नुकसान पहुंचने की सूचना मिली है। फसल नुकसान के आकलन के लिए राजस्व कर्मियों के माध्यम से सर्वे कराया जाएगा। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
फोटो-24-मेहंदी हसन
उधार रुपये लेकर खरीदी थी फसल
मियागंज निवासी बागवान मेहंदी हसन ने बताया कि 150 बीघा से अधिक बाग की फसलें खरीदी हैं। दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई की बड़ी आढ़तों से उधार लेकर रुपये लगाए थे। इस साल दो बार गिरे ओलों और अब आंधी ने करीब 50 फीसदी फसल नष्ट कर दी।
फोटो-25-सुघर सिंह
आंधी रकम निकालनी भी होगी मुश्किल
मियागंज क्षेत्र के कायमपुर निबरवारा निवासी सुघर सिंह ने बताया कि पांच लाख रुपये में 10 बीघा आम की फसल खरीदी थी। कीटनाशक का छिड़काव, सिंचाई आदि कराई। आंधी ने आधी फसल खराब कर दी। इस साल कमाई तो दूर लागत की आधी रकम तक निकलना मुश्किल होगा।
फोटो-26-भग्गूलाल
घर बनवाने का सपना नहीं हो पाएगा पूरा
गौरा खुर्द निवासी भग्गूलाल ने बताया कि पांच बीघा आम का बाग है। वह खुद ही तैयार कर आम बेचते हैं। लगभग तीन से चार लाख रुपये की फसल होने की उम्मीद थी लेकिन आंधी ने नुकसान कर दिया। सोचा था कि फसल बेचकर घर बनवाएंगे लेकिन वह भी नहीं हो पाएगा।
फोटो-27-मनोज
आढ़त का व्यवसाय दिख रहा चौपट
सफीपुर के फाजिलपुर निवासी मनोज ने बताया कि वह खुद आढ़त चलाते हैं। क्षेत्र से आने वाले आम व्यापारियों से खरीद कर दिल्ली, मुंबई व अन्य प्रांतों की बड़ी आढ़तों पर भेजकर आमदनी करते हैं। इस बार फसल खराब हो जाने से व्यवसाय भी चौपट दिख रहा है।
फोटो-28-मुनेश्वर सिंह
70 फीसदी गिर गईं अमिया
अजमत गढ़ी गांव निवासी व्यापारी मुनेश्वर सिंह ने बताया कि इस बार उन्हें अब तक का सबसे बड़ा नुकसान हुआ है। आठ बीघा आम की बाग पांच लाख रुपये में खरीदी थी। शुरुआत में बौर अच्छा था लेकिन आंधी, तूफान और ओलावृष्टि के चलते करीब 70 प्रतिशत अमिया गिर गई है।
फोटो-29-तामिल
चौथाई ही बची है आम की फसल
लखनऊ के बुद्धेश्वर निवासी तामिल ने बताया कि ढाई लाख रुपये में चार बीघा बाग खरीदा था। करीब 700 क्रेट फसल निकलने की उम्मीद दी। बुधवार को आई आंधी से अब 150 से 200 क्रेट ही फसल बची है।
वर्जन....
आंधी ने आम की फसल को तगड़ा नुकसान पहुंचाया है। सफीपुर और मियागंज क्षेत्र में तो 30 से 35 फीसदी ही फसल बची है। पूरे फल पट्टी क्षेत्र का देखा जाए तो 35 से 40 प्रतिशत ही आम की फसल बची है। -नागेंद्र सिंह, उद्यान अधिकारी
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बारिश-ओलावृष्टि से तरबूज किसानों को भारी नुकसान
गंजमुरादाबाद। दो दिन पहले आंधी और ओलावृष्टि ने तरबूज किसानों की कमर तोड़ दी है। उन्हें भारी नुकसान हुआ है। तरबूज की शक्ल बिगड़ने और पैदावार घटने से किसानों को लागत भी नहीं मिल पा रही है।
माधुरी और आइस बॉक्स प्रजाति के तरबूज बांगरमऊ मंडी में 400 से 500 रुपये क्विंटल बिक रहे हैं। किसानों के अनुसार एक बीघा तरबूज की खेती में करीब 20 हजार रुपये की लागत आती है। इस बार बारिश और ओलावृष्टि से पैदावार घटकर 40 क्विंटल प्रति बीघा रह गई है। मौसम की मार से तरबूज फटकर सड़ गए हैं और उनकी शक्ल बिगड़ गई है। हैबतपुर के हनी कटियार और करीमुद्दीनपुर के जितेंद्र गौतम सहित कई किसानों ने बताया कि फसल को भारी नुकसान हुआ है। सूरत बिगड़ने के कारण उन्हें अच्छी कीमत नहीं मिल रही है। किसान लागत भी न निकल पाने से मायूस हैं।

फोटो-23--जमींदोज हुई अमिया को बोरियों में भरते बागवान। संवाद

फोटो-23--जमींदोज हुई अमिया को बोरियों में भरते बागवान। संवाद

फोटो-23--जमींदोज हुई अमिया को बोरियों में भरते बागवान। संवाद

फोटो-23--जमींदोज हुई अमिया को बोरियों में भरते बागवान। संवाद

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