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Unnao News: रोडवेज बसों में न दवा और न मरहम-पट्टी
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फोटो-10- बस में शोपीस बना फर्स्ट-एड बाक्स। संवाद
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उन्नाव। यात्रियों को सुगम सफर का दावा करने वाली परिवहन निगम की बसों में किसी यात्री के बीमार होने पर तत्काल प्राथमिक उपचार देने की व्यवस्था तक नहीं है। हालांकि रोडवेज बसों में फर्स्ट-एड बॉक्स की व्यवस्था होती है लेकिन उन्नाव डिपो की 110 बसों में से 20 नई बसों के अलावा ज्यादातर के फर्स्ट-एड बॉक्स खाली हैं। कई में तो बॉक्स ही गायब हैं।
रोडवेज बस में सफर के दौरान हल्की चोट लगने, चक्कर आने, डिहाइड्रेशन होने या बुखार होने पर प्राथमिक इलाज की व्यवस्था होती है। बसों में लगे फर्स्ट-एड बॉक्स में मरहम-पट्टी और कुछ जरूरी दवाएं होती हैं। इनकी औसत कीमत करीब 150 रुपये होती है। कुछ दवाओं की एक्सपायरी एक साल की तो कुछ की दो साल की होती है लेकिन एक बार दवाएं खराब होने के बाद परिवहन निगम के जिम्मेदार इनमें दोबारा दवाएं नहीं रखवाते।
सूत्रों का दावा है कि फर्स्ट-एड बॉक्स के लिए दवाओं की खरीद तय समय पर होती है लेकिन यह केवल कागजों तक सीमित है। ऐसे में किसी यात्री या उनके साथ सफर कर रहे बच्चों व अन्य सदस्यों की तबीयत बिगड़ने, डिहाइड्रेशन या चोट लगने पर चालक-परिचालक उनका प्राथमिक इलाज कर सकें और आवश्यक होने पर रास्ते में किसी अस्पताल पहुंचा सकें। जिन बसों के फर्स्ट-एड में मेडिकल किट है भी तो वह मानक के अनुरूप नहीं है।
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बसों में यह होनी चाहिए व्यवस्था
सभी रोडवेज बसों में मेडिकल किट में दर्द निवारक दवा, पट्टी, रुई, बैंडेज, बीटाडीन ट्यूब के अलावा आपातकालीन स्थिति में ली जाने वाली दर्द निवारक दवा आवश्यक है।
बसों में फर्स्ट-एड बॉक्स लगे हैं, समय-समय पर चेक कराया जाता है और एक्सपायरी दवाएं हटाकर नई रखवाई जाती हैं। टूटे या खराब होने पर वर्कशॉप से परिचालकों को बॉक्स भी उपलब्ध कराए जाते हैं। सभी परिचालकों से रिपोर्ट लेंगे और जिनमें ये बॉक्स नहीं हैं या दवाएं खराब हैं उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा। -जीसी वर्मा, एआरएम रोडवेज
क्या कहते हैं यात्री
फोटो-11- कन्हैया गुप्ता
ज्यादातर बसों में नहीं फर्स्ट एड बॉक्स
लोकनगर निवासी कन्हैया गुप्ता ने बताया कि वह अक्सर रोडवेज बस से सफर करते हैं। ज्यादातर बसों में फर्स्ट-एड की व्यवस्था नहीं होती। परिवहन निगम की ओर से यात्रियों को यह सुविधा देना आवश्यक होता है।
फोटो- 12-रिजवान
आपातकाल में नहीं मिलतीं दवाएं
तालिब सराय निवासी रिजवान ने बताया कि वह अक्सर काम के सिलसिले में लखनऊ-कानपुर जाते हैं। सफर के दौरान कई बार यात्रियों की तबीयत बिगड़ती है, लेकिन बसों में आपातकालीन दवाएं नहीं मिलतीं।
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रोडवेज बस में सफर के दौरान हल्की चोट लगने, चक्कर आने, डिहाइड्रेशन होने या बुखार होने पर प्राथमिक इलाज की व्यवस्था होती है। बसों में लगे फर्स्ट-एड बॉक्स में मरहम-पट्टी और कुछ जरूरी दवाएं होती हैं। इनकी औसत कीमत करीब 150 रुपये होती है। कुछ दवाओं की एक्सपायरी एक साल की तो कुछ की दो साल की होती है लेकिन एक बार दवाएं खराब होने के बाद परिवहन निगम के जिम्मेदार इनमें दोबारा दवाएं नहीं रखवाते।
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सूत्रों का दावा है कि फर्स्ट-एड बॉक्स के लिए दवाओं की खरीद तय समय पर होती है लेकिन यह केवल कागजों तक सीमित है। ऐसे में किसी यात्री या उनके साथ सफर कर रहे बच्चों व अन्य सदस्यों की तबीयत बिगड़ने, डिहाइड्रेशन या चोट लगने पर चालक-परिचालक उनका प्राथमिक इलाज कर सकें और आवश्यक होने पर रास्ते में किसी अस्पताल पहुंचा सकें। जिन बसों के फर्स्ट-एड में मेडिकल किट है भी तो वह मानक के अनुरूप नहीं है।
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बसों में यह होनी चाहिए व्यवस्था
सभी रोडवेज बसों में मेडिकल किट में दर्द निवारक दवा, पट्टी, रुई, बैंडेज, बीटाडीन ट्यूब के अलावा आपातकालीन स्थिति में ली जाने वाली दर्द निवारक दवा आवश्यक है।
बसों में फर्स्ट-एड बॉक्स लगे हैं, समय-समय पर चेक कराया जाता है और एक्सपायरी दवाएं हटाकर नई रखवाई जाती हैं। टूटे या खराब होने पर वर्कशॉप से परिचालकों को बॉक्स भी उपलब्ध कराए जाते हैं। सभी परिचालकों से रिपोर्ट लेंगे और जिनमें ये बॉक्स नहीं हैं या दवाएं खराब हैं उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा। -जीसी वर्मा, एआरएम रोडवेज
क्या कहते हैं यात्री
फोटो-11- कन्हैया गुप्ता
ज्यादातर बसों में नहीं फर्स्ट एड बॉक्स
लोकनगर निवासी कन्हैया गुप्ता ने बताया कि वह अक्सर रोडवेज बस से सफर करते हैं। ज्यादातर बसों में फर्स्ट-एड की व्यवस्था नहीं होती। परिवहन निगम की ओर से यात्रियों को यह सुविधा देना आवश्यक होता है।
फोटो- 12-रिजवान
आपातकाल में नहीं मिलतीं दवाएं
तालिब सराय निवासी रिजवान ने बताया कि वह अक्सर काम के सिलसिले में लखनऊ-कानपुर जाते हैं। सफर के दौरान कई बार यात्रियों की तबीयत बिगड़ती है, लेकिन बसों में आपातकालीन दवाएं नहीं मिलतीं।

फोटो-10- बस में शोपीस बना फर्स्ट-एड बाक्स। संवाद