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Unnao News: 4.38 अरब की दो सीवरेज परियोजनाएं चोक
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फोटो-30-ट्रयाल में ही पाइप लाइन चोक हो जने से बंद पड़ा अचलगंज के डकारी में एनएमजीसी के तहत बना
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उन्नाव। शहर को जलभराव से निजात और गंगा नदी को निर्मल बनाने की 4.38 अरब की दो योजनाएं पाइप लाइन में रेत भरने चोक हो गई हैं।इस कारण वर्ष 2019 में नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमजीसी) के तहत 3.80 अरब की एसटीपी और शहर के सीवरेज और नालों के पानी को पंप स्टेशनों के लिए एसटीपी तक पहुंचाने की 58 करोड़ की परियोजनाएं अभी तक शुरू नहीं हो पाईं। इससे रोज 15 लाख लीटर गंदा पानी बिना साफ हुए गंगा में जा रहा है।
दो साल से काम नहीं कर रहा एसटीपी
शहर की जलनिकासी की समस्या को हल करने के साथ ही सीवरेज और गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार ने नमामि गंगे परियोजना के तहत वर्ष 2019 में उन्नाव (शहर) और गंगाघाट (शुक्लागंज) नगर पालिका क्षेत्र के लिए 3.80 अरब की परियोजना मंजूर की थी। परियोजना के तहत लोनी और सिटी ड्रेन में गिरने वाले नालों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाए गए हैं। शुक्लागंज में गंगा में गिरने वाले सात में से पांच नालों को पक्का करके इसी से जोड़ा गया है लेकिन अचलगंज के डकारी गांव में नदी के किनारे बनाया गया 15 एमएलडी (15 लाख लीटर पानी प्रति दिन) पानी साफ करने की क्षमता वाला एसटीपी दो साल से काम नहीं कर पा रहा है। भूमिगत पाइप लाइन में रेत भरने से पाइप लाइन चोक हो गई है।
एमपीएस का भी नहीं मिला फायदा
डकारी एसटीपी चालू न होने से अमृत योजना की 58 करोड़ से शहर के पीतांबर नगर, शिव नगर सहित अन्य मोहल्लों क्षेत्रों में भूमिगत सीवरेज पाइप लाइन और शिव नगर में इंटरमीडिएशन स्टेशन (आईपीएस) आदर्शनगर में 30 एमएलडी क्षमता का मेन पंपिंग स्टेशन (एमपीएस) भी काम नहीं कर पा रहा है। शिवनगर के आईपीएस को आदर्शनगर के एमपीएस से जोड़ने के लिए पांच किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइप लाइन डाली गई है। इसके बाद 10 किलोमीटर भूमिगत पाइप लाइन डालकर शहर के एमपीएस को डकारी के एसटीपी से जोड़ा गया है लेकिन बनने के बाद भी यह काम नहीं आ रहे हैं।
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ये है समस्या
शहर का गंदा पानी लोनी ड्रेन में गिरता है। इसी ड्रेन में दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र और शहर के सीवर पंप हाउस का भी पानी जाता है। करीब 150 किलोमीटर लंबी यह ड्रेन शहर के दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र से बीघापुर तहसील से बिहार कस्बा होते हुए रायबरेली जिले के लालगंज क्षेत्र में भोजपुर गांव के पास गंगा नदी में मिलती है।
सिटी ड्रेन शहर के जिला कारागार के पास से शुरू होकर कब्बाखेड़ा होते हुए शराब मिल नाला, शेखपुर, अकरमपुर औद्योगिक क्षेत्र से अचलगंज के गहिरा, बंथर औद्योगिक क्षेत्र से होते हुए ब्लॉक सिकंदपुर कर्ण के बलाई गांव के पास गंगा नदी में गिरता है। 25 किमी लंबी इस ड्रेन के पानी को साफ करने के लिए बंथर औद्योगिक क्षेत्र से पांच किमी आगे डकारी गांव पास एसटीपी बनाया गया था। लेकिन वह भी बंद है।
शुक्लागंज (गंगाघाट नगर पालिका) क्षेत्र से पांच नाले गंगा नदी में गिरते हैं, इनमें इंद्रानगर नाला, शक्ति नगर, रविदास नगर, मिश्रा कॉलोनी और पुरानी बाजार क्षेत्र शामिल हैं। गंदे पानी को गंगा में जाने से रोकने के लिए शुक्लागंज में तीन एसटीपी बनने हैं। हालांकि अभी केवल एक का 80 फीसदी काम हो पाया है।
वर्जन...
15 एमएलडी क्षमता का डकारी एसटीपी बन चुका है। रेत (बालू) भर जाने से एसटीपी की 3.2 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन चोक होने से समस्या आई है। उसे साफ कराया जा रहा है। यह पाइप लाइन जमीन में 5.50 मीटर गहराई में है इससे सफाई में कुछ समस्या हो रही है, पंपसेट पानी निकाल कर पाइप लाइन को साफ कराया जा रहा है। 15 दिन में काम पूरा हो जाएगा और एसटीपी पूरी क्षमता से चालू हो जाएगा।-अजीत सिंह, एक्सईएन जलनिगम
शहर में आवास विकास कॉलोनी के अलावा कहीं भी सीवर लाइन नहीं हैं। शहर की 45 हजार से अधिक मकानों की सीवरेज व्यवस्था, सेप्टिक टैंक पर आधारित है। जलनिकासी और सीवरेज की समस्या हल करने के लिए 2020 में शहर में सीवर लाइन की सुविधा के प्रयास शुरू किए और 29, 29 करोड़ की दो योजनाएं स्वीकृत कराईं और इनका निर्माण भी पूरा कराया, लेकिन इनका संचालन नहीं हो पा रहा है। उच्चाधिकारियों और जलशक्ति मंत्री से बात करके शहर वासियों की इस गंभीर समस्या हल कराने का प्रयास करेंगे।-पंकज गुप्ता, सदर विधायक
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दो साल से काम नहीं कर रहा एसटीपी
शहर की जलनिकासी की समस्या को हल करने के साथ ही सीवरेज और गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार ने नमामि गंगे परियोजना के तहत वर्ष 2019 में उन्नाव (शहर) और गंगाघाट (शुक्लागंज) नगर पालिका क्षेत्र के लिए 3.80 अरब की परियोजना मंजूर की थी। परियोजना के तहत लोनी और सिटी ड्रेन में गिरने वाले नालों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाए गए हैं। शुक्लागंज में गंगा में गिरने वाले सात में से पांच नालों को पक्का करके इसी से जोड़ा गया है लेकिन अचलगंज के डकारी गांव में नदी के किनारे बनाया गया 15 एमएलडी (15 लाख लीटर पानी प्रति दिन) पानी साफ करने की क्षमता वाला एसटीपी दो साल से काम नहीं कर पा रहा है। भूमिगत पाइप लाइन में रेत भरने से पाइप लाइन चोक हो गई है।
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एमपीएस का भी नहीं मिला फायदा
डकारी एसटीपी चालू न होने से अमृत योजना की 58 करोड़ से शहर के पीतांबर नगर, शिव नगर सहित अन्य मोहल्लों क्षेत्रों में भूमिगत सीवरेज पाइप लाइन और शिव नगर में इंटरमीडिएशन स्टेशन (आईपीएस) आदर्शनगर में 30 एमएलडी क्षमता का मेन पंपिंग स्टेशन (एमपीएस) भी काम नहीं कर पा रहा है। शिवनगर के आईपीएस को आदर्शनगर के एमपीएस से जोड़ने के लिए पांच किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइप लाइन डाली गई है। इसके बाद 10 किलोमीटर भूमिगत पाइप लाइन डालकर शहर के एमपीएस को डकारी के एसटीपी से जोड़ा गया है लेकिन बनने के बाद भी यह काम नहीं आ रहे हैं।
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ये है समस्या
शहर का गंदा पानी लोनी ड्रेन में गिरता है। इसी ड्रेन में दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र और शहर के सीवर पंप हाउस का भी पानी जाता है। करीब 150 किलोमीटर लंबी यह ड्रेन शहर के दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र से बीघापुर तहसील से बिहार कस्बा होते हुए रायबरेली जिले के लालगंज क्षेत्र में भोजपुर गांव के पास गंगा नदी में मिलती है।
सिटी ड्रेन शहर के जिला कारागार के पास से शुरू होकर कब्बाखेड़ा होते हुए शराब मिल नाला, शेखपुर, अकरमपुर औद्योगिक क्षेत्र से अचलगंज के गहिरा, बंथर औद्योगिक क्षेत्र से होते हुए ब्लॉक सिकंदपुर कर्ण के बलाई गांव के पास गंगा नदी में गिरता है। 25 किमी लंबी इस ड्रेन के पानी को साफ करने के लिए बंथर औद्योगिक क्षेत्र से पांच किमी आगे डकारी गांव पास एसटीपी बनाया गया था। लेकिन वह भी बंद है।
शुक्लागंज (गंगाघाट नगर पालिका) क्षेत्र से पांच नाले गंगा नदी में गिरते हैं, इनमें इंद्रानगर नाला, शक्ति नगर, रविदास नगर, मिश्रा कॉलोनी और पुरानी बाजार क्षेत्र शामिल हैं। गंदे पानी को गंगा में जाने से रोकने के लिए शुक्लागंज में तीन एसटीपी बनने हैं। हालांकि अभी केवल एक का 80 फीसदी काम हो पाया है।
वर्जन...
15 एमएलडी क्षमता का डकारी एसटीपी बन चुका है। रेत (बालू) भर जाने से एसटीपी की 3.2 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन चोक होने से समस्या आई है। उसे साफ कराया जा रहा है। यह पाइप लाइन जमीन में 5.50 मीटर गहराई में है इससे सफाई में कुछ समस्या हो रही है, पंपसेट पानी निकाल कर पाइप लाइन को साफ कराया जा रहा है। 15 दिन में काम पूरा हो जाएगा और एसटीपी पूरी क्षमता से चालू हो जाएगा।-अजीत सिंह, एक्सईएन जलनिगम
शहर में आवास विकास कॉलोनी के अलावा कहीं भी सीवर लाइन नहीं हैं। शहर की 45 हजार से अधिक मकानों की सीवरेज व्यवस्था, सेप्टिक टैंक पर आधारित है। जलनिकासी और सीवरेज की समस्या हल करने के लिए 2020 में शहर में सीवर लाइन की सुविधा के प्रयास शुरू किए और 29, 29 करोड़ की दो योजनाएं स्वीकृत कराईं और इनका निर्माण भी पूरा कराया, लेकिन इनका संचालन नहीं हो पा रहा है। उच्चाधिकारियों और जलशक्ति मंत्री से बात करके शहर वासियों की इस गंभीर समस्या हल कराने का प्रयास करेंगे।-पंकज गुप्ता, सदर विधायक

फोटो-30-ट्रयाल में ही पाइप लाइन चोक हो जने से बंद पड़ा अचलगंज के डकारी में एनएमजीसी के तहत बना