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Unnao News: भ्रष्टाचार के पांच आरोप मिले सही, पालिकाध्यक्ष से स्पष्टीकरण तलब
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फोटो-39- नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा।
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उन्नाव। भाजपा की नगर पालिकाध्यक्ष श्वेता मिश्रा पर लगे भ्रष्टाचार के 17 आरोपों में से पांच जांच में सही मिले हैं। जिला प्रशासन की दो अलग-अलग समितियों ने इन आरोपों की जांच की थी। नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने नोटिस जारी कर 15 दिन में साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण मांगा है।
सभासदों की शिकायत पर हुई जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद ने पालिका अध्यक्ष को नोटिस जारी किया है। इसमें श्रमिक आपूर्ति, भूसा खरीद और पड़ाव अड्डा संचालन में अनियमितता सहित पांच आरोप साबित होने का उल्लेख है। प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारी के माध्यम से जवाब देने के लिए कहा है। जवाब न मिलने पर उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा 48 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। यह धारा राज्य सरकार को अध्यक्ष के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज करने का अधिकार देती है। यदि अध्यक्ष कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहती हैं या पालिका के हितों के विपरीत काम करती हैं तो यह कार्रवाई हो सकती है। कारण बताओ नोटिस के जवाब के बाद आरोपों की जांच और सुनवाई का अवसर दिया जाता है।
ये आरोप सही मिले
1. श्रमिक आपूर्ति के लिए जेम निविदाएं नियम विरुद्ध पाई गईं। बिना कारण बताए कई निविदाएं रद्द कर मनमानी फर्मों को काम दिया गया। गोशाला में भूसा आपूर्ति में भी गड़बड़ी सामने आई है। न्यूनतम दर वाली फर्म के बजाय अधिक दर पर भूसा खरीदा गया। इससे नगर पालिका को राजस्व का नुकसान हुआ। यह खरीद प्रक्रिया नियमों के विपरीत पाई गई है।
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2. पड़ाव अड्डा संचालन में अनुभव की शर्त को बोर्ड की सहमति के बिना हटा दिया गया। चहेती फर्मों को काम देकर बार-बार समयावधि बढ़ाई गई। पुलिस ने 22 अक्तूबर 2024 को अवैध वसूली के आरोप में प्राथमिकी भी दर्ज की थी। इसके बावजूद दागी फर्मों को संरक्षण दिया गया। जिलाधिकारी के निर्देशों का उल्लंघन कर अवैध वसूली जारी रही।
3. स्वच्छ भारत मिशन के तहत 10 हजार डस्टबिन और झोले बांटने का दावा गलत पाया गया। जांच में केवल चार हजार डस्टबिन खरीदने की बात सामने आई पर वितरण का पूरा विवरण नहीं मिला।
4. कर निर्धारण में मनमानी और गलत गृहकर व जल कर निर्धारण के आरोप भी साबित हुए हैं। शासनादेशों के विपरीत मनमाने ढंग से कर निर्धारित कर वसूली की जा रही है। इससे पालिका की आय को क्षति पहुंचाई गई है। कुछ व्यावसायिक संस्थानों का गृहकर और जल कर निर्धारण भी गलत पाया गया।
5. सुंदरीकरण के लिए खजूर के पेड़ खरीदने में भी अनियमितता मिली। पेड़ों की खरीद जेम पोर्टल के बजाय ई-निविदा से की गई। हुसैन नगर स्थित कूड़ा डंपिंग स्थल से 600 घनमीटर अवैध मिट्टी खनन भी पाया गया जिसका उपयोग कहां हुआ इसका कोई अभिलेख नहीं है।
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पालिका अध्यक्ष ने आरोपों को निराधार बताया
पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा ने कहा कि जो भी आरोप लगे हैं उनके पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है। कई पुराने मामलों को भी थोप दिया गया है। बताया कि कार्यकाल की शुरुआत 27 मई 2023 को शपथ ग्रहण के साथ हुई थी। श्रमिक आपूर्ति का ठेका मार्च 2023 में हुआ था। भूसा खरीद की स्वीकृति अप्रैल 2023 को हुई थी। पड़ाव अड्डा नीलामी तत्कालीन डीएम की ओर से गठित कमेटी ने कराई थी और फर्मों पर एफआईआर 22 मई को कार्यकाल से पहले हुई थी। डस्टबिन व थैले 10 हजार नहीं सिर्फ चार हजार खरीदे गए जिसका ब्योरा उपलब्ध है। खजूर पेड़ जेम पोर्टल पर उपलब्ध नहीं हैं इसलिए पेड़ लगाने और पांच साल तक उनके रखरखाव की शर्त के साथ टेंडर हुआ। कर निर्धारण में अध्यक्ष की कोई भूमिका नहीं होती। सारे आरोप निराधार हैं जिनका डीएम के माध्यम से प्रमुख सचिव नगर विकास को जवाब भेजेंगी।
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सभासदों की शिकायत पर हुई जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद ने पालिका अध्यक्ष को नोटिस जारी किया है। इसमें श्रमिक आपूर्ति, भूसा खरीद और पड़ाव अड्डा संचालन में अनियमितता सहित पांच आरोप साबित होने का उल्लेख है। प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारी के माध्यम से जवाब देने के लिए कहा है। जवाब न मिलने पर उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा 48 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। यह धारा राज्य सरकार को अध्यक्ष के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज करने का अधिकार देती है। यदि अध्यक्ष कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहती हैं या पालिका के हितों के विपरीत काम करती हैं तो यह कार्रवाई हो सकती है। कारण बताओ नोटिस के जवाब के बाद आरोपों की जांच और सुनवाई का अवसर दिया जाता है।
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ये आरोप सही मिले
1. श्रमिक आपूर्ति के लिए जेम निविदाएं नियम विरुद्ध पाई गईं। बिना कारण बताए कई निविदाएं रद्द कर मनमानी फर्मों को काम दिया गया। गोशाला में भूसा आपूर्ति में भी गड़बड़ी सामने आई है। न्यूनतम दर वाली फर्म के बजाय अधिक दर पर भूसा खरीदा गया। इससे नगर पालिका को राजस्व का नुकसान हुआ। यह खरीद प्रक्रिया नियमों के विपरीत पाई गई है।
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2. पड़ाव अड्डा संचालन में अनुभव की शर्त को बोर्ड की सहमति के बिना हटा दिया गया। चहेती फर्मों को काम देकर बार-बार समयावधि बढ़ाई गई। पुलिस ने 22 अक्तूबर 2024 को अवैध वसूली के आरोप में प्राथमिकी भी दर्ज की थी। इसके बावजूद दागी फर्मों को संरक्षण दिया गया। जिलाधिकारी के निर्देशों का उल्लंघन कर अवैध वसूली जारी रही।
3. स्वच्छ भारत मिशन के तहत 10 हजार डस्टबिन और झोले बांटने का दावा गलत पाया गया। जांच में केवल चार हजार डस्टबिन खरीदने की बात सामने आई पर वितरण का पूरा विवरण नहीं मिला।
4. कर निर्धारण में मनमानी और गलत गृहकर व जल कर निर्धारण के आरोप भी साबित हुए हैं। शासनादेशों के विपरीत मनमाने ढंग से कर निर्धारित कर वसूली की जा रही है। इससे पालिका की आय को क्षति पहुंचाई गई है। कुछ व्यावसायिक संस्थानों का गृहकर और जल कर निर्धारण भी गलत पाया गया।
5. सुंदरीकरण के लिए खजूर के पेड़ खरीदने में भी अनियमितता मिली। पेड़ों की खरीद जेम पोर्टल के बजाय ई-निविदा से की गई। हुसैन नगर स्थित कूड़ा डंपिंग स्थल से 600 घनमीटर अवैध मिट्टी खनन भी पाया गया जिसका उपयोग कहां हुआ इसका कोई अभिलेख नहीं है।
पालिका अध्यक्ष ने आरोपों को निराधार बताया
पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा ने कहा कि जो भी आरोप लगे हैं उनके पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है। कई पुराने मामलों को भी थोप दिया गया है। बताया कि कार्यकाल की शुरुआत 27 मई 2023 को शपथ ग्रहण के साथ हुई थी। श्रमिक आपूर्ति का ठेका मार्च 2023 में हुआ था। भूसा खरीद की स्वीकृति अप्रैल 2023 को हुई थी। पड़ाव अड्डा नीलामी तत्कालीन डीएम की ओर से गठित कमेटी ने कराई थी और फर्मों पर एफआईआर 22 मई को कार्यकाल से पहले हुई थी। डस्टबिन व थैले 10 हजार नहीं सिर्फ चार हजार खरीदे गए जिसका ब्योरा उपलब्ध है। खजूर पेड़ जेम पोर्टल पर उपलब्ध नहीं हैं इसलिए पेड़ लगाने और पांच साल तक उनके रखरखाव की शर्त के साथ टेंडर हुआ। कर निर्धारण में अध्यक्ष की कोई भूमिका नहीं होती। सारे आरोप निराधार हैं जिनका डीएम के माध्यम से प्रमुख सचिव नगर विकास को जवाब भेजेंगी।