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Unnao News: तीस साल चला मुकदमा, दोषी पति को दो साल की सजा
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उन्नाव। दहेज उत्पीड़न के एक मुकदमे में न्यायालय ने 30 साल बाद फैसला सुनाया। अदालत ने दोषी पति को दो साल कारावास की सजा सुनाई है। मुकदमे में नामजद चार में से तीन आरोपियों और छह गवाहों में से चार की मौत हो चुकी है। पीड़िता ने फैसले पर संतोष जताया है।
मनिकापुर गांव निवासी रजनी देवी का वर्ष 1995 में सुमेपुर गांव निवासी योगेश शंकर अवस्थी से विवाह हुआ था। आरोप था कि विवाह के एक साल बाद ही पति और ससुराल वाले दहेज के प्रताड़ित करने लगे। इस पर रजनी मायके आकर भाई वीरेंद्र मिश्रा के साथ रहने लगीं। 1996 में पति योगेश शंकर अवस्थी के अलावा सास, ममेरे ससुर और चचेरे ससुर के खिलाफ दहेज उत्पीड़न की प्राथमिकी बिहार थाने में दर्ज कराई थी।
पुलिस ने विवेचना के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। आरोप है कि प्रभावशाली पक्ष की ओर से साक्ष्यों और प्रक्रिया पर दबाव बनाने के कारण मुकदमे की सुनवाई में देरी हुई। इस पर पीड़ित पक्ष की मांग पर हाईकोर्ट ने 2024 में मुकदमे को पुरवा न्यायालय से जिला सत्र न्यायालय स्थानांतरित किया था।
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इसके बाद अवर न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) पंचम न्यायालय में तेजी से सुनवाई शुरू हुई। हालांकि तीन दशक तक चले मुकदमे के दौरान ही चार नामजद आरोपियों में पीड़िता की सास, चचेरे और ममेरे ससुर की मौत हो गई। छह गवाहों में चार की मौत हो गई। पीड़िता के अधिवक्ता की दलीलों और साक्ष्यों के आधार पर दोष साबित होने पर न्यायाधीश मेधा अग्रवाल ने मुख्य आरोपी योगेश शंकर अवस्थी को दो वर्ष कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय के फैसले पर पीड़िता रजनी और उनके भाई वीरेंद्र मिश्रा ने संतोष व्यक्त किया।
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मनिकापुर गांव निवासी रजनी देवी का वर्ष 1995 में सुमेपुर गांव निवासी योगेश शंकर अवस्थी से विवाह हुआ था। आरोप था कि विवाह के एक साल बाद ही पति और ससुराल वाले दहेज के प्रताड़ित करने लगे। इस पर रजनी मायके आकर भाई वीरेंद्र मिश्रा के साथ रहने लगीं। 1996 में पति योगेश शंकर अवस्थी के अलावा सास, ममेरे ससुर और चचेरे ससुर के खिलाफ दहेज उत्पीड़न की प्राथमिकी बिहार थाने में दर्ज कराई थी।
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पुलिस ने विवेचना के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। आरोप है कि प्रभावशाली पक्ष की ओर से साक्ष्यों और प्रक्रिया पर दबाव बनाने के कारण मुकदमे की सुनवाई में देरी हुई। इस पर पीड़ित पक्ष की मांग पर हाईकोर्ट ने 2024 में मुकदमे को पुरवा न्यायालय से जिला सत्र न्यायालय स्थानांतरित किया था।
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इसके बाद अवर न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) पंचम न्यायालय में तेजी से सुनवाई शुरू हुई। हालांकि तीन दशक तक चले मुकदमे के दौरान ही चार नामजद आरोपियों में पीड़िता की सास, चचेरे और ममेरे ससुर की मौत हो गई। छह गवाहों में चार की मौत हो गई। पीड़िता के अधिवक्ता की दलीलों और साक्ष्यों के आधार पर दोष साबित होने पर न्यायाधीश मेधा अग्रवाल ने मुख्य आरोपी योगेश शंकर अवस्थी को दो वर्ष कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय के फैसले पर पीड़िता रजनी और उनके भाई वीरेंद्र मिश्रा ने संतोष व्यक्त किया।