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Unnao News: ईरान युद्ध से रेशम के धागों की कीमतों में लगी आग
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फोटो-1-मियागंज में जरीदोजी कार्य में लगी महिलाएं। संवाद
- फोटो : Archive
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उन्नाव। ईरान युद्ध के चलते जरी जरदोजी (कढ़ाई) का काम प्रभावित हो रहा है। जरदोजी में प्रयोग होने वाले रेशम के धागे की कीमत में लगभग दोगुना उछाल आ गया है। जो धागा 160 रुपये प्रति किलो मिलता था, अब उसकी कीमत बढ़कर तीन सौ पहुंच गई है। ऐसे में 42 हजार जरदोजी कामगारों की परेशानी बढ़ गई है।
जनपद में शहर के अलावा मियागंज क्षेत्र में जरदोजी का काम बहुतायत होता है। इस व्यवसाय से करीब 42 हजार लोग जुड़े हैं। इसमें महिलाओं की संख्या करीब 25 हजार के आसपास है। जरदोजी कारीगर कच्चा माल और धागा लखनऊ से लाते हैं और हाथ व मशीनों से रेशमी धागे से कढ़ाई करके वापस देते हैं। इसके बाद लखनऊ से बड़े व्यापारी खरीदारी करके विदेशों में भेजते हैं।
शहर में संचालित कॉमन फैसिलिटी सेंटर की संचालिका जाहिरा और मियागंज सेंटर की सरोजनी का कहना है कि रेशम का ज्यादातर धागा इरान से आता था। युद्ध के कारण वहां से नहीं आ पा रहा है। बताया कि युद्ध से एक किलो रेशम का धागा 160 रुपये में मिल जाता था। अब उसके लिए 300 रुपये देने पड़ रहे हैं। बताया कि एक परिधान तैयार करने में 100 से 300 ग्राम रेशम का धागा प्रयोग होता है। बताया कि एक तरफ कीमत ज्यादा देनी पड़ रही है, दूसरी ओर तैयार माल के सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं। इससे कारीगरों की परेशानी बढ़ गई है।
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जनपद में शहर के अलावा मियागंज क्षेत्र में जरदोजी का काम बहुतायत होता है। इस व्यवसाय से करीब 42 हजार लोग जुड़े हैं। इसमें महिलाओं की संख्या करीब 25 हजार के आसपास है। जरदोजी कारीगर कच्चा माल और धागा लखनऊ से लाते हैं और हाथ व मशीनों से रेशमी धागे से कढ़ाई करके वापस देते हैं। इसके बाद लखनऊ से बड़े व्यापारी खरीदारी करके विदेशों में भेजते हैं।
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शहर में संचालित कॉमन फैसिलिटी सेंटर की संचालिका जाहिरा और मियागंज सेंटर की सरोजनी का कहना है कि रेशम का ज्यादातर धागा इरान से आता था। युद्ध के कारण वहां से नहीं आ पा रहा है। बताया कि युद्ध से एक किलो रेशम का धागा 160 रुपये में मिल जाता था। अब उसके लिए 300 रुपये देने पड़ रहे हैं। बताया कि एक परिधान तैयार करने में 100 से 300 ग्राम रेशम का धागा प्रयोग होता है। बताया कि एक तरफ कीमत ज्यादा देनी पड़ रही है, दूसरी ओर तैयार माल के सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं। इससे कारीगरों की परेशानी बढ़ गई है।
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