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Unnao News: भाषण प्रतियोगिता में निखिल प्रथम और आंचल को दूसरा स्थान
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फोटो-12- प्रतियोगिता में भाषण देते निखिल। स्रोत: शिक्षक
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बेहटामुजावर। रसूलपुर रूरी गांव स्थित श्रीविश्वंभर दयालु त्रिपाठी राजकीय महाविद्यालय में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। मां सरस्वती के पूजन के बाद छात्रों के लिए भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। भाषण प्रतियोगिता में निखिल कुमार ने प्रथम, आंचल सिंह ने द्वितीय और प्रकृति मिश्रा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
कार्यक्रम में बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष व सुभाष इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार शुक्ल ने मां सरस्वती का पूजन किया। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और महाकवि पं. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। शैलेंद्र कुमार शुक्ल ने कहा कि नेताजी का मानना था कि स्वतंत्रता संघर्ष और बलिदान से मिलती है, न कि भीख मांगने से। इसी विचार के साथ उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन किया था।
सेनानी परिवार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अनुभव शुक्ल ने जनपद के प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों जैसे राजा राव राम बख्श सिंह, बाबू छोटेलाल, पं. शिवनारायण मिश्र, ठाकुर जगदीश सिंह, पं. विश्वंभर दयालु त्रिपाठी, साहब लाल द्विवेदी और पं. गया प्रसाद शुक्ल के योगदान पर प्रकाश डाला।
प्राचार्य डॉ. कृष्णकांत दुबे ने महाकवि पं. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के साहित्यिक योगदान की सराहना की। कहा कि निरालाजी केवल कवि ही नहीं बल्कि श्रेष्ठ गद्यकार, उपन्यासकार, निबंधकार और क्रांतिकारी विचारक भी थे। उन्होंने साहित्य को रूढ़ियों से मुक्त कर नई चेतना प्रदान की।
इस अवसर पर अमित कुमार, डॉ. नलिन कुमार सिंह, डॉ. नवनीत कौर, डॉ. मनीषा वाजपेयी और डॉ. रजनीश कुमार सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम में बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष व सुभाष इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार शुक्ल ने मां सरस्वती का पूजन किया। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और महाकवि पं. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। शैलेंद्र कुमार शुक्ल ने कहा कि नेताजी का मानना था कि स्वतंत्रता संघर्ष और बलिदान से मिलती है, न कि भीख मांगने से। इसी विचार के साथ उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन किया था।
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सेनानी परिवार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अनुभव शुक्ल ने जनपद के प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों जैसे राजा राव राम बख्श सिंह, बाबू छोटेलाल, पं. शिवनारायण मिश्र, ठाकुर जगदीश सिंह, पं. विश्वंभर दयालु त्रिपाठी, साहब लाल द्विवेदी और पं. गया प्रसाद शुक्ल के योगदान पर प्रकाश डाला।
प्राचार्य डॉ. कृष्णकांत दुबे ने महाकवि पं. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के साहित्यिक योगदान की सराहना की। कहा कि निरालाजी केवल कवि ही नहीं बल्कि श्रेष्ठ गद्यकार, उपन्यासकार, निबंधकार और क्रांतिकारी विचारक भी थे। उन्होंने साहित्य को रूढ़ियों से मुक्त कर नई चेतना प्रदान की।
इस अवसर पर अमित कुमार, डॉ. नलिन कुमार सिंह, डॉ. नवनीत कौर, डॉ. मनीषा वाजपेयी और डॉ. रजनीश कुमार सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे।
