{"_id":"69fa452bc34018066507a8bc","slug":"unnao-news-unnao-news-c-221-1-sknp1055-149916-2026-05-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Unnao News: आबकारी टीम पर हमले के चार आरोपी दोषमुक्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Unnao News: आबकारी टीम पर हमले के चार आरोपी दोषमुक्त
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उन्नाव। आबकारी टीम पर हमला करने के आरोपियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सका। इस पर न्यायाधीश ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलील व साक्ष्यों के आधार पर सभी चार आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। न्यायालय ने सभी आरोपियों के जमानतनामा व बंधपत्र निरस्त करने के आदेश दिए हैं। वहीं मामले में चार आरोपियों की मुकदमा विचारणीय होने के दौरान मृत्यु हो चुकी है।
सफीपुर के तत्कालीन आबकारी निरीक्षक आनंद प्रकाश को आठ मई 2002 को उन्हें क्षेत्र के दहन गांव में अवैध रूप से ताड़ी निकालने की सूचना मिली थी। इस पर वह हमराह सिपाहियों के साथ ताड़ के पेड़ों के हत्थे काटने वाले कारीगर मुन्ना को लेकर गांव पहुंचे और अवैध ताड़ के पत्तों के हत्थे कटवाने लगे। जब कारीगर मुन्ना पेड़ के ऊपर चढ़कर हत्था काटने लगा। तभी एक मिट्टी का बर्तन नीचे फेंका जो वहां खड़े किशोर के सिर पर गिर गई। इससे उसके सिर से खून बहने लगा। यह देखकर वहां मौजूद गांव के कमलेश, मथुरा, रूपलाल, मुन्ना, चुन्नीलाल, रामभरोसे, लालाराम, अंतू आक्रोशित होकर कारीगर मुन्ना को पीटने लगे। आरोप है कि घर में रखे असलहे मंगवा लिए और फायरिंग भी कर दी। पुलिस ने आबकारी निरीक्षक की तहरीर के आधार पर सभी के खिलाफ दंगा, सरकारी कार्य में बाधा डालने समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। मुकदमे के विवेचक ने दोषियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य इकट्ठा कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। करीब 24 साल से मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन था। मुकदमे की अंतिम सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। इस पर न्यायाधीश पवन कुमार सिंह ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलील व साक्ष्यों के आधार पर लालराम, रूपलाल, रामभरोसे व मथुरा को दोषमुक्त करार दिया है।
इंसेट-1
गुडवर्क दिखाने को दर्ज कराई थी रिपोर्ट
न्यायालय में सुनवाई के दौरान जब आरोपियों से पूछा गया कि उनके खिलाफ आबकारी निरीक्षक ने रिपोर्ट क्यों दर्ज कराई है तो उन्होंने बताया कि रिपोर्ट रंजिशन दर्ज कराई गई। इसके पीछे का उद्देश्य विभागीय अधिकारियों द्वारा गुडवर्क दिखाना था।
विज्ञापन
इंसेट-2
चार आरोपियों की हो चुकी है मौत
24 साल पहले पुलिस ने आबकारी टीम पर हमला करने के आरोप में जिन अन्य चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। वह फैसले का दिन नहीं देख सके। आरोपी कमलेश, मथुरा, मुन्ना व चुन्नीलाल की मुकदमा के दौरान मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
सफीपुर के तत्कालीन आबकारी निरीक्षक आनंद प्रकाश को आठ मई 2002 को उन्हें क्षेत्र के दहन गांव में अवैध रूप से ताड़ी निकालने की सूचना मिली थी। इस पर वह हमराह सिपाहियों के साथ ताड़ के पेड़ों के हत्थे काटने वाले कारीगर मुन्ना को लेकर गांव पहुंचे और अवैध ताड़ के पत्तों के हत्थे कटवाने लगे। जब कारीगर मुन्ना पेड़ के ऊपर चढ़कर हत्था काटने लगा। तभी एक मिट्टी का बर्तन नीचे फेंका जो वहां खड़े किशोर के सिर पर गिर गई। इससे उसके सिर से खून बहने लगा। यह देखकर वहां मौजूद गांव के कमलेश, मथुरा, रूपलाल, मुन्ना, चुन्नीलाल, रामभरोसे, लालाराम, अंतू आक्रोशित होकर कारीगर मुन्ना को पीटने लगे। आरोप है कि घर में रखे असलहे मंगवा लिए और फायरिंग भी कर दी। पुलिस ने आबकारी निरीक्षक की तहरीर के आधार पर सभी के खिलाफ दंगा, सरकारी कार्य में बाधा डालने समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। मुकदमे के विवेचक ने दोषियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य इकट्ठा कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। करीब 24 साल से मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन था। मुकदमे की अंतिम सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। इस पर न्यायाधीश पवन कुमार सिंह ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलील व साक्ष्यों के आधार पर लालराम, रूपलाल, रामभरोसे व मथुरा को दोषमुक्त करार दिया है।
विज्ञापन
इंसेट-1
गुडवर्क दिखाने को दर्ज कराई थी रिपोर्ट
न्यायालय में सुनवाई के दौरान जब आरोपियों से पूछा गया कि उनके खिलाफ आबकारी निरीक्षक ने रिपोर्ट क्यों दर्ज कराई है तो उन्होंने बताया कि रिपोर्ट रंजिशन दर्ज कराई गई। इसके पीछे का उद्देश्य विभागीय अधिकारियों द्वारा गुडवर्क दिखाना था।
विज्ञापन
इंसेट-2
चार आरोपियों की हो चुकी है मौत
24 साल पहले पुलिस ने आबकारी टीम पर हमला करने के आरोप में जिन अन्य चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। वह फैसले का दिन नहीं देख सके। आरोपी कमलेश, मथुरा, मुन्ना व चुन्नीलाल की मुकदमा के दौरान मौत हो चुकी है।