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Unnao News: भुगतान अटकने की सजा भुगत रहे 18 लाख लोग
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फोटो-17-परियर गांव के बाहर लगे हैंडपंप से पानी भरते लोग व रखे डिब्बे। संवाद
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उन्नाव। जल जीवन मिशन योजना से 18 लाख ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की परियोजना अटक गई है। इस साल 26 जनवरी तक पूरी होने वाली योजना के अब तक कराए गए कार्य का 23 माह से भुगतान नहीं हुआ है। इस कारण कार्यदायी संस्था ने काम बंद कर दिया है। उधर, 31 साल पहले स्थापित 72 पेयजल ट्यूबवेलों और टंकियों की मियाद पूरी होने के बाद 41 ठप हो गई हैं। इससे जलसंकट और गहरा गया है। कोई हैंडपंप पर लाइन लगा रहा है तो कोई साइकिल, बाइक से एक किलोमीटर की दूरी से पानी ला रहा है।
केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन (फेज-4) के तहत सतही स्रोत आधारित ग्राम समूह पेयजल योजना के जरिए 26 जनवरी 2026 तक 1037 ग्राम पंचायतों की करीब 18 लाख की आबादी को नल से जल उपलब्ध कराने की समयसीमा तय की गई थी। इसका काम मेसर्स मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी कर रही थी। फर्म ने अक्तूबर 2024 को 40 फीसदी काम करने के बाद भुगतान के लिए 321 करोड़ के बिल जल निगम के माध्यम से पोर्टल पर अपलोड कराए। केंद्र सरकार ने भुगतान नहीं किया गया तो संस्था ने काम से हाथ खींचने शुरू कर दिए। अब काम पूरी तरह ठप हो गया है। इससे लोगों को इस साल शुद्ध पानी मिलने की उम्मीद भी धूमिल हो गई है।
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बंद हो चुकी हैं 41 पुरानी टंकियां
ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 1995 में जिले की 72 ग्राम पंचायतों में पेयजल ट्यूबवेल और टंकियां स्थापित कराई गई थीं। जल निगम ने आसपास गांवों तक भूमिगत पाइप लाइनें बिछाकर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की थी। वर्तमान में करीब 41 टंकियां बंद चल रही हैं। जल निगम के तकनीकी अधिकारियों के अनुसार एक पेयजल योजना की मियाद 15 से 20 साल होती है। ग्रामीण पेयजल योजनाएं समय सीमा पूरी कर चुकी हैं। पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कुछ की मोटर खराब हुई तो किसी की बोरिंग चोक हो गई। मरम्मत के अभाव में यह पेयजल योजनाएं जलापूर्ति नहीं कर पा रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पानी नहीं मिल रहा हैं। लोग दूरदराज स्थानों के उन हैंडपंपों से पानी लाकर प्यास बुझा रहे हैं जिनका पानी पीने लायक है। इसके अलावा जिन लोगों के यहां आरओ प्लांट लगा हुआ है वहां से पानी ला रहे हैं।
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-- - परियर में 500 मीटर दूर से लाते हैं पानी
सदर तहसील के गांव परियर की आबादी करीब तीन हजार है। गांव के अंदर लगे छह हैंडपंपों का पानी खराब है। यहां पर जल जीवन मिशन से पानी की टंकी निर्माण शुरू हुआ था लेकिन वर्तमान में काम बंद है। गांव के बाहर करीब 500 मीटर दूर लगे हैंडपंप का पानी सही होने से ग्रामीण वहीं से साइकिल, बाइक व अन्य साधनों से भरकर लाते हैं।
टैंकर से बुझती है ढाई हजार लोगों की प्यास बीघापुर तहसील क्षेत्र के गांव सांझामऊ का पानी खारा है। यहां लगे इंडिया मार्का हैंडपंप का पानी पीने योग्य नहीं है। इससे करीब ढाई हजार की आबादी परेशान है। गांव के अभय यादव, देवा और सतीश ने बताया कि गांव के नजदीक स्थित आश्रम से पानी के टैंकर सुबह और शाम गांव आते हैं। टैंकर आते ही लोगों की पानी के लिए भीड़ लग जाती है। गांव में अभी जल जीवन मिशन का कोई काम नहीं हुआ है।
योजना एक नजर में
कुल लागत-5.4 अरब, भुगतान लंबित-3.21 अरब
ग्राम पंचायत-1037, कुल आबादी-18 लाख, कुल घर-6.11 लाख
पाइप लाइन प्रस्तावित-12,823 किलोमीटर, अब तक 6,787 किलोमीटर का काम पूरा हुआ
कुल ओवरहेड टैंक व टंकियां-443-निर्माण कार्य शुरू हो पाया-394, पूरा एक का भी नहीं
वर्जन....कार्यदायी संस्था ने भुगतान लंबित होने से काम बंद कर दिया है। यह स्थिति प्रदेश के कई जनपदों की है। विभाग की ओर से भुगतान के लिए कई बार पत्राचार किया जा चुका है। भुगतान तो जारी नहीं हुआ है लेकिन समयावधि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2027 कर दी गई है। -अजीत कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम (ग्रामीण)।
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केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन (फेज-4) के तहत सतही स्रोत आधारित ग्राम समूह पेयजल योजना के जरिए 26 जनवरी 2026 तक 1037 ग्राम पंचायतों की करीब 18 लाख की आबादी को नल से जल उपलब्ध कराने की समयसीमा तय की गई थी। इसका काम मेसर्स मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी कर रही थी। फर्म ने अक्तूबर 2024 को 40 फीसदी काम करने के बाद भुगतान के लिए 321 करोड़ के बिल जल निगम के माध्यम से पोर्टल पर अपलोड कराए। केंद्र सरकार ने भुगतान नहीं किया गया तो संस्था ने काम से हाथ खींचने शुरू कर दिए। अब काम पूरी तरह ठप हो गया है। इससे लोगों को इस साल शुद्ध पानी मिलने की उम्मीद भी धूमिल हो गई है।
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बंद हो चुकी हैं 41 पुरानी टंकियां
ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 1995 में जिले की 72 ग्राम पंचायतों में पेयजल ट्यूबवेल और टंकियां स्थापित कराई गई थीं। जल निगम ने आसपास गांवों तक भूमिगत पाइप लाइनें बिछाकर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की थी। वर्तमान में करीब 41 टंकियां बंद चल रही हैं। जल निगम के तकनीकी अधिकारियों के अनुसार एक पेयजल योजना की मियाद 15 से 20 साल होती है। ग्रामीण पेयजल योजनाएं समय सीमा पूरी कर चुकी हैं। पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कुछ की मोटर खराब हुई तो किसी की बोरिंग चोक हो गई। मरम्मत के अभाव में यह पेयजल योजनाएं जलापूर्ति नहीं कर पा रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पानी नहीं मिल रहा हैं। लोग दूरदराज स्थानों के उन हैंडपंपों से पानी लाकर प्यास बुझा रहे हैं जिनका पानी पीने लायक है। इसके अलावा जिन लोगों के यहां आरओ प्लांट लगा हुआ है वहां से पानी ला रहे हैं।
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सदर तहसील के गांव परियर की आबादी करीब तीन हजार है। गांव के अंदर लगे छह हैंडपंपों का पानी खराब है। यहां पर जल जीवन मिशन से पानी की टंकी निर्माण शुरू हुआ था लेकिन वर्तमान में काम बंद है। गांव के बाहर करीब 500 मीटर दूर लगे हैंडपंप का पानी सही होने से ग्रामीण वहीं से साइकिल, बाइक व अन्य साधनों से भरकर लाते हैं।
टैंकर से बुझती है ढाई हजार लोगों की प्यास बीघापुर तहसील क्षेत्र के गांव सांझामऊ का पानी खारा है। यहां लगे इंडिया मार्का हैंडपंप का पानी पीने योग्य नहीं है। इससे करीब ढाई हजार की आबादी परेशान है। गांव के अभय यादव, देवा और सतीश ने बताया कि गांव के नजदीक स्थित आश्रम से पानी के टैंकर सुबह और शाम गांव आते हैं। टैंकर आते ही लोगों की पानी के लिए भीड़ लग जाती है। गांव में अभी जल जीवन मिशन का कोई काम नहीं हुआ है।
योजना एक नजर में
कुल लागत-5.4 अरब, भुगतान लंबित-3.21 अरब
ग्राम पंचायत-1037, कुल आबादी-18 लाख, कुल घर-6.11 लाख
पाइप लाइन प्रस्तावित-12,823 किलोमीटर, अब तक 6,787 किलोमीटर का काम पूरा हुआ
कुल ओवरहेड टैंक व टंकियां-443-निर्माण कार्य शुरू हो पाया-394, पूरा एक का भी नहीं
वर्जन....कार्यदायी संस्था ने भुगतान लंबित होने से काम बंद कर दिया है। यह स्थिति प्रदेश के कई जनपदों की है। विभाग की ओर से भुगतान के लिए कई बार पत्राचार किया जा चुका है। भुगतान तो जारी नहीं हुआ है लेकिन समयावधि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2027 कर दी गई है। -अजीत कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम (ग्रामीण)।

फोटो-17-परियर गांव के बाहर लगे हैंडपंप से पानी भरते लोग व रखे डिब्बे। संवाद

फोटो-17-परियर गांव के बाहर लगे हैंडपंप से पानी भरते लोग व रखे डिब्बे। संवाद

फोटो-17-परियर गांव के बाहर लगे हैंडपंप से पानी भरते लोग व रखे डिब्बे। संवाद