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Unnao News: ग्राम पंचायतों की समितियां भंग, प्रधान बने प्रशासक
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उन्नाव। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा होते ही मंगलवार की रात ग्राम पंचायत (वार्ड सदस्यों) की छह समितियां भंग हो गईं और प्रधान प्रशासक बन गए। अब प्रधान पिछली कार्ययोजना में प्रस्तावित कार्य ही करा सकेंगे। नए कार्यों के लिए डीएम की अनुमति लेनी होगी।
जिले में ग्राम पंचायतों की संख्या 1037 है। यहां पर निर्वाचित प्रधानों का कार्यकाल 26 मई यानी मंगलवार की रात 12 बजे से पूरा गया। इसके साथ ही पंचायतों में गठित छह समितियां भंग हो गईं और प्रधान गांवों के प्रशासक बन गए। पहले ग्राम पंचायत द्वारा ही गांव के विकास की कार्ययोजना स्वीकृत की जाती थी। प्रशासक व्यवस्था में पंचायत का यह अधिकार निष्क्रिय कर दिया जाता है। ऐसे में प्रशासक बनने के बाद अब प्रधान नई कार्ययोजना को स्वीकृत नहीं कर पाएंगे। नए वित्तीय वर्ष 2026-27 को लेकर मार्च में ही कार्ययोजना तैयार कर ली गई थी। प्रधान उसी कार्ययोजना में शामिल ही कार्य करा पाएंगे। यदि बीच में जरूरी कोई विशेष कार्य कराना चाहेंगे तो उसके लिए डीएम की अनुमति लेनी होगी।
इंसेट-1
पिछले कार्यकाल में एडीओ पंचायत बनाए गए थे प्रशासक
पिछले कार्यकाल में प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर 2020 की रात पूरा हो गया था। प्रधानों के डोंगल वापस ले लिए गए थे। साथ ही एडीओ पंचायत को प्रशासक के रूप में तैनात कर दिया गया था। इसके बाद चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई थी। 26 मई 2021 प्रधानों के शपथग्रहण तक एडीओ पंचायत ही प्रशासक के रूप में काम करते रहे थे।
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इंसेट-2
यह मुख्य समितियां हुईं भंग
प्रशासनिक, नियोजन एवं विकास, निर्माण कार्य, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याण, जल प्रबंधन।
इंसेट-3
एक माह में 42.42 करोड़ खर्च, अभी भी पांच करोड़ शेष
पंचायतीराज विभाग के सूत्रों के मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया की संभावनाएं धूमिल होते देख प्रधानों ने ग्राम निधि खाते में केंद्रीय व राज्य वित्त से एक माह में 42.42 करोड़ का भुगतान कराया है। वहीं अभी भी खाते में करीब पांच करोड़ शेष हैं। नया बजट भी जारी नहीं हुआ है। ऐसे में फिलहाल शेष बची धनराशि से कार्ययोजना में शामिल कुछ कार्य ही कराए जा सकेंगे।
फोटो-27-शैलेश यादव
प्रशासक बनाना शासन का उचित कदम
अखिल भारतीय प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष शैलेश यादव ने बताया कि प्रधान को ही प्रशासक बनाया जाना शासन का उचित कदम है। इससे जब तक चुनाव नहीं होंगे तब तक उन्हें पुनः आगे कार्य करने का अवसर मिल गया है। इससे वह गांव में और कार्य करा सकेंगे।
फोटो-28-रिजवान अहमद
प्रशासक बनाए का निर्णय सराहनीय
अखिल भारतीय प्रधान संघ के उपाध्यक्ष रिजवान अहमद ने बताया कि बहुत सारे कार्य कराए हैं। कई अन्य कार्ययोजनाएं ग्राम पंचायत से स्वीकृत हैं। ऐसे में जो प्रस्ताव शामिल किए थे, उनको कराने का अवसर उन्हें ही मिलेगा। कार्यों को अपने कार्यकाल में ही पूर्ण करा सकेंगे। प्रशासक बनाने का निर्णय सराहनीय है।
वर्जन...
शासनादेश के आधार पर प्रधान ही ग्राम पंचायत के प्रशासक बना दिए गए हैं। प्रशासक अवधि में प्रधान नई कार्ययोजना पास नहीं कर पाएंगे। इसके लिए वह विभाग में प्रस्ताव भेजेंगे, फिर उसे डीएम स्वीकृति देंगे। -आलोक सिन्हा, डीपीआरओ।
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जिले में ग्राम पंचायतों की संख्या 1037 है। यहां पर निर्वाचित प्रधानों का कार्यकाल 26 मई यानी मंगलवार की रात 12 बजे से पूरा गया। इसके साथ ही पंचायतों में गठित छह समितियां भंग हो गईं और प्रधान गांवों के प्रशासक बन गए। पहले ग्राम पंचायत द्वारा ही गांव के विकास की कार्ययोजना स्वीकृत की जाती थी। प्रशासक व्यवस्था में पंचायत का यह अधिकार निष्क्रिय कर दिया जाता है। ऐसे में प्रशासक बनने के बाद अब प्रधान नई कार्ययोजना को स्वीकृत नहीं कर पाएंगे। नए वित्तीय वर्ष 2026-27 को लेकर मार्च में ही कार्ययोजना तैयार कर ली गई थी। प्रधान उसी कार्ययोजना में शामिल ही कार्य करा पाएंगे। यदि बीच में जरूरी कोई विशेष कार्य कराना चाहेंगे तो उसके लिए डीएम की अनुमति लेनी होगी।
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इंसेट-1
पिछले कार्यकाल में एडीओ पंचायत बनाए गए थे प्रशासक
पिछले कार्यकाल में प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर 2020 की रात पूरा हो गया था। प्रधानों के डोंगल वापस ले लिए गए थे। साथ ही एडीओ पंचायत को प्रशासक के रूप में तैनात कर दिया गया था। इसके बाद चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई थी। 26 मई 2021 प्रधानों के शपथग्रहण तक एडीओ पंचायत ही प्रशासक के रूप में काम करते रहे थे।
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इंसेट-2
यह मुख्य समितियां हुईं भंग
प्रशासनिक, नियोजन एवं विकास, निर्माण कार्य, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याण, जल प्रबंधन।
इंसेट-3
एक माह में 42.42 करोड़ खर्च, अभी भी पांच करोड़ शेष
पंचायतीराज विभाग के सूत्रों के मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया की संभावनाएं धूमिल होते देख प्रधानों ने ग्राम निधि खाते में केंद्रीय व राज्य वित्त से एक माह में 42.42 करोड़ का भुगतान कराया है। वहीं अभी भी खाते में करीब पांच करोड़ शेष हैं। नया बजट भी जारी नहीं हुआ है। ऐसे में फिलहाल शेष बची धनराशि से कार्ययोजना में शामिल कुछ कार्य ही कराए जा सकेंगे।
फोटो-27-शैलेश यादव
प्रशासक बनाना शासन का उचित कदम
अखिल भारतीय प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष शैलेश यादव ने बताया कि प्रधान को ही प्रशासक बनाया जाना शासन का उचित कदम है। इससे जब तक चुनाव नहीं होंगे तब तक उन्हें पुनः आगे कार्य करने का अवसर मिल गया है। इससे वह गांव में और कार्य करा सकेंगे।
फोटो-28-रिजवान अहमद
प्रशासक बनाए का निर्णय सराहनीय
अखिल भारतीय प्रधान संघ के उपाध्यक्ष रिजवान अहमद ने बताया कि बहुत सारे कार्य कराए हैं। कई अन्य कार्ययोजनाएं ग्राम पंचायत से स्वीकृत हैं। ऐसे में जो प्रस्ताव शामिल किए थे, उनको कराने का अवसर उन्हें ही मिलेगा। कार्यों को अपने कार्यकाल में ही पूर्ण करा सकेंगे। प्रशासक बनाने का निर्णय सराहनीय है।
वर्जन...
शासनादेश के आधार पर प्रधान ही ग्राम पंचायत के प्रशासक बना दिए गए हैं। प्रशासक अवधि में प्रधान नई कार्ययोजना पास नहीं कर पाएंगे। इसके लिए वह विभाग में प्रस्ताव भेजेंगे, फिर उसे डीएम स्वीकृति देंगे। -आलोक सिन्हा, डीपीआरओ।