{"_id":"6a1c84fd5256ed7ca908c519","slug":"unnao-news-unnao-news-c-221-1-sknp1055-151417-2026-06-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Unnao News: प्राथमिक उपचार कर थमा देते हैं रेफर का पर्चा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Unnao News: प्राथमिक उपचार कर थमा देते हैं रेफर का पर्चा
विज्ञापन
फोटो-7- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अचलगंज का भवन। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अचलगंज। उन्नाव-लालगंज राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित अचलगंज सीएचसी में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी है। इतना ही नहीं यहां जांच सुविधाएं भी नहीं है। इससे हाईवे पर होने वाले हादसों के घायलों के पहुंचने पर प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है।
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे जल्द शुरू होने वाला है। इसके शुरुआती हिस्से में लगभग 30 किलोमीटर के दायरे में सबसे नजदीक यही अस्पताल है। लगभग तीन लाख की आबादी के लिए भी मात्र यही सीएचसी है। हाईवे पर होने वाली दुर्घटना के अलावा ग्रामीण इलाकों के आकस्मिक मरीज इसी अस्पताल में आते हैं लेकिन यहां सुविधाओं, डॉक्टरों व स्टाफ के अभाव के चलते समुचित इलाज नहीं मिल पाता है। प्राथमिक उपचार के बाद घायलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। कई बार समुचित उपचार में हुई देरी से घायलों की जान पर बन आती हैं।
बेड की संख्या बढ़ाने और ट्राॅमा सेंटर बनाने की मांग
हाईवे पर आए दिन होने वाले हादसों को देखते हुए सीएचसी को ट्रामा सेंटर के रूप में विकसित किए जाने की मांग कई बार की जा चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जबकि हाइवे होने व ग्रामीण क्षेत्र के लिए नजदीकी को देखते हुए अस्पताल में बेहतरीन आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था का होना आवश्यक है।
विज्ञापन
अस्पताल में नहीं अस्थि रोग विशेषज्ञ की तैनाती
सीएचसी में अस्थि रोग विशेषज्ञ, जनरल सर्जन, ईएनटी, एनेस्थीसिया जैसे डॉक्टरों की तैनाती नहीं है। फ्रैक्चर होने या फिर कान, नाक या मुंह से खून आने वाले मरीजों को समुचित इलाज देने वाले विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से मरीजों को रेफर करना मजबूरी है। सही मायने में दुर्घटना में घायल मरीजों के समुचित इलाज की यहां कोई व्यवस्था नहीं है।
--
जांच की व्यवस्थाएं भी है बदहाल
अस्पताल में जांच की व्यवस्था बदहाल है। यहां हेल्थ एटीएम तो है लेकिन अधिकांश दिन जांच स्ट्रिप उपलब्ध नहीं रहती। इससे जरूरी जांच की सुविधा समय पर नहीं मिल पाती। मरीजों को निजी पैथोलॉजी का सहारा लेना पड़ता है। एक्सरे मशीन तो है लेकिन फिल्म नहीं है। मरीज के मोबाइल पर ही प्रिंट वाट्सअप किया जाता है।
दूरी तय करने में घायलों की बिगड़ जाती है स्थिति
-सीएचसी से जिला अस्पताल की दूरी करीब 15 किमी है। मरीज को यहां से जिला अस्पताल पहुंचाने में करीब आधे घंटे का समय लगता है। कई बार सीएचसी से जिला अस्पताल भेजे गए घायलों को कानपुर हैलट रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में रेफर करने की कार्रवाई और कानपुर तक पहुंचने में एक से दो घंटे का अतिरिक्त समय लग जाता है। जो मरीज के लिए जानलेवा भी बन सकता है।
इन सुविधाओं का किया जाता है दावा
सीएचसी में 24 घंटे इमरजेंसी सेवा उपलब्ध, वार्ड में ऑक्सीजन, नेबुलाइजर, सक्शन मशीन, मॉनिटर और ईसीजी मशीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। मरीजों के लिए स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और इमरजेंसी बेड भी मौजूद हैं। जीवन रक्षक दवाएं व जरूरी इंजेक्शन भी अस्पताल में उपलब्ध होने का दावा है।
वर्जन....
अस्पताल में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की कमी है। 27 मई को सीएचसी प्रभारियों की मीटिंग में मांग की गई थी। इसके अलावा भी कई बार मीटिंग में मुद्दा उठाया जा चुका है लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। स्टाफ और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता।-डाॅ. मनीष बाजपेई, चिकित्साधिकारी सीएचसी।
फोटो-8-राजन शुक्ल
सीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की हो तैनाती
अचलगंज के राजन शुक्ल ने बताया कि सीएचसी में अस्थि रोग व न्यूरो के डॉक्टर की तैनाती जरूरी है। सड़क हादसों में मामूली फ्रैक्चर होने पर विशेषज्ञ न होने के चलते घायलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती कर इस अस्पताल को उच्चीकृत करते हुए सौ बेड का अस्पताल बनाया जाए।
फोटो-9-अखिल गुप्ता
नाम का है अस्पताल
अखिल गुप्ता ने बताया कि यह सरकारी अस्पताल सिर्फ नाम का है। यहां आने वाले मरीजों को न तो जरूरत के अनुसार डॉक्टर मिलते हैं और न ही आवश्यक जांचें हो पाती हैं। अस्थि रोग विशेषज्ञ न होने से उपचार के लिए निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती हैं। या फिर जिला अस्पताल तक दौड़ लगाना पड़ता है।
विज्ञापन
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे जल्द शुरू होने वाला है। इसके शुरुआती हिस्से में लगभग 30 किलोमीटर के दायरे में सबसे नजदीक यही अस्पताल है। लगभग तीन लाख की आबादी के लिए भी मात्र यही सीएचसी है। हाईवे पर होने वाली दुर्घटना के अलावा ग्रामीण इलाकों के आकस्मिक मरीज इसी अस्पताल में आते हैं लेकिन यहां सुविधाओं, डॉक्टरों व स्टाफ के अभाव के चलते समुचित इलाज नहीं मिल पाता है। प्राथमिक उपचार के बाद घायलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। कई बार समुचित उपचार में हुई देरी से घायलों की जान पर बन आती हैं।
विज्ञापन
बेड की संख्या बढ़ाने और ट्राॅमा सेंटर बनाने की मांग
हाईवे पर आए दिन होने वाले हादसों को देखते हुए सीएचसी को ट्रामा सेंटर के रूप में विकसित किए जाने की मांग कई बार की जा चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जबकि हाइवे होने व ग्रामीण क्षेत्र के लिए नजदीकी को देखते हुए अस्पताल में बेहतरीन आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था का होना आवश्यक है।
विज्ञापन
अस्पताल में नहीं अस्थि रोग विशेषज्ञ की तैनाती
सीएचसी में अस्थि रोग विशेषज्ञ, जनरल सर्जन, ईएनटी, एनेस्थीसिया जैसे डॉक्टरों की तैनाती नहीं है। फ्रैक्चर होने या फिर कान, नाक या मुंह से खून आने वाले मरीजों को समुचित इलाज देने वाले विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से मरीजों को रेफर करना मजबूरी है। सही मायने में दुर्घटना में घायल मरीजों के समुचित इलाज की यहां कोई व्यवस्था नहीं है।
जांच की व्यवस्थाएं भी है बदहाल
अस्पताल में जांच की व्यवस्था बदहाल है। यहां हेल्थ एटीएम तो है लेकिन अधिकांश दिन जांच स्ट्रिप उपलब्ध नहीं रहती। इससे जरूरी जांच की सुविधा समय पर नहीं मिल पाती। मरीजों को निजी पैथोलॉजी का सहारा लेना पड़ता है। एक्सरे मशीन तो है लेकिन फिल्म नहीं है। मरीज के मोबाइल पर ही प्रिंट वाट्सअप किया जाता है।
दूरी तय करने में घायलों की बिगड़ जाती है स्थिति
-सीएचसी से जिला अस्पताल की दूरी करीब 15 किमी है। मरीज को यहां से जिला अस्पताल पहुंचाने में करीब आधे घंटे का समय लगता है। कई बार सीएचसी से जिला अस्पताल भेजे गए घायलों को कानपुर हैलट रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में रेफर करने की कार्रवाई और कानपुर तक पहुंचने में एक से दो घंटे का अतिरिक्त समय लग जाता है। जो मरीज के लिए जानलेवा भी बन सकता है।
इन सुविधाओं का किया जाता है दावा
सीएचसी में 24 घंटे इमरजेंसी सेवा उपलब्ध, वार्ड में ऑक्सीजन, नेबुलाइजर, सक्शन मशीन, मॉनिटर और ईसीजी मशीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। मरीजों के लिए स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और इमरजेंसी बेड भी मौजूद हैं। जीवन रक्षक दवाएं व जरूरी इंजेक्शन भी अस्पताल में उपलब्ध होने का दावा है।
वर्जन....
अस्पताल में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की कमी है। 27 मई को सीएचसी प्रभारियों की मीटिंग में मांग की गई थी। इसके अलावा भी कई बार मीटिंग में मुद्दा उठाया जा चुका है लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। स्टाफ और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता।-डाॅ. मनीष बाजपेई, चिकित्साधिकारी सीएचसी।
फोटो-8-राजन शुक्ल
सीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की हो तैनाती
अचलगंज के राजन शुक्ल ने बताया कि सीएचसी में अस्थि रोग व न्यूरो के डॉक्टर की तैनाती जरूरी है। सड़क हादसों में मामूली फ्रैक्चर होने पर विशेषज्ञ न होने के चलते घायलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती कर इस अस्पताल को उच्चीकृत करते हुए सौ बेड का अस्पताल बनाया जाए।
फोटो-9-अखिल गुप्ता
नाम का है अस्पताल
अखिल गुप्ता ने बताया कि यह सरकारी अस्पताल सिर्फ नाम का है। यहां आने वाले मरीजों को न तो जरूरत के अनुसार डॉक्टर मिलते हैं और न ही आवश्यक जांचें हो पाती हैं। अस्थि रोग विशेषज्ञ न होने से उपचार के लिए निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती हैं। या फिर जिला अस्पताल तक दौड़ लगाना पड़ता है।