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Unnao News: 100 बेड का अस्पताल... न डॉक्टर न स्टाफ
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मौरावां। कस्बे में 14 बीघे में बना 100 बेड का अस्पताल डॉक्टरों, स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। दुर्घटनाओं के घायलों और गंभीर मरीजों को यहां समुचित इलाज न मिल पाता है। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है।
भाजपा सरकार ने कस्बे के रामलीला मैदान के पास 100 बेड का अस्पताल बनाकर जनता को समर्पित किया गया था। इससे क्षेत्र की करीब 40 हजार आबादी में बेहतर सरकारी इलाज की आस जगी थी लेकिन जल्द की उनकी उम्मीद धूमिल हो गई। अस्पताल में सीटीस्कैन तो दूर मरीजों को एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की भी सुविधा नहीं मिल रही है। इसके लिए लोगों को उन्नाव, लखनऊ या कानपुर जाना पड़ता है या फिर निजी पैथोलॉजी की शरण लेनी पड़ रही है।
हड्डी के नहीं डॉक्टर, कौन करे घायलों का उपचार
अस्पताल में अस्थि रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने से दुर्घटना में घायलों के अलावा अस्थि रोग से ग्रसित सामान्य मरीजों का उपचार भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में उन्हें जिला अस्पताल या फिर लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में एक्सरे की भी सुविधा नहीं है। अस्पताल में सीएमएस सहित 11 डॉक्टरों की तैनाती है। स्त्री एवं प्रसूत रोग विशेषज्ञ, ईएनटी, फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट, दो एमबीबीएस ईएमओ, टीबी व चेस्ट स्पेशलिस्ट, जनरल सर्जन और अस्थि रोग विशेषज्ञ जैसे जरूरी डॉक्टरों की तैनाती नहीं है। इसके अलावा स्टाफ नर्स के स्वीकृत 36 पदों में मात्र तीन की तैनाती है।
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फोटो -5- डॉ. रवि नारायण अधौलिया
खामियां दूर करने के लिए उच्चाधिकारियों को भेजा है पत्र : सीएमएस
सीएमएस डॉ. रवि नारायण अधौलिया ने बताया कि डॉक्टरों, स्टाफ और संसाधनों की कमी दूर करने के लिए विभागीय उच्चाधिकारियों से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। अस्पताल में जो भी कमी हैं उन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
फोटो -6- दीपक राजपूत।
अस्पताल में मिलनीं चाहिए बेहतर सुविधाएं
कस्बे के दीपक राजपूत ने बताया कि 100 बेड अस्पताल खुलने पर लोगों में बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद थी लेकिन डॉक्टरों की कमी और व्यवस्थाओं के अभाव में यह अस्पताल जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा। खामियां दूर कर बेहतर उपचार की व्यवस्था करनी चाहिए।
फोटो -8-मनीष कुमार
अस्पताल में ऑपरेशन की मिले सुविधा
मनीष कुमार ने बताया कि सड़क दुर्घटना में हड्डी टूटने जैसी समस्या आम है लेकिन अस्पताल में न तो हड्डी के डॉक्टर हैं और न ही ऑपरेशन के जरूरी सामान। ऐसे में परिजनों को घायलों के उपचार के लिए लखनऊ कानपुर की दौड़ लगानी पड़ रही।
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भाजपा सरकार ने कस्बे के रामलीला मैदान के पास 100 बेड का अस्पताल बनाकर जनता को समर्पित किया गया था। इससे क्षेत्र की करीब 40 हजार आबादी में बेहतर सरकारी इलाज की आस जगी थी लेकिन जल्द की उनकी उम्मीद धूमिल हो गई। अस्पताल में सीटीस्कैन तो दूर मरीजों को एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की भी सुविधा नहीं मिल रही है। इसके लिए लोगों को उन्नाव, लखनऊ या कानपुर जाना पड़ता है या फिर निजी पैथोलॉजी की शरण लेनी पड़ रही है।
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हड्डी के नहीं डॉक्टर, कौन करे घायलों का उपचार
अस्पताल में अस्थि रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने से दुर्घटना में घायलों के अलावा अस्थि रोग से ग्रसित सामान्य मरीजों का उपचार भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में उन्हें जिला अस्पताल या फिर लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में एक्सरे की भी सुविधा नहीं है। अस्पताल में सीएमएस सहित 11 डॉक्टरों की तैनाती है। स्त्री एवं प्रसूत रोग विशेषज्ञ, ईएनटी, फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट, दो एमबीबीएस ईएमओ, टीबी व चेस्ट स्पेशलिस्ट, जनरल सर्जन और अस्थि रोग विशेषज्ञ जैसे जरूरी डॉक्टरों की तैनाती नहीं है। इसके अलावा स्टाफ नर्स के स्वीकृत 36 पदों में मात्र तीन की तैनाती है।
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फोटो -5- डॉ. रवि नारायण अधौलिया
खामियां दूर करने के लिए उच्चाधिकारियों को भेजा है पत्र : सीएमएस
सीएमएस डॉ. रवि नारायण अधौलिया ने बताया कि डॉक्टरों, स्टाफ और संसाधनों की कमी दूर करने के लिए विभागीय उच्चाधिकारियों से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। अस्पताल में जो भी कमी हैं उन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
फोटो -6- दीपक राजपूत।
अस्पताल में मिलनीं चाहिए बेहतर सुविधाएं
कस्बे के दीपक राजपूत ने बताया कि 100 बेड अस्पताल खुलने पर लोगों में बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद थी लेकिन डॉक्टरों की कमी और व्यवस्थाओं के अभाव में यह अस्पताल जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा। खामियां दूर कर बेहतर उपचार की व्यवस्था करनी चाहिए।
फोटो -8-मनीष कुमार
अस्पताल में ऑपरेशन की मिले सुविधा
मनीष कुमार ने बताया कि सड़क दुर्घटना में हड्डी टूटने जैसी समस्या आम है लेकिन अस्पताल में न तो हड्डी के डॉक्टर हैं और न ही ऑपरेशन के जरूरी सामान। ऐसे में परिजनों को घायलों के उपचार के लिए लखनऊ कानपुर की दौड़ लगानी पड़ रही।