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Unnao News: मानक दरकिनार, 3000 बच्चों को पढ़ा रहे 45 शिक्षक
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फोटो-11- गिरवरखेड़ा उच्च प्राथमिक स्कूल में छात्रों को पढ़ाते शिक्षक। संवाद
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उन्नाव। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की भारी कमी के कारण छात्रों की पढ़ाई राम भरोसे चल रही है। नगर क्षेत्र के 43 विद्यालयों के तीन हजार छात्रों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी सिर्फ 45 शिक्षकों के कंधों पर है। ज्यादातर स्कूलों में एक-एक शिक्षक ही हैं। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत तय शिक्षकों का मानक न तो नगर क्षेत्र और न ही ग्रामीण क्षेत्र में पूरा हो रहा है।
जिले में 2709 परिषदीय स्कूल संचालित हैं। इनमें 1883 प्राथमिक, 451 उच्च प्राथमिक और 375 कंपोजिट स्कूल शामिल हैं। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अनुसार प्राथमिक स्कूल में 30 छात्रों पर एक और उच्च प्राथमिक स्कूल में 35 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए। हालांकि यह मानक सिर्फ कागजों पर ही सीमित है।
नगर क्षेत्र के स्कूलों की सबसे स्थिति खराब है। वर्ष 2011 से शहर के स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती ही नहीं हुई। शहर में संचालित 10 कंपोजिट, पांच और और 28 प्राथमिक स्कूलों में तीन हजार छात्र पंजीकृत हैं। नियमानुसार एक प्राइमरी स्कूल में कम से कम दो और जूनियर स्कूल में तीन शिक्षकों की तैनाती जरूरी है। इस मानक के अनुसार 53 स्कूलों में 121 शिक्षकों की जरूरत है लेकिन 45 शिक्षक ही तैनात हैं। यहां 64 फीसदी शिक्षकों के पद खाली हैं। शहर के ज्यादातर स्कूल एक-एक शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में भी शिक्षकों की स्थिति खराब है। कहीं 47 छात्रों पर एक शिक्षक है, तो कहीं 45 छात्रों को पढ़ाने के लिए पांच शिक्षकों की तैनाती है। जिन स्कूलों में 45 छात्रों की जिम्मेदारी एक शिक्षक पर है, वहां पढ़ाई की गुणवत्ता और मिड-डे-मील सहित अन्य व्यवस्थाओं का संचालन मुश्किल हो रहा है। शिक्षकों की कमी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
फोटो-11- गिरवरखेड़ा उच्च प्राथमिक स्कूल में छात्रों को पढ़ाते शिक्षक। संवाद
फोटो-12- अच्छेपुर किरमिली उच्च प्राथमिक स्कूल में छात्रों को पढ़ाते शिक्षक। संवाद
एक शिक्षक के भरोसे 47 छात्र तो कहीं 46 छात्रों पर छह शिक्षक
हसनगंज। क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय अच्छेपुर किरमिली में 47 छात्रों का नामांकन है। यहां सिर्फ शिक्षक सुरेश रावत की तैनाती है। एक ही शिक्षक को सभी कक्षाओं के संचालन और विद्यालय की अन्य जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं। सवाल यह है कि एक शिक्षक सभी विषयों के साथ सभी कक्षाओं में कैसे छात्रों की पढ़रा सकता है। इसी ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल गिरिवरखेड़ा में 46 छात्र पंजीकृत हैं। इन छात्रों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों में अभिषेक, जितेंद्र, अनीता, अंजना के साथ दो शिक्षामित्र पशुपतिनाथ और शशि देवी शामिल हैं।
फोटो-13- प्राथमिक विद्यालय भूलेमऊ में ध्वस्त शौचालय। संवाद
सफीपुर ब्लॉक के स्कूलों में व्यवस्थाएं चौपट
सफीपुर। ब्लॉक के उच्च प्राथमिक स्कूल गौरी में नामांकित 52 छात्रों को पढ़ाने के लिए तीन शिक्षक हैं। सफीपुर खैरी प्राथमिक स्कूल में 45 छात्रों को पढ़ाने के लिए तीन शिक्षक और एक शिक्षामित्र हैं। एतबारपुर प्राथमिक स्कूल में 58 छात्रों को पढ़ाने के लिए प्रधान शिक्षक के साथ दो सहायक और दो शिक्षामित्र तैनात हैं। अब्दुल्लापुर प्राथमिक स्कूल में 29 छात्र पर एक शिक्षक और तीन शिक्षामित्र हैं। इस स्कूल में पानी पीने के लिए लगाया गया सबमर्सिबल एक महीने से खराब है। छात्र आंगनबाड़ी केंद्र में पानी पीने जाते हैं।
42 छात्रों के स्कूल में व्यवस्था बदहाल, गिरी दीवार,
पुरवा ब्लॉक के भूलेमऊ कंपोजिट स्कूल में 42 छात्रों को पढ़ाने के लिए प्रधान शिक्षक के साथ चार सहायक शिक्षक हैं। प्रधान शिक्षक दिनेश श्रीवास्तव ने बताया कि आंधी में मुख्य द्वार गिर गया था, अब तक नहीं बना। बालिका, बालिका के शौचालय भी ध्वस्त पड़े हैं, वाटर कूलर भी खराब है।
वर्जन....
नगर क्षेत्र में स्कूलों की तैनाती का कोई आदेश नहीं है, समायोजन भी नहीं किया जा सकता। ऐसे में जो व्यवस्था है, उसी से काम चलाया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में समायोजन की प्रक्रिया होनी है, मामला उच्च न्यायालय में है। वहां से समायोजन की गाइडलाइन को लेकर जो भी आदेश होगा, उसी आधार पर शिक्षकों का समायोजित कर व्यवस्था को सुधारने का प्रयास किया जाएगा। -शैलेश कुमार पांडेय, बेसिक शिक्षा अधिकारी
फोटो-14- शहर के जीआईसी स्कूल में छात्रों को पढ़ाते शिक्षक। संवाद
माध्यमिक स्कूलों का भी यही हाल, जीआईसी में स्वीकृत 23 पदों के सापेक्ष 11 की तैनाती
उन्नाव। माध्यमिक विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। जीआईसी में स्वीकृत 23 पदों के सापेक्ष 11 की तैनाती है। हिंदी के साथ गणित, बायो, केमिस्ट्री और फिजिक्स विषय पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं है। छात्र संख्या 650 है। नवाबगंज की जीजीआईसी में भी शिक्षकों की कमी होने से छात्राओं की पढ़ाई भगवान भरोसे है। स्कूल को सुचारू रूप से चलाने के लिए 21 शिक्षक और प्रधानाचार्य की जरूरत है लेकिन मौजूदा समय में सिर्फ आठ शिक्षक हैं। प्रवक्ता की बात की जाए तो 10 के सापेक्ष सिर्फ तीन ही हैं। मुख्य विषयों में भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, शिक्षाशास्त्र, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, गणित और संस्कृत विषय के प्रवक्ता नहीं हैं। स्कूल में मौजूदा समय में 1300 छात्राएं अध्ययनरत हैं। हड़हा जीजीआईसी में भी स्वीकृत 11 प्रवक्ताओं में सिर्फ छह की तैनाती है। मुख्य विषयों में फिजिक्स, गणित, बायोलॉजी, इतिहास और सामाजिक विषय के प्रवक्ता ही नहीं हैं। मौजूदा समय में 366 छात्राएं अध्ययनरत हैं। सफीपुर। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में छात्रा संख्या 760 है। इसके सापेक्ष प्रवक्ता के कुल 10 पदों के सापेक्ष मात्र दो की ही तैनाती है। सहायक अध्यापक सात होने चाहिए पर पांच ही हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक सुनीलदत्त का कहना है कि शिक्षकों की तैनाती शासन से होती है। स्थानीय स्तर पर प्रस्ताव भेजा जाता है, जो कई बार भेजा जा चुका है।
परिषदीय विद्यालय-2709
माध्यमिक में राजकीय विद्यालय-41
माध्यमिक में सहायता प्राप्त-59
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जिले में 2709 परिषदीय स्कूल संचालित हैं। इनमें 1883 प्राथमिक, 451 उच्च प्राथमिक और 375 कंपोजिट स्कूल शामिल हैं। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अनुसार प्राथमिक स्कूल में 30 छात्रों पर एक और उच्च प्राथमिक स्कूल में 35 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए। हालांकि यह मानक सिर्फ कागजों पर ही सीमित है।
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नगर क्षेत्र के स्कूलों की सबसे स्थिति खराब है। वर्ष 2011 से शहर के स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती ही नहीं हुई। शहर में संचालित 10 कंपोजिट, पांच और और 28 प्राथमिक स्कूलों में तीन हजार छात्र पंजीकृत हैं। नियमानुसार एक प्राइमरी स्कूल में कम से कम दो और जूनियर स्कूल में तीन शिक्षकों की तैनाती जरूरी है। इस मानक के अनुसार 53 स्कूलों में 121 शिक्षकों की जरूरत है लेकिन 45 शिक्षक ही तैनात हैं। यहां 64 फीसदी शिक्षकों के पद खाली हैं। शहर के ज्यादातर स्कूल एक-एक शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में भी शिक्षकों की स्थिति खराब है। कहीं 47 छात्रों पर एक शिक्षक है, तो कहीं 45 छात्रों को पढ़ाने के लिए पांच शिक्षकों की तैनाती है। जिन स्कूलों में 45 छात्रों की जिम्मेदारी एक शिक्षक पर है, वहां पढ़ाई की गुणवत्ता और मिड-डे-मील सहित अन्य व्यवस्थाओं का संचालन मुश्किल हो रहा है। शिक्षकों की कमी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
फोटो-11- गिरवरखेड़ा उच्च प्राथमिक स्कूल में छात्रों को पढ़ाते शिक्षक। संवाद
फोटो-12- अच्छेपुर किरमिली उच्च प्राथमिक स्कूल में छात्रों को पढ़ाते शिक्षक। संवाद
एक शिक्षक के भरोसे 47 छात्र तो कहीं 46 छात्रों पर छह शिक्षक
हसनगंज। क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय अच्छेपुर किरमिली में 47 छात्रों का नामांकन है। यहां सिर्फ शिक्षक सुरेश रावत की तैनाती है। एक ही शिक्षक को सभी कक्षाओं के संचालन और विद्यालय की अन्य जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं। सवाल यह है कि एक शिक्षक सभी विषयों के साथ सभी कक्षाओं में कैसे छात्रों की पढ़रा सकता है। इसी ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल गिरिवरखेड़ा में 46 छात्र पंजीकृत हैं। इन छात्रों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों में अभिषेक, जितेंद्र, अनीता, अंजना के साथ दो शिक्षामित्र पशुपतिनाथ और शशि देवी शामिल हैं।
फोटो-13- प्राथमिक विद्यालय भूलेमऊ में ध्वस्त शौचालय। संवाद
सफीपुर ब्लॉक के स्कूलों में व्यवस्थाएं चौपट
सफीपुर। ब्लॉक के उच्च प्राथमिक स्कूल गौरी में नामांकित 52 छात्रों को पढ़ाने के लिए तीन शिक्षक हैं। सफीपुर खैरी प्राथमिक स्कूल में 45 छात्रों को पढ़ाने के लिए तीन शिक्षक और एक शिक्षामित्र हैं। एतबारपुर प्राथमिक स्कूल में 58 छात्रों को पढ़ाने के लिए प्रधान शिक्षक के साथ दो सहायक और दो शिक्षामित्र तैनात हैं। अब्दुल्लापुर प्राथमिक स्कूल में 29 छात्र पर एक शिक्षक और तीन शिक्षामित्र हैं। इस स्कूल में पानी पीने के लिए लगाया गया सबमर्सिबल एक महीने से खराब है। छात्र आंगनबाड़ी केंद्र में पानी पीने जाते हैं।
42 छात्रों के स्कूल में व्यवस्था बदहाल, गिरी दीवार,
पुरवा ब्लॉक के भूलेमऊ कंपोजिट स्कूल में 42 छात्रों को पढ़ाने के लिए प्रधान शिक्षक के साथ चार सहायक शिक्षक हैं। प्रधान शिक्षक दिनेश श्रीवास्तव ने बताया कि आंधी में मुख्य द्वार गिर गया था, अब तक नहीं बना। बालिका, बालिका के शौचालय भी ध्वस्त पड़े हैं, वाटर कूलर भी खराब है।
वर्जन....
नगर क्षेत्र में स्कूलों की तैनाती का कोई आदेश नहीं है, समायोजन भी नहीं किया जा सकता। ऐसे में जो व्यवस्था है, उसी से काम चलाया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में समायोजन की प्रक्रिया होनी है, मामला उच्च न्यायालय में है। वहां से समायोजन की गाइडलाइन को लेकर जो भी आदेश होगा, उसी आधार पर शिक्षकों का समायोजित कर व्यवस्था को सुधारने का प्रयास किया जाएगा। -शैलेश कुमार पांडेय, बेसिक शिक्षा अधिकारी
फोटो-14- शहर के जीआईसी स्कूल में छात्रों को पढ़ाते शिक्षक। संवाद
माध्यमिक स्कूलों का भी यही हाल, जीआईसी में स्वीकृत 23 पदों के सापेक्ष 11 की तैनाती
उन्नाव। माध्यमिक विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। जीआईसी में स्वीकृत 23 पदों के सापेक्ष 11 की तैनाती है। हिंदी के साथ गणित, बायो, केमिस्ट्री और फिजिक्स विषय पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं है। छात्र संख्या 650 है। नवाबगंज की जीजीआईसी में भी शिक्षकों की कमी होने से छात्राओं की पढ़ाई भगवान भरोसे है। स्कूल को सुचारू रूप से चलाने के लिए 21 शिक्षक और प्रधानाचार्य की जरूरत है लेकिन मौजूदा समय में सिर्फ आठ शिक्षक हैं। प्रवक्ता की बात की जाए तो 10 के सापेक्ष सिर्फ तीन ही हैं। मुख्य विषयों में भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, शिक्षाशास्त्र, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, गणित और संस्कृत विषय के प्रवक्ता नहीं हैं। स्कूल में मौजूदा समय में 1300 छात्राएं अध्ययनरत हैं। हड़हा जीजीआईसी में भी स्वीकृत 11 प्रवक्ताओं में सिर्फ छह की तैनाती है। मुख्य विषयों में फिजिक्स, गणित, बायोलॉजी, इतिहास और सामाजिक विषय के प्रवक्ता ही नहीं हैं। मौजूदा समय में 366 छात्राएं अध्ययनरत हैं। सफीपुर। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में छात्रा संख्या 760 है। इसके सापेक्ष प्रवक्ता के कुल 10 पदों के सापेक्ष मात्र दो की ही तैनाती है। सहायक अध्यापक सात होने चाहिए पर पांच ही हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक सुनीलदत्त का कहना है कि शिक्षकों की तैनाती शासन से होती है। स्थानीय स्तर पर प्रस्ताव भेजा जाता है, जो कई बार भेजा जा चुका है।
परिषदीय विद्यालय-2709
माध्यमिक में राजकीय विद्यालय-41
माध्यमिक में सहायता प्राप्त-59

फोटो-11- गिरवरखेड़ा उच्च प्राथमिक स्कूल में छात्रों को पढ़ाते शिक्षक। संवाद

फोटो-11- गिरवरखेड़ा उच्च प्राथमिक स्कूल में छात्रों को पढ़ाते शिक्षक। संवाद

फोटो-11- गिरवरखेड़ा उच्च प्राथमिक स्कूल में छात्रों को पढ़ाते शिक्षक। संवाद