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Unnao News: डायट कर्मचारी ने एलआईसी एजेंट बताकर की लाखों की धोखाधड़ी
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उन्नाव। डायट की महिला कर्मचारी पर एलआईसी एजेंट बनकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। आरोप है कि पीड़ित को छह साल तक न तो बीमा बॉन्ड दिया और न ही रसीद। कोतवाली में शिकायत के बाद भी सुनवाई न होने पर पीड़ित ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय के आदेश पर महिला कर्मचारी के खिलाफ धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज की गई है।
आदर्शनगर मोहल्ला निवासी कृष्णदेव तिवारी ने बताया कि आवास-विकास कॉलोनी की रामलली दीक्षित डायट में कर्मचारी हैं। रामलली ने खुद को एलआईसी एजेंट बताया और कोड भी बताया था। उन्होंने 28 जनवरी 1999 को कृष्णदेव की एक लाख रुपये की बीमा पॉलिसी की थी। इसका अर्धवार्षिक प्रीमियम 465 रुपये था। वर्ष 2008 में कृष्णदेव ने तीन लाख रुपये की दूसरी एलआईसी पॉलिसी अन्य एजेंट से कराई। पता चलने पर रामलली ने दबाव बनाकर एक और पॉलिसी करा दी। इस पॉलिसी का वार्षिक प्रीमियम 13,235 रुपये बताया गया।
कृष्णदेव ने नई पॉलिसी का भुगतान किया लेकिन रामलली ने रसीद नहीं दी। दूसरा प्रीमियम भी ले लिया और दोनों रसीदें एक साथ देने को कहा। 29 मार्च 2021 को तीसरा प्रीमियम चेक से भुगतान किया गया। कोविड महामारी का बहाना बनाकर रामलली ने रसीद और बॉन्ड देने से इन्कार कर दिया। एलआईसी कार्यालय में पता चला कि कृष्णदेव की कोई पॉलिसी ही नहीं की गई थी।
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जांच में सामने आया कि एलआईसी एजेंट रामलली नहीं, बल्कि रामा तिवारी हैं। रामलली डायट में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं और रामा तिवारी के कोड पर काम करती हैं। रामलली ने पांच, सात जून 2008 और 20 जून को एलआईसी प्रशिक्षण में रामा तिवारी के स्थान पर हस्ताक्षर भी किए थे। पीड़ित के अनुसार, पुलिस ने पहले उनकी शिकायत पर सुनवाई नहीं की थी। कोतवाल चंद्रकांत मिश्र ने बताया कि तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।
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आदर्शनगर मोहल्ला निवासी कृष्णदेव तिवारी ने बताया कि आवास-विकास कॉलोनी की रामलली दीक्षित डायट में कर्मचारी हैं। रामलली ने खुद को एलआईसी एजेंट बताया और कोड भी बताया था। उन्होंने 28 जनवरी 1999 को कृष्णदेव की एक लाख रुपये की बीमा पॉलिसी की थी। इसका अर्धवार्षिक प्रीमियम 465 रुपये था। वर्ष 2008 में कृष्णदेव ने तीन लाख रुपये की दूसरी एलआईसी पॉलिसी अन्य एजेंट से कराई। पता चलने पर रामलली ने दबाव बनाकर एक और पॉलिसी करा दी। इस पॉलिसी का वार्षिक प्रीमियम 13,235 रुपये बताया गया।
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कृष्णदेव ने नई पॉलिसी का भुगतान किया लेकिन रामलली ने रसीद नहीं दी। दूसरा प्रीमियम भी ले लिया और दोनों रसीदें एक साथ देने को कहा। 29 मार्च 2021 को तीसरा प्रीमियम चेक से भुगतान किया गया। कोविड महामारी का बहाना बनाकर रामलली ने रसीद और बॉन्ड देने से इन्कार कर दिया। एलआईसी कार्यालय में पता चला कि कृष्णदेव की कोई पॉलिसी ही नहीं की गई थी।
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जांच में सामने आया कि एलआईसी एजेंट रामलली नहीं, बल्कि रामा तिवारी हैं। रामलली डायट में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं और रामा तिवारी के कोड पर काम करती हैं। रामलली ने पांच, सात जून 2008 और 20 जून को एलआईसी प्रशिक्षण में रामा तिवारी के स्थान पर हस्ताक्षर भी किए थे। पीड़ित के अनुसार, पुलिस ने पहले उनकी शिकायत पर सुनवाई नहीं की थी। कोतवाल चंद्रकांत मिश्र ने बताया कि तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।