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Unnao News: बिना गुरुजी देववाणी सीखना दुष्कर
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फोटो-23- मौरावां स्थित संस्कृत माध्यमिक स्कूल में पढ़ाई करते छात्र। संवाद
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उन्नाव। जिले में संचालित संस्कृत स्कूलों की हालत बहुत ही दयनीय है। देवभाषा सिखाने वाले इन स्कूलों में शिक्षक ही नहीं है। भवन भी जर्जर हैं। आलम यह है कि कमरों से प्लास्टर गिर रहे हैं। शिक्षकों के बैठने तक के सही कक्ष नहीं है। पड़ताल में दो स्कूल ऐसे मिले जहां छात्र ही नहीं आए थे। पता चला कि ये कभी-कभार ही आते हैं। पढ़ाई न होने से समय से पहले चले जाते हैं।
संस्कृत माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से जिले में कुल 11 स्कूल संचालित हैं। सुमेरपुर ब्लॉक और शहर के कलेक्टर फाटक के अंदर दो महाविद्यालय के साथ बांगरमऊ, देवारा, बड़ौरा और मौरावां में कुल चार राज्य सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूल संचालित हैं। इसके साथ ही पांच वित्तविहीन स्कूल कागजों पर दर्ज हैं जो मौजूदा समय में अति जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं।
फोटो-23- मौरावां स्थित संस्कृत माध्यमिक स्कूल में पढ़ाई करते छात्र। संवाद
56 में सिर्फ छह छात्र ही आए स्कूल
मौरावां के संस्कृत माध्यमिक स्कूल में 56 छात्रों का नामांकन है। शुक्रवार सुबह 11:15 बजे स्कूल में छह छात्र ही उपस्थित थे। प्रभारी प्रधानाचार्य सर्वेश अग्निहोत्री ने बताया कि मौसम सही न होने से अन्य छात्र नहीं आए। स्कूल भी पूरी तरह से जर्जर था। बताया कि कि इसकी स्थापना सन 1959 में हुई थी। वर्तमान में स्थिति बहुत ही खराब है। प्रशासनिक कक्ष को छोड़कर सभी कमरे गिर रहे हैं। बच्चों को बैठाना भी जोखिम उठाने जैसा है। बताया कि समस्याओं को देखते हुए वित्त नियंत्रक प्रयागराज की ओर से कायाकल्प और मरम्मत के लिए अलंकार योजना में शामिल किया गया है। इसमें 12.50 लाख की पहली किस्त भी मिल गई है। इसमें पढ़ाई के लिए चार कमरे, चहारदीवारी, शौचालय और पेयजल का निर्माण कराया जाना है। शेष कार्य दूसरी किस्त आने पर किया जाएगा। बताया कि कार्यवाहक प्रधानाचार्य के साथ तीन मानदेय शिक्षक, दो परमानेंट स्टाफ की जरूरत है।
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फोटो-24-कृष्णा वेद वेदांग संस्कृत विद्यालय में छात्रों के न होने से अभिलेखीय कार्य करतीं शिक्षिकाएं। संवाद
एक शिक्षक पर तीन स्कूलों की जिम्मेदारी
बांगरमऊ के स्टेशन रोड स्थित कृष्णा वेद वेदांग संस्कृत विद्यालय किराये के भवन में संचालित है। सुबह 11 बजे स्कूल में प्रधानाचार्य अंजुलता मौजूद थीं। बताया कि 56 छात्रों का नामांकन है। भवन जर्जर और मौसम खराब होने से जो छात्र सुबह आए थे वह घर चले गए। बताया कि स्टाफ में सहायक शिक्षक सर्वेश अग्निहोत्री हैं। उनके पास मौरावां और बिछिया ब्लॉक के बड़ौरा में संचालित श्री झाड़ेश्वर सामवेद संस्कृत माध्यमिक स्कूल का अतिरिक्त चार्ज है। बड़ौरा के स्कूल में मानदेय पर सिर्फ तीन शिक्षक हैं। वहां 36 छात्रों का नामांकन है। ऐसे में सर्वेश दो-दो दिन मौरावां और बड़ौरा और दो दिन अपने मूल स्कूल में रहते हैं। स्कूल में मानदेय पर एक शिक्षिका हैं। मानक के अनुसार प्रधानाचार्य के साथ चार शिक्षकों की तैनाती होनी चाहिए।
फोटो-25- देवीदत्त संस्कृत पाठशाला में रखे अभिलेख दिखाते रामबहादुर। संवाद
कोविड के बाद स्कूल का नहीं खुला ताला
सिकंदरपुर कर्ण क्षेत्र के अकबरपुर रोड पर संचालित वित्तविहीन पंडित देवीदत्त संस्कृत पाठशाला पूरी तरह से दम तोड़ चुका है। कोविड काल के बाद से स्कूल में ताला बंद है। तब यहां 50 छात्र पंजीकृत थे। प्रबंधक डॉ राज मिश्रा ने बताया कि लंबे समय से सरकारी सहायता के लिए गुहार लगाई गई लेकिन कुछ हल नहीं निकला। संसाधन न होने से किसी तरह बिल्डिंग की सुरक्षा की जा रही है। स्थिति यह है कि स्कूल की मान्यता खत्म न हो इसलिए प्रबंधक हर साल दो-चार ऑनलाइन प्रवेश करा देते हैं और बाद में उन्हीं को परीक्षा में शामिल करा दिया जाता है। बताया कि वर्तमान में संगठन के रामबहादुर वहीं रहते हैं। सीसीटीवी लगवाए गए हैं ताकि चोरी न हो।
फोटो-26- कलेक्टरगंज स्थित शिवप्रसाद पांडेय आदर्श संस्कृत महाविद्यालय। संवाद
संस्कृत महाविद्यालय में सिर्फ 85 छात्र
शहर के कलेक्टरगंज में संचालित शिवप्रसाद पांडेय आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में 85 छात्रों का नामांकन हैं। शुक्रवार को 22 छात्र ही कॉलेज आए थे। प्राचार्य नीरजा दीक्षित ने बताया कि महाविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों से पांच रुपये शिक्षा शुल्क, पांच रुपये विकास शुल्क और दो रुपये क्रीड़ा शुल्क लिया जाता है। पूरे साल की फीस 1200 रुपये है। रेनोवेशन का कोई पैसा नहीं आता। बता दें कि इस कॉलेज का डीआईओएस ने 23 जुलाई को निरीक्षण भी किया था। तब दो छात्र उपस्थित मिले थे। निर्देश दिए थे कि 50 छात्रों के नामांकन के बाद ही वेतन भी जारी होगा। उसके बाद छात्र संख्या 85 हुई है। डीआईओएस को अन्य व्यवस्थाएं भी दुरुस्त नहीं मिली थीं।
वर्जन...
संस्कृत स्कूलों के लिए जो व्यवस्था है, उसी में सुधार का प्रयास किया जा रहा है। जांच में जहां छात्र संख्या कम मिलती है वहां शिक्षकों का वेतन रोककर छात्र संख्या बढ़ाने के लिए कहा जा रहा है। प्रोजेक्ट अलंकार से दो स्कूलों को सही कराने को कहा गया है। उसकी किस्त भी जारी हो गई है। सुधार के और प्रयास किए जाएंगे। -सुनीलदत्त, डीआईओएस।
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संस्कृत माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से जिले में कुल 11 स्कूल संचालित हैं। सुमेरपुर ब्लॉक और शहर के कलेक्टर फाटक के अंदर दो महाविद्यालय के साथ बांगरमऊ, देवारा, बड़ौरा और मौरावां में कुल चार राज्य सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूल संचालित हैं। इसके साथ ही पांच वित्तविहीन स्कूल कागजों पर दर्ज हैं जो मौजूदा समय में अति जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं।
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फोटो-23- मौरावां स्थित संस्कृत माध्यमिक स्कूल में पढ़ाई करते छात्र। संवाद
56 में सिर्फ छह छात्र ही आए स्कूल
मौरावां के संस्कृत माध्यमिक स्कूल में 56 छात्रों का नामांकन है। शुक्रवार सुबह 11:15 बजे स्कूल में छह छात्र ही उपस्थित थे। प्रभारी प्रधानाचार्य सर्वेश अग्निहोत्री ने बताया कि मौसम सही न होने से अन्य छात्र नहीं आए। स्कूल भी पूरी तरह से जर्जर था। बताया कि कि इसकी स्थापना सन 1959 में हुई थी। वर्तमान में स्थिति बहुत ही खराब है। प्रशासनिक कक्ष को छोड़कर सभी कमरे गिर रहे हैं। बच्चों को बैठाना भी जोखिम उठाने जैसा है। बताया कि समस्याओं को देखते हुए वित्त नियंत्रक प्रयागराज की ओर से कायाकल्प और मरम्मत के लिए अलंकार योजना में शामिल किया गया है। इसमें 12.50 लाख की पहली किस्त भी मिल गई है। इसमें पढ़ाई के लिए चार कमरे, चहारदीवारी, शौचालय और पेयजल का निर्माण कराया जाना है। शेष कार्य दूसरी किस्त आने पर किया जाएगा। बताया कि कार्यवाहक प्रधानाचार्य के साथ तीन मानदेय शिक्षक, दो परमानेंट स्टाफ की जरूरत है।
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फोटो-24-कृष्णा वेद वेदांग संस्कृत विद्यालय में छात्रों के न होने से अभिलेखीय कार्य करतीं शिक्षिकाएं। संवाद
एक शिक्षक पर तीन स्कूलों की जिम्मेदारी
बांगरमऊ के स्टेशन रोड स्थित कृष्णा वेद वेदांग संस्कृत विद्यालय किराये के भवन में संचालित है। सुबह 11 बजे स्कूल में प्रधानाचार्य अंजुलता मौजूद थीं। बताया कि 56 छात्रों का नामांकन है। भवन जर्जर और मौसम खराब होने से जो छात्र सुबह आए थे वह घर चले गए। बताया कि स्टाफ में सहायक शिक्षक सर्वेश अग्निहोत्री हैं। उनके पास मौरावां और बिछिया ब्लॉक के बड़ौरा में संचालित श्री झाड़ेश्वर सामवेद संस्कृत माध्यमिक स्कूल का अतिरिक्त चार्ज है। बड़ौरा के स्कूल में मानदेय पर सिर्फ तीन शिक्षक हैं। वहां 36 छात्रों का नामांकन है। ऐसे में सर्वेश दो-दो दिन मौरावां और बड़ौरा और दो दिन अपने मूल स्कूल में रहते हैं। स्कूल में मानदेय पर एक शिक्षिका हैं। मानक के अनुसार प्रधानाचार्य के साथ चार शिक्षकों की तैनाती होनी चाहिए।
फोटो-25- देवीदत्त संस्कृत पाठशाला में रखे अभिलेख दिखाते रामबहादुर। संवाद
कोविड के बाद स्कूल का नहीं खुला ताला
सिकंदरपुर कर्ण क्षेत्र के अकबरपुर रोड पर संचालित वित्तविहीन पंडित देवीदत्त संस्कृत पाठशाला पूरी तरह से दम तोड़ चुका है। कोविड काल के बाद से स्कूल में ताला बंद है। तब यहां 50 छात्र पंजीकृत थे। प्रबंधक डॉ राज मिश्रा ने बताया कि लंबे समय से सरकारी सहायता के लिए गुहार लगाई गई लेकिन कुछ हल नहीं निकला। संसाधन न होने से किसी तरह बिल्डिंग की सुरक्षा की जा रही है। स्थिति यह है कि स्कूल की मान्यता खत्म न हो इसलिए प्रबंधक हर साल दो-चार ऑनलाइन प्रवेश करा देते हैं और बाद में उन्हीं को परीक्षा में शामिल करा दिया जाता है। बताया कि वर्तमान में संगठन के रामबहादुर वहीं रहते हैं। सीसीटीवी लगवाए गए हैं ताकि चोरी न हो।
फोटो-26- कलेक्टरगंज स्थित शिवप्रसाद पांडेय आदर्श संस्कृत महाविद्यालय। संवाद
संस्कृत महाविद्यालय में सिर्फ 85 छात्र
शहर के कलेक्टरगंज में संचालित शिवप्रसाद पांडेय आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में 85 छात्रों का नामांकन हैं। शुक्रवार को 22 छात्र ही कॉलेज आए थे। प्राचार्य नीरजा दीक्षित ने बताया कि महाविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों से पांच रुपये शिक्षा शुल्क, पांच रुपये विकास शुल्क और दो रुपये क्रीड़ा शुल्क लिया जाता है। पूरे साल की फीस 1200 रुपये है। रेनोवेशन का कोई पैसा नहीं आता। बता दें कि इस कॉलेज का डीआईओएस ने 23 जुलाई को निरीक्षण भी किया था। तब दो छात्र उपस्थित मिले थे। निर्देश दिए थे कि 50 छात्रों के नामांकन के बाद ही वेतन भी जारी होगा। उसके बाद छात्र संख्या 85 हुई है। डीआईओएस को अन्य व्यवस्थाएं भी दुरुस्त नहीं मिली थीं।
वर्जन...
संस्कृत स्कूलों के लिए जो व्यवस्था है, उसी में सुधार का प्रयास किया जा रहा है। जांच में जहां छात्र संख्या कम मिलती है वहां शिक्षकों का वेतन रोककर छात्र संख्या बढ़ाने के लिए कहा जा रहा है। प्रोजेक्ट अलंकार से दो स्कूलों को सही कराने को कहा गया है। उसकी किस्त भी जारी हो गई है। सुधार के और प्रयास किए जाएंगे। -सुनीलदत्त, डीआईओएस।

फोटो-23- मौरावां स्थित संस्कृत माध्यमिक स्कूल में पढ़ाई करते छात्र। संवाद

फोटो-23- मौरावां स्थित संस्कृत माध्यमिक स्कूल में पढ़ाई करते छात्र। संवाद

फोटो-23- मौरावां स्थित संस्कृत माध्यमिक स्कूल में पढ़ाई करते छात्र। संवाद